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राजस्थान

आईएएस प्रोबेशनर्स का पुलिस दौरा: जयपुर: आईएएस प्रोबेशनर्स ने सीखी पुलिसिंग की बारीकियां

जोगेन्द्र सिंह शेखावत

नए आईएएस अधिकारियों ने पुलिस मुख्यालय में कानून व्यवस्था और समन्वय के गुर सीखे।

HIGHLIGHTS

  • आईएएस प्रोबेशनर्स ने राजस्थान पुलिस मुख्यालय का आधिकारिक भ्रमण किया।
  • डीजीपी राजीव कुमार शर्मा ने प्रशासनिक नेतृत्व और समन्वय पर जोर दिया।
  • अधिकारियों ने साइबर अपराधों से निपटने के लिए 1930 कंट्रोल रूम देखा।
  • अभय कमांड सेंटर के जरिए स्मार्ट पुलिसिंग मॉडल का प्रदर्शन किया गया।
ias probationers visit rajasthan police headquarters jaipur

जयपुर | राजस्थान कैडर के प्रशिक्षु आईएएस अधिकारियों के एक उच्च स्तरीय दल ने बुधवार को पुलिस मुख्यालय का दौरा किया। इस विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य युवा अधिकारियों को पुलिसिंग की चुनौतियों और प्रशासनिक समन्वय से रूबरू कराना था।

पुलिस और प्रशासन का तालमेल जरूरी

महानिदेशक पुलिस राजीव कुमार शर्मा ने प्रशिक्षु अधिकारियों के साथ एक विशेष संवाद सत्र आयोजित किया। उन्होंने कहा कि जिला स्तर पर सफल प्रशासनिक नेतृत्व के लिए पुलिस और प्रशासन के बीच बेहतर तालमेल होना बहुत ही अनिवार्य है।

डीजी स्पेशल ऑपरेशन्स आनंद कुमार श्रीवास्तव ने जिला मजिस्ट्रेट और पुलिस अधीक्षक की संयुक्त भूमिका पर व्याख्यान दिया। उन्होंने बताया कि कानून व्यवस्था बनाए रखने में दोनों विभागों के बीच निरंतर संचार और सहयोग सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है।

"फील्ड में सफल प्रशासनिक नेतृत्व के लिए पुलिस और प्रशासन के बीच बेहतर तालमेल होना बहुत ही अनिवार्य है।" - डीजीपी राजीव कुमार शर्मा

सड़क सुरक्षा और पुलिस फ्रेमवर्क

प्रशिक्षण के दौरान एडीजी बीजू जॉर्ज जोसेफ ने स्टेट पुलिस फ्रेमवर्क पर प्रस्तुतीकरण दिया। उन्होंने राजस्थान पुलिस की संरचना, कार्यप्रणाली और प्रशासनिक व्यवस्था के बारे में अधिकारियों को विस्तार से जानकारी दी।

महानिदेशक प्रशिक्षण एवं यातायात अनिल पालीवाल ने सड़क सुरक्षा के व्यावहारिक पहलुओं पर चर्चा की। उन्होंने जिला सड़क सुरक्षा समितियों की कार्यप्रणाली और यातायात प्रबंधन में आने वाली चुनौतियों के समाधान के लिए दिशा-निर्देश साझा किए।

ड्रग्स और साइबर अपराध की चुनौतियां

नार्को कोऑर्डिनेशन समिति (NCORD) की भूमिका पर आईजी विकास कुमार ने प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि जिला स्तर पर मादक पदार्थों के नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए पुलिस और प्रशासन को मिलकर काम करना होगा।

तकनीकी सत्र में डीआईजी साइबर क्राइम शांतनु कुमार सिंह ने प्रोबेशनर्स को डिजिटल खतरों से अवगत कराया। अधिकारियों ने 1930 साइबर कंट्रोल रूम का दौरा कर ठगी के मामलों में की जाने वाली त्वरित कार्रवाई को देखा।

स्मार्ट पुलिसिंग और सुरक्षा मॉडल

महिला एवं बाल सुरक्षा के लिए संचालित विशेष योजनाओं के बारे में डीआईजी श्वेता धनखड़ ने ब्रीफिंग दी। उन्होंने कमजोर वर्गों के अधिकारों की रक्षा के लिए पुलिस द्वारा किए जा रहे प्रयासों की जानकारी साझा की।

भ्रमण के अंत में अधिकारियों ने अभय कमांड सेंटर का अवलोकन किया। पुलिस कमिश्नर सचिन मित्तल ने सीसीटीवी सर्विलांस, ई-चालान और आपातकालीन रेस्पॉन्स सिस्टम की कार्यप्रणाली का प्रदर्शन कर आधुनिक स्मार्ट पुलिसिंग मॉडल से परिचय कराया।

यह दौरा युवा आईएएस अधिकारियों के लिए भविष्य की प्रशासनिक चुनौतियों से निपटने में सहायक सिद्ध होगा। पुलिस और प्रशासन के बीच बेहतर समझ विकसित होने से राज्य के सुशासन और कानून व्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी।

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