ढाका | भारत और बांग्लादेश के बीच दशकों पुरानी गंगा जल संधि की समय सीमा समाप्त होने वाली है। इससे पहले बांग्लादेश की राजधानी ढाका में जबरदस्त राजनीतिक हलचल शुरू हो गई है।
गंगा जल संधि पर ढाका में उबाल: गंगा जल संधि: भारत के साथ रिश्तों पर BNP की बड़ी चेतावनी
गंगा जल संधि खत्म होने से पहले बांग्लादेश में सियासी भूचाल, BNP ने भारत को दी चेतावनी।
HIGHLIGHTS
- गंगा जल संधि की 30 साल की अवधि जल्द ही समाप्त होने वाली है।
- बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) ने भारत के साथ भविष्य के रिश्तों को जल समझौते से जोड़ा।
- विपक्ष ने 'तीस्ता मास्टर प्लान' को लेकर सरकार और भारत पर निशाना साधा।
- बांग्लादेश का आरोप है कि भारत ने साझा नदियों पर बांध बनाकर प्राकृतिक प्रवाह रोका है।
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बांग्लादेश की सत्ताधारी पार्टी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) ने स्पष्ट कर दिया है कि भारत के साथ भविष्य के द्विपक्षीय संबंध पूरी तरह से जल-बंटवारा समझौते पर निर्भर करेंगे।
गंगा जल संधि और BNP का कड़ा रुख
बीएनपी के महासचिव मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर ने कहा कि इस बार कोई भी कामचलाऊ या कम समय की डील स्वीकार नहीं की जाएगी। पार्टी ने एक स्थायी और अनिश्चितकालीन संधि की मांग की है।
ऐतिहासिक फरक्का दिवस के अवसर पर आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक में आलमगीर ने अपनी रणनीति साझा की। उन्होंने कहा कि यह संधि तब तक प्रभावी रहनी चाहिए जब तक भविष्य का कोई ठोस समाधान न मिले।
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पार्टी का मानना है कि जल सुरक्षा बांग्लादेश की संप्रभुता का हिस्सा है। इसलिए, किसी भी समझौते में देश के हितों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
भारत की जल-नीति पर तीखे सवाल
बीएनपी के थिंक-टैंक माने जाने वाले आलमगीर ने भारत की जल-नीति पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि भारत ने अंतरराष्ट्रीय कानूनों को दरकिनार कर दिया है।
उनका दावा है कि भारत ने 54 साझा नदियों पर बांधों का जाल बिछाकर प्राकृतिक प्रवाह को बाधित किया है। इससे बांग्लादेश में नदियों का जलस्तर तेजी से गिर रहा है और कृषि संकट गहरा रहा है।
आलमगीर ने चेतावनी दी कि भारत द्वारा अपने हित में पानी मोड़ने के कारण बांग्लादेश तेजी से बंजर होने की ओर बढ़ रहा है। यह एक गंभीर पर्यावरणीय और अस्तित्वगत संकट है।
"यह संधि अनिश्चित काल के लिए होनी चाहिए और तब तक प्रभावी रहनी चाहिए जब तक कि इसकी जगह कोई भविष्य का समझौता न आ जाए।" - मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर
तीस्ता मास्टर प्लान और विपक्ष का अल्टीमेटम
एक तरफ गंगा जल पर विवाद है, तो दूसरी तरफ तीस्ता नदी को लेकर भी घमासान मचा है। विपक्ष के नेता शफीकुर रहमान ने 'तीस्ता मास्टर प्लान' पर मोर्चा खोला है।
रंगपुर में एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि 'तीस्ता बचाओ' जैसे नारों से अब जनता को बहलाया नहीं जा सकता। लोगों को अब ठोस कार्रवाई चाहिए।
रहमान ने याद दिलाया कि तीस्ता मास्टर प्लान का लटकना उत्तरी बांग्लादेश के लगभग ढाई करोड़ लोगों के लिए घातक है। उनकी खेती, मछली पालन और दैनिक आजीविका सीधे तौर पर प्रभावित हो रही है।
क्या है मुख्य विवाद की जड़?
भारत और बांग्लादेश के बीच 12 दिसंबर 1996 को 30 वर्षों के लिए गंगा जल संधि हुई थी। बांग्लादेश का आरोप है कि फरक्का बांध से उसका पानी रोका गया है।
1996 की संधि को दोनों देशों के बीच सहयोग का एक मील का पत्थर माना गया था। तत्कालीन प्रधानमंत्रियों ने इसे दक्षिण एशिया में जल कूटनीति की एक नई शुरुआत के रूप में देखा था।
दोनों देश 54 नदियां साझा करते हैं। इन मुद्दों को सुलझाने के लिए 'संयुक्त नदी आयोग' (JRC) बनाया गया था, लेकिन इसकी बैठकें और नतीजे अब तक बेअसर रहे हैं।
हैरानी की बात यह है कि संधि की समय सीमा नजदीक है, फिर भी जेआरसी के मंच पर कोई ठोस बातचीत शुरू नहीं हो सकी है। इससे तनाव और बढ़ गया है।
भारत और बांग्लादेश के बीच जल विवाद अब केवल तकनीकी मुद्दा नहीं है। यह ढाका की घरेलू राजनीति का केंद्र बन चुका है, जो भविष्य के कूटनीतिक रिश्तों को तय करेगा।
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