जयपुर |
राजस्थान में आगामी निकाय चुनाव को लेकर तैयारियां अब निर्णायक दौर में पहुंच चुकी हैं। सभी की निगाहें वार्डों और निकाय प्रमुखों के पदों के लिए होने वाली आरक्षण लॉटरी पर टिकी हैं, जिसके अगले चार से पांच दिनों में निकलने की प्रबल संभावना है।
इस प्रक्रिया के लिए संबंधित जिला कलेक्टर और स्वायत्त शासन विभाग स्तर पर तैयारियां अपने अंतिम चरण में हैं।
आरक्षण लॉटरी की प्रक्रिया
निकाय चुनाव के तहत पार्षदों के लिए वार्डों के आरक्षण की लॉटरी संबंधित जिला कलेक्टर के स्तर पर निकाली जाएगी।
वहीं, महापौर, सभापति और चेयरमैन जैसे प्रमुख पदों के लिए आरक्षण की लॉटरी स्वायत्त शासन विभाग द्वारा आयोजित की जाएगी।
दावेदारों की बढ़ी धड़कनें
आरक्षण की तस्वीर साफ होते ही चुनाव की तैयारियों में जुटे दावेदारों की सक्रियता और भी बढ़ जाएगी। फिलहाल, सभी राजनीतिक दलों और भावी प्रत्याशियों की धड़कनें अगले सप्ताह प्रस्तावित इस आरक्षण लॉटरी पर ही टिकी हुई हैं।
लंबे समय से अपने-अपने वार्डों में चुनावी तैयारी कर रहे संभावित प्रत्याशियों की नजरें लॉटरी पर हैं, क्योंकि वार्ड के सामान्य या आरक्षित होने के आधार पर कई दावेदारों के चुनावी समीकरण पूरी तरह से बदल जाएंगे।
क्या कहते हैं आंकड़े?
प्रदेश के 309 निकायों में महापौर, सभापति और चेयरमैन पदों का आरक्षण तय किया जाना है। इसके साथ ही, कुल 10,245 वार्डों में पार्षदों के लिए आरक्षण लॉटरी निकाली जाएगी।
संभागवार स्थिति
राज्य के 7 संभागों में कुल 309 नगरीय निकाय और 10,245 वार्ड प्रस्तावित हैं। इनमें 10 नगर निगम, 47 नगर परिषद और विभिन्न श्रेणियों की नगरपालिकाएं शामिल हैं।
जयपुर संभाग में सबसे अधिक 91 निकाय और 2970 वार्ड हैं, जबकि कोटा और उदयपुर संभाग में 28-28 निकाय हैं।
राजनीतिक दलों की तैयारी
एक ओर जहां दावेदार लॉटरी का इंतजार कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर प्रमुख राजनीतिक दल जैसे बीजेपी और कांग्रेस ने अपनी चुनावी तैयारियां शुरू कर दी हैं। लॉटरी के बाद दोनों ही दलों में टिकट के लिए दावेदारों की सक्रियता और तेज हो जाएगी।