राजस्थान

DFA अध्यक्ष बने ब्रिगेडियर शेखावत: ब्रिगेडियर शेखावत बने DFA अध्यक्ष, बीकानेर फुटबॉल को मिलेगी नई गति

महेन्द्रसिंह शेखावत · 09 अगस्त 2026, 08:40 रात
राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी रहे ब्रिगेडियर जितेंद्र सिंह शेखावत को बीकानेर फुटबॉल एसोसिएशन का निर्विरोध अध्यक्ष चुना गया है। उनके नेतृत्व में फुटबॉल को नई गति मिलने की उम्मीद है।

बीकानेर | फुटबॉल के इतिहास में बीकानेर का नाम लंबे समय से सम्मान के साथ लिया जाता रहा है। इसी गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से ब्रिगेडियर जितेंद्र सिंह शेखावत को सर्वसम्मति से बीकानेर फुटबॉल एसोसिएशन (DFA) का निर्विरोध अध्यक्ष चुना गया है।

शेखावत के नेतृत्व में बीकानेर फुटबॉल को नई उम्मीद

बीकानेर फुटबॉल एसोसिएशन की साधारण सभा एवं एक्जीक्यूटिव कमेटी की बैठक में यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया।

इस बैठक के दौरान राजस्थान फुटबॉल एसोसिएशन के सचिव दिलीप सिंह पर्यवेक्षक के रूप में उपस्थित रहे।

उन्होंने कहा कि राजस्थान फुटबॉल एसोसिएशन राज्यभर में फुटबॉल को बढ़ावा देने के लिए सक्रिय रूप से कार्य कर रहा है।

दिलीप सिंह ने बताया कि राजस्थान के खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय स्तर पर उल्लेखनीय प्रदर्शन करते हुए राज्य का नाम रोशन किया है।

उन्होंने यह भी कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में भी फुटबॉल प्रतिभाएं तेजी से उभर रही हैं।

खिलाड़ियों को बेहतर अवसर मिलेंगे

नवनिर्वाचित अध्यक्ष ब्रिगेडियर जितेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि बीकानेर में फुटबॉल के बेहतर प्रशिक्षण और सुविधाओं के विस्तार के लिए प्रयास किए जाएंगे।

उन्होंने विशेष रूप से एमएसआर फुटबॉल एकेडमी को आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने का भरोसा दिलाया।

शेखावत ने खिलाड़ियों को बेहतर अवसर दिलाने की दिशा में कार्य करने का भी संकल्प लिया।

बैठक में उपस्थित सदस्यों ने उम्मीद जताई कि नए नेतृत्व में बीकानेर फुटबॉल को नई ऊर्जा मिलेगी।

कौन हैं ब्रिगेडियर जितेंद्र सिंह शेखावत?

ब्रिगेडियर शेखावत एक राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी रहे हैं। उनका खेल कौशल और फौलादी अनुशासन उन्हें दूसरों से अलग बनाता है।

भारतीय फुटबॉल टीम के पूर्व कप्तान एवं अर्जुन अवार्डी मगन सिंह राजवी और चैन सिंह राजवी जैसे दिग्गज खिलाड़ियों को देश को देने वाला बीकानेर आज “मिनी ब्राजील” के नाम से भी पहचाना जाता है।

विशेष रूप से ढींगसरी की बालिका फुटबॉल टीम के उत्कृष्ट प्रदर्शन ने बीकानेर को अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहचान दिलाई है।

सैनिक स्कूल से खेल के सफर की शुरुआत

ब्रिगेडियर शेखावत के खेल कौशल की नींव सैनिक स्कूल, चित्तौड़गढ़ में पड़ी, जहां उन्होंने कक्षा छह से लेकर 12वीं तक की स्कूली शिक्षा ग्रहण की।

फॉरवर्ड पोजीशन पर खेलने वाले जितेन्द्र सिंह शेखावत के खेल करियर की शुरुआत बेहद धमाकेदार रही।

1979 में अजमेर के मेयो कॉलेज में उन्होंने 8 गोल दागकर हाईएस्ट स्कोरर का खिताब अपने नाम किया।

इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। 1981 में, जब वे नौवीं कक्षा में थे, तब उन्होंने मद्रास (अब चेन्नई) में नेशनल सब-जूनियर चैम्पियनशिप में हिस्सा लिया।

राष्ट्रीय स्तर पर मनवाया प्रतिभा का लोहा

उनका सफर लगातार ऊंचाइयां छूता रहा। 1982 में पांडिचेरी और 1983 में गोवा में उन्होंने जूनियर नेशनल में राजस्थान टीम का प्रतिनिधित्व किया।

उनके बूट्स ने देश भर के मैदानों की धूल फांकी—चाहे वह प्रतिष्ठित डीसीएम (DCM) ट्रॉफी हो, डूरंड कप हो, या श्रीनगर का शेख अब्दुल्ला गोल्ड कप।

1986 में भिलाई में उन्होंने सीनियर नेशनल (संतोष ट्रॉफी) में अपना जलवा बिखेरा।

उनके करियर का एक और ऐतिहासिक पल 1985 में आया, जब उन्होंने लुधियाना में राजस्थान यूनिवर्सिटी के लिए खेलते हुए वेस्ट जोन जीता।

इस जीत के मायने इसलिए भी बड़े थे क्योंकि 28 साल बाद राजस्थान ने बॉम्बे यूनिवर्सिटी को हराकर यह चैंपियनशिप जीती थी।

सेना में भी जारी रहा खेल का जुनून

जब जितेन्द्र सिंह शेखावत ने सेना की वर्दी पहनी, तो उनके अंदर का खिलाड़ी वहां भी उनके साथ रहा।

इंडियन मिलिट्री अकादमी (IMA) देहरादून में अपने पहले ही साल में वे बेस्ट प्लेयर बने और टीम के कप्तान भी रहे।

सेना में रहते हुए उन्होंने सिर्फ फुटबॉल ही नहीं, बल्कि हॉकी और बास्केटबॉल में भी अपनी प्रतिभा दिखाई।

फुटबॉल से रणभूमि तक का सफर

फुटबॉल मैदान पर जूझने की जो आदत उन्हें पड़ी थी, वह सेना के करीब 36 साल के बेदाग करियर में उनके बहुत काम आई।

आतंकियों से मुठभेड़ के दौरान गोलियां लगने के बावजूद उनका जुझारूपन कम नहीं हुआ।

उनके अदम्य साहस और वीरता के लिए देश ने उन्हें शांतिकाल के तीसरे सर्वोच्च वीरता पुरस्कार 'शौर्य चक्र' और 'विशिष्ट सेवा मेडल' (VSM) से सम्मानित किया।

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