दिल्ली | पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से ठीक पहले, सरकार ने छात्रों के आंदोलन को समाप्त करने के लिए एक आखिरी प्रयास किया था। सूत्रों के अनुसार, सरकार ने उन्हें शिक्षा मंत्रालय से हटाकर किसी अन्य मंत्रालय का प्रभार देने का प्रस्ताव रखा, लेकिन यह कोशिश असफल रही।
सरकार की सुलह की कोशिश
इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार, सरकार और आंदोलनकारी छात्रों के बीच कई दौर की बातचीत हुई। सरकार की तरफ से भाजपा अध्यक्ष जे.पी. नड्डा और केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने मोर्चा संभाला।
उन्होंने छात्रों को यह समझाने का प्रयास किया कि यदि शिक्षा मंत्री बदल दिए जाते हैं और उनकी अन्य मांगें मान ली जाती हैं, तो आंदोलन समाप्त किया जा सकता है।
छात्रों ने ठुकराया प्रस्ताव
हालांकि, आंदोलन का नेतृत्व कर रही कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने इस प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया। संगठन का रुख स्पष्ट था कि केवल मंत्रालय बदलने से समस्या का समाधान नहीं होगा।
CJP की मांग थी कि धर्मेंद्र प्रधान को पूरी तरह से पद छोड़ना होगा ताकि जवाबदेही तय हो सके। उनका मानना था कि केवल विभाग बदलना एक दिखावा मात्र होगा।
दो मांगों पर बनी थी सहमति
सरकारी सूत्रों ने बताया कि सरकार उस समय तक छात्रों की दो प्रमुख मांगों पर पहले ही अपनी सहमति दे चुकी थी।
- पहली मांग आंदोलन के दौरान छात्रों के खिलाफ दर्ज की गई एफआईआर को वापस लेने की प्रक्रिया शुरू करना था।
- दूसरी मांग नीट पेपर लीक और परीक्षा रद्द होने के बाद आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को वित्तीय सहायता प्रदान करना था।
इन सहमतियों के बावजूद, छात्र संगठन अपनी मुख्य मांग पर अड़ा रहा।
बढ़ता दबाव और अंतिम फैसला
सरकार और छात्रों के बीच बातचीत का कोई सीधा रास्ता नहीं बन पाने के कारण गतिरोध बढ़ता गया। इसी बीच, देशभर में छात्रों का विरोध प्रदर्शन और तेज हो गया, जिससे सरकार पर दबाव लगातार बढ़ता गया।
आखिरकार, बढ़ते जनदबाव और कई दौर की असफल बातचीत के बाद धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उनके इस्तीफे की घोषणा के तुरंत बाद, CJP ने दिल्ली में पिछले 36 दिनों से चल रहे अपने धरने को समाप्त करने का ऐलान कर दिया। इस पूरे घटनाक्रम पर सरकार की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।
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