राजस्थान

भाजपा आदिवासियों की दुश्मन: लोढ़ा: भाजपा आदिवासियों की नंबर 1 दुश्मन: संयम लोढ़ा

गणपत सिंह मांडोली · 09 अगस्त 2026, 03:56 दोपहर
विश्व आदिवासी दिवस पर संयम लोढ़ा ने भाजपा सरकार पर आदिवासियों के साथ अन्याय करने का आरोप लगाया, छात्रावास भूमि आवंटन रद्द करने का मुद्दा उठाया।

सिरोही/शिवगंज |

विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर आलपा में आयोजित एक कार्यक्रम में पूर्व मुख्यमंत्री सलाहकार एवं पूर्व विधायक संयम लोढ़ा ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने भाजपा को आदिवासियों का सबसे बड़ा दुश्मन करार देते हुए समाज को इससे सावधान रहने की सलाह दी है।

भाजपा आदिवासियों की नंबर एक दुश्मन: लोढ़ा

आलपा में भील समाज द्वारा आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए संयम लोढ़ा ने कहा कि भाजपा आदिवासियों की पहले नंबर की दुश्मन है। उन्होंने आदिवासी समाज से आग्रह किया कि उन्हें भाजपा से सबसे ज्यादा सावधान रहने की जरूरत है।

लोढ़ा ने अपने कार्यकाल की उपलब्धियों को याद करते हुए कहा कि उन्होंने सिरोही जिला मुख्यालय पर भील समाज छात्रावास और शिवगंज में मीणा समाज छात्रावास के लिए भूमि का आवंटन करवाया था।

छात्रावास भूमि आवंटन रद्द करने का आरोप

उन्होंने आरोप लगाया कि राजस्थान में भाजपा की सरकार बनते ही इन दोनों महत्वपूर्ण भूमि आवंटनों को निरस्त कर दिया गया। यह कदम आदिवासी समाज के हितों के खिलाफ है।

लोढ़ा ने बताया कि मीणा समाज के लोग अपने अधिकारों के प्रति सजग थे और उन्होंने इस मामले में हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाकर स्टे प्राप्त कर लिया।

हालांकि, उन्होंने दुख व्यक्त करते हुए कहा कि भील समाज के छात्रावास की भूमि के मामले में जिस तरह से कार्रवाई की गई, उसे भाजपा सरकार की क्रूरता के रूप में याद किया जाएगा।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भील समाज के बच्चों की शिक्षा और उनके भविष्य से जुड़े विषय पर भी राजनीति की जा रही है, जो कि बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।

रोवाड़ा भूमि मामले पर भी सरकार को घेरा

अपने संबोधन के दौरान संयम लोढ़ा ने रोवाड़ा गांव में भील समाज के परिवारों से जुड़े भूमि के मामले को भी प्रमुखता से उठाया।

उन्होंने कहा कि भील समाज के लोग जिस जमीन पर करीब 50 वर्षों से काबिज हैं, उस पर कथित रूप से मिलीभगत कर एक निजी व्यक्ति के नाम पर नामांतरण कर दिया गया।

लोढ़ा ने बताया कि जब भील समाज के लोग इस मामले को लेकर उनके पास आए, तो उन्होंने संबंधित तहसीलदार से इस विषय में बातचीत की।

उनके अनुसार, तहसीलदार ने भी यह स्वीकार किया था कि इस मामले में गलत हुआ है, जो कि व्यवस्था में खामियों को उजागर करता है।

अधिकारों के प्रति संगठित रहने की अपील

लोढ़ा ने कहा कि भील समाज के लोगों के साथ हो रहे इस तरह के अत्याचार और अन्याय को गंभीरता से समझने की आवश्यकता है।

उन्होंने समाज से अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होकर संगठित रहने का आह्वान किया, ताकि भविष्य में कोई भी उनके अधिकारों का हनन न कर सके।

शिक्षा की कमी पर जताई चिंता

संयम लोढ़ा ने भील समाज में शिक्षा की वर्तमान स्थिति पर भी गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से जिले के विभिन्न स्थानों पर आदिवासी समाज की बालिकाओं के लिए छात्रावास और अध्ययन की सुविधाएं उपलब्ध हैं।

इन छात्रावासों में बच्चियां सरकारी खर्चे पर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त कर सकती हैं, लेकिन जागरूकता की कमी एक बड़ी बाधा है।

उन्होंने बताया कि सिरोही, शिवगंज और कोलर में भील समाज की बच्चियों के लिए उपलब्ध सुविधाओं का पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है।

लोढ़ा ने चिंता जताते हुए कहा कि समाज में जागरूकता की कमी के कारण इन तीनों महत्वपूर्ण स्थानों पर भील समाज की एक भी बच्ची अध्ययन नहीं कर रही है।

बेटियों की शिक्षा को प्राथमिकता देने का आह्वान

उन्होंने समाज के लोगों से आह्वान किया कि वे अपने बच्चों, विशेषकर बेटियों की शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दें।

लोढ़ा ने कहा कि शिक्षा ही वह एकमात्र माध्यम है जिसके जरिए समाज अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हो सकता है और साथ ही सामाजिक और आर्थिक रूप से मजबूत बन सकता है।

आदिवासी समाज के गौरवशाली इतिहास को किया याद

पूर्व मुख्यमंत्री सलाहकार ने अपने संबोधन में आदिवासी समाज के गौरवशाली इतिहास और भारतीय संस्कृति में उनके योगदान का भी उल्लेख किया।

उन्होंने सबरी माता और वीर राणा पूंजा के उदाहरण देते हुए कहा कि भारतीय इतिहास में आदिवासी समाज का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण और अविस्मरणीय रहा है।

युवाओं को आधुनिक शिक्षा से जुड़ने की सलाह

उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज ने देश और समाज के लिए हमेशा एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

लोढ़ा ने समाज के युवाओं को अपने इतिहास, महापुरुषों और गौरवशाली परंपराओं को जानने के साथ-साथ आधुनिक शिक्षा से भी जुड़ने की सलाह दी।

उन्होंने अंत में कहा कि समाज को अपने अधिकारों के लिए जागरूक, संगठित और संघर्षशील रहना होगा। उन्होंने आदिवासी समाज से अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा दिलाने तथा सामाजिक कुरीतियों को दूर कर आगे बढ़ने का आह्वान किया।

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