राजस्थान

IIT जोधपुर का कैंसर पर प्रहार: IIT जोधपुर की नई तकनीक: अब एक साथ होगा कैंसर का टेस्ट और इलाज

thinQ360 · 24 अप्रैल 2026, 02:31 दोपहर
IIT जोधपुर के वैज्ञानिकों ने नैनो तकनीक से कैंसर की जांच और उपचार का एकीकृत सिस्टम बनाया है।

जोधपुर | आईआईटी जोधपुर के वैज्ञानिकों ने कैंसर के विरुद्ध जंग में एक क्रांतिकारी उपलब्धि हासिल की है, जिससे अब इस घातक बीमारी की पहचान और उपचार एक ही समय पर संभव हो सकेगा। वैज्ञानिकों ने एक ऐसा आधुनिक थेरानोस्टिक्स सिस्टम तैयार किया है जो नैनो टेक्नोलॉजी पर आधारित है।

कैंसर के इलाज में नई क्रांति

कैंसर एक ऐसी बीमारी है जिसका नाम सुनते ही रूह कांप जाती है, लेकिन अब तकनीक इसे हराने के करीब है।

आईआईटी जोधपुर के शोधकर्ताओं ने नैनो मेटेरियल्स का उपयोग करके एक एकीकृत मंच तैयार किया है जो काफी प्रभावशाली है।

इस नई तकनीक के जरिए मरीज को अब अलग-अलग जांच और इलाज की लंबी प्रक्रियाओं से नहीं गुजरना पड़ेगा।

यह सिस्टम न केवल कैंसर कोशिकाओं की पहचान करता है, बल्कि उन्हें तुरंत नष्ट करने की क्षमता भी रखता है।

वैज्ञानिकों का दावा है कि यह तकनीक पारंपरिक कीमोथेरेपी की तुलना में कहीं अधिक सटीक और सुरक्षित साबित होगी।

थेरानोस्टिक्स सिस्टम की कार्यप्रणाली

थेरानोस्टिक्स शब्द 'थेरेपी' और 'डायग्नोस्टिक्स' के मेल से बना है, जो उपचार और निदान को एक साथ जोड़ता है।

इस सिस्टम में विशेष रूप से डिजाइन किए गए नैनो कणों का उपयोग किया जाता है जो शरीर में घूमते हैं।

ये कण केवल कैंसर से प्रभावित कोशिकाओं को ही अपना निशाना बनाते हैं और स्वस्थ कोशिकाओं को छोड़ देते हैं।

इससे मरीज के शरीर पर होने वाले हानिकारक दुष्प्रभावों को न्यूनतम स्तर पर लाया जा सकता है जो एक बड़ी राहत है।

आईआईटी की नैनोमेड लैब में इन सूक्ष्म कणों को बड़ी सावधानी के साथ विकसित और टेस्ट किया जा रहा है।

नैनो मेटेरियल्स: सूक्ष्म सुपरहीरो

शोध टीम वर्तमान में अगली पीढ़ी के 2डी नैनो मेटेरियल्स पर काम कर रही है जो विज्ञान का चमत्कार हैं।

इनमें एमएक्सन्स, मेटल ऑर्गेनिक फ्रेमवर्क्स (MOFs), ब्लैक फॉस्फोरस और बोरोफीन जैसी आधुनिक सामग्रियां शामिल हैं।

वैज्ञानिक इन सामग्रियों को 'टाइनी सुपरहीरोज' कह रहे हैं क्योंकि इनकी कार्यक्षमता अद्भुत और बहुत सटीक है।

ये नैनो मेटेरियल्स अपनी विशेष सतह के कारण दवाओं को सीधे प्रभावित हिस्से तक ले जाने में सक्षम होते हैं।

यह प्रक्रिया सुनिश्चित करती है कि दवा का एक-एक कतरा सीधे कैंसर की जड़ पर प्रहार करे और व्यर्थ न जाए।

डॉ. रविराज वनकायाला का नेतृत्व

इस महत्वपूर्ण शोध का नेतृत्व बायोसाइंस और बायो इंजीनियरिंग विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. रविराज वनकायाला कर रहे हैं।

उनकी टीम ने दिन-रात मेहनत करके नैनो-कैरियर्स के ऐसे मॉडल विकसित किए हैं जो मानव शरीर के अनुकूल हैं।

डॉ. वनकायाला के अनुसार, यह शोध कैंसर उपचार की पूरी दिशा को बदलने की क्षमता रखता है और उम्मीद जगाता है।

हमारा उद्देश्य कैंसर के इलाज को इतना सटीक बनाना है कि मरीज को कम से कम तकलीफ हो और परिणाम बेहतर मिलें।

उनकी टीम का मुख्य फोकस कैंसर कोशिकाओं को नियंत्रित करना और उन्हें जड़ से खत्म करने की तकनीक विकसित करना है।

फोटोथेरानोस्टिक्स तकनीक का जादू

इस पूरे शोध की सबसे बड़ी खासियत 'फोटोथेरानोस्टिक्स' तकनीक है, जो प्रकाश के विज्ञान पर पूरी तरह आधारित है।

इसमें नजदीकी अवरक्त प्रकाश (NIR Light) और नैनो प्रौद्योगिकी के अनूठे संयोजन का उपयोग किया जाता है।

जब एनआईआर प्रकाश शरीर के भीतर नैनो मेटेरियल्स पर पड़ता है, तो वे स्थानीय ताप या गर्मी उत्पन्न करते हैं।

यह गर्मी कैंसर कोशिकाओं को भीतर से जलाकर नष्ट कर देती है, जबकि आसपास के ऊतक पूरी तरह सुरक्षित रहते हैं।

इसके साथ ही, यह प्रकाश सक्रिय ऑक्सीजन कण बनाता है जो कैंसर सेल्स को खत्म करने में मदद करते हैं।

बायोमिमेटिक नैनो-कैरियर्स की भूमिका

प्रकृति से प्रेरित होकर वैज्ञानिक अब 'बायोमिमेटिक नैनो-कैरियर्स' विकसित करने की दिशा में भी तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।

ये सिस्टम मानव शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली यानी इम्यून सिस्टम को चकमा देने की अद्भुत क्षमता रखते हैं।

अक्सर शरीर का रक्षा तंत्र बाहरी दवाओं को नष्ट कर देता है, लेकिन ये कैरियर्स उसे आसानी से पार कर लेते हैं।

इससे दवा बिना किसी रुकावट के सीधे प्रभावित हिस्से तक पहुँच जाती है और अपना पूरा असर दिखाती है।

यह तकनीक कैंसर के उन प्रकारों के लिए वरदान है जहाँ पारंपरिक दवाएं प्रभावी रूप से नहीं पहुँच पाती हैं।

सुरक्षा और उन्नत परीक्षण मॉडल

किसी भी नई चिकित्सा तकनीक के लिए सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण पहलू होती है और वैज्ञानिक इस पर गंभीर हैं।

आईआईटी जोधपुर की टीम इन तकनीकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उन्नत कोशिकीय मॉडल्स का उपयोग कर रही है।

ये मॉडल मानव शरीर की वास्तविक परिस्थितियों का सटीक अनुकरण करते हैं ताकि परिणामों की सत्यता जांची जा सके।

क्लिनिकल उपयोग से पहले इन नैनो मेटेरियल्स के व्यवहार को गहराई से समझना शोध का अनिवार्य हिस्सा है।

वैज्ञानिकों का लक्ष्य है कि जब यह तकनीक बाजार में आए, तो यह पूरी तरह सुरक्षित और भरोसेमंद हो।

भविष्य की चिकित्सा और चुनौतियां

हालांकि यह शोध बहुत उत्साहजनक है, लेकिन इसे आम जनता तक पहुँचाने में अभी कई चरणों की आवश्यकता है।

लैब से लेकर अस्पताल के बेड तक का सफर चुनौतियों भरा होता है, जिसमें व्यापक ट्रायल शामिल होते हैं।

आईआईटी जोधपुर का यह कदम भारत को वैश्विक चिकित्सा अनुसंधान के मानचित्र पर मजबूती से स्थापित करता है।

भविष्य में, इस तकनीक के माध्यम से कैंसर का इलाज सस्ता, सुलभ और अधिक प्रभावी होने की पूरी संभावना है।

यह नैनो-क्रांति न केवल कैंसर बल्कि अन्य जटिल बीमारियों के इलाज के लिए भी नए रास्ते खोल सकती है।

निष्कर्ष और प्रभाव

आईआईटी जोधपुर के वैज्ञानिकों द्वारा विकसित यह थेरानोस्टिक्स सिस्टम कैंसर के खिलाफ लड़ाई में एक मील का पत्थर है। नैनो टेक्नोलॉजी और प्रकाश विज्ञान का यह संगम मानवता के लिए स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक नई उम्मीद की किरण लेकर आया है।

*Edit with Google AI Studio

← पूरा आर्टिकल पढ़ें (Full Version)