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पत्रकारों का जयपुर में महापड़ाव: जैसलमेर में पत्रकार पर प्रशासनिक अत्याचार: जयपुर में IFWJ का सातवें दिन भी धरना जारी, प्रधानमंत्री कार्यालय तक पहुंचेगी गूंज

गणपत सिंह मांडोली · 04 अप्रैल 2026, 08:23 रात
जैसलमेर में वरिष्ठ पत्रकार के खिलाफ प्रशासनिक निरंकुशता के विरोध में जयपुर के शहीद स्मारक पर आईएफडब्ल्यूजे का धरना सातवें दिन भी जारी रहा। संगठन ने सरकार पर हठधर्मिता का आरोप लगाते हुए मामले को प्रधानमंत्री कार्यालय ले जाने की चेतावनी दी है।

जयपुर | राजस्थान की राजधानी जयपुर में पत्रकारों का आंदोलन अब उग्र रूप लेता जा रहा है। जैसलमेर में एक वरिष्ठ पत्रकार के विरुद्ध हुई प्रशासनिक कार्रवाई ने पूरे प्रदेश के मीडिया जगत को आंदोलित कर दिया है। शहीद स्मारक पर इंडियन फेडरेशन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट्स (IFWJ) के बैनर तले चल रहा धरना आज सातवें दिन भी अनवरत जारी रहा।

प्रशासनिक निरंकुशता के खिलाफ एकजुटता

पत्रकारों का कहना है कि लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर इस तरह का प्रहार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। संगठन ने स्पष्ट किया है कि जब तक न्याय नहीं मिलता, यह संघर्ष थमेगा नहीं। धरने के सातवें दिन भी सरकार की ओर से वार्ता की कोई पहल नहीं की गई है। इससे पत्रकारों में भारी रोष व्याप्त है।

कलेक्टर की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल

आईएफडब्ल्यूजे के प्रदेश अध्यक्ष उपेंद्र सिंह राठौड़ ने सरकार की मंशा पर कड़े सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि जैसलमेर के तत्कालीन कलेक्टर ने पद का दुरुपयोग करते हुए एक पत्रकार की आजीविका को नष्ट कर दिया। सरकार ने जनभावनाओं को दरकिनार करते हुए दोषी अधिकारी को संरक्षण दिया है। राठौड़ ने आरोप लगाया कि सरकार खुद नहीं चाहती कि यह गतिरोध समाप्त हो।

भ्रष्टाचार के खुलासे का मिला प्रतिशोध

मामले की जड़ में जैसलमेर में हुए नियम विरुद्ध भू-आवंटन की खबरें बताई जा रही हैं। आरोप है कि आईएएस प्रतापसिंह नाथावत ने निजी कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए नियमों को ताक पर रख दिया था। जब इन खबरों को प्रमुखता से प्रकाशित किया गया, तो प्रशासन ने द्वेषपूर्ण कार्रवाई शुरू कर दी। पत्रकार की आजीविका के साधन 'स्वाद रेस्टोरेंट' को निशाना बनाया गया।

करोड़ों का नुकसान और आर्थिक प्रहार

उपेंद्र सिंह राठौड़ ने बताया कि वह वर्ष 2004 से जैसलमेर के डेजर्ट क्लब में रेस्टोरेंट का संचालन कर रहे थे। उन्होंने दिसंबर 2025 तक का किराया भी अग्रिम जमा कर रखा था। इसके बावजूद कलेक्टर ने विधि विरुद्ध जाकर रेस्टोरेंट को सीज किया और उसे जमींदोज कर दिया। इस कार्रवाई से पत्रकार को लगभग 1 करोड़ रुपये से अधिक का आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है।

जीरो टॉलरेंस नीति की खुली पोल

संगठन का कहना है कि मुख्यमंत्री की जीरो टॉलरेंस की नीति को अधिकारी ही चुनौती दे रहे हैं। जैसलमेर कलेक्टर का तबादला करना कोई सजा नहीं है, बल्कि उन्हें वित्त विभाग में महत्वपूर्ण पद देना पुरस्कार जैसा है। इससे स्पष्ट होता है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ सरकार की बातें केवल कागजी हैं। आम जनता और पर्यावरण प्रेमी भी इस अधिकारी के खिलाफ सड़क पर उतरे थे।

दिल्ली कूच और प्रधानमंत्री कार्यालय में शिकायत

अब यह आंदोलन केवल जयपुर तक सीमित नहीं रहेगा। उपेंद्र सिंह राठौड़ 5 और 6 अप्रैल को दिल्ली में राष्ट्रीय पदाधिकारियों की बैठक में शामिल होंगे। वहां प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) को इस पूरे प्रकरण और आईएएस अधिकारी के भ्रष्टाचार की विस्तृत जानकारी दी जाएगी। केंद्र सरकार से हस्तक्षेप की मांग की जाएगी ताकि राज्य में पत्रकारों को सुरक्षा मिल सके।

आंदोलन का जिलावार प्रबंधन

धरने को लंबे समय तक चलाने के लिए संगठन ने एक विशेष रणनीति तैयार की है। प्रतिदिन एक अलग जिले को धरने की जिम्मेदारी सौंपी जा रही है। आज सातवें और कल आठवें दिन की जिम्मेदारी सिरोही जिले के पत्रकारों के पास है। जोधपुर संभाग प्रभारी विक्रम सिंह करणोत के नेतृत्व में पत्रकार साथी शहीद स्मारक पर डटे हुए हैं।

न्याय मिलने तक जारी रहेगा संघर्ष

प्रदेश महासचिव मनवीर सिंह चुंडावत ने कहा कि यह लड़ाई केवल एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि पूरे पत्रकार जगत के सम्मान की है। अगर आज चुप रहे तो कल किसी भी पत्रकार के साथ ऐसा हो सकता है। संगठन की मांग है कि दोषी अधिकारी को तुरंत निलंबित किया जाए और हुए नुकसान की भरपाई की जाए। धरने पर आज दो दर्जन से अधिक पत्रकार साथी उपस्थित रहकर अपना विरोध दर्ज करा रहे हैं।

सरकार की हठधर्मिता पर तीखा हमला

पत्रकारों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही सकारात्मक वार्ता नहीं हुई, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। सरकार की चुप्पी लोकतंत्र के लिए घातक संकेत है। राजस्थान के कोने-कोने से पत्रकार जयपुर पहुंच रहे हैं। आने वाले दिनों में संभाग स्तर पर भी प्रदर्शन की योजना बनाई जा रही है। यह लड़ाई अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुकी है।

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