लाइफ स्टाइल

भारत की आबादी की रफ्तार थमी: भारत में प्रजनन दर घटकर 1.9 हुई: क्या अब घटने लगेगी आबादी?

thinQ360 · 26 मई 2026, 09:18 सुबह
देश में प्रजनन दर रिप्लेसमेंट लेवल 2.1 से नीचे आई, दिल्ली में सबसे कम तो बिहार में सबसे ज्यादा।

नई दिल्ली | भारत की आबादी की रफ्तार अब धीमी पड़ने लगी है। सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (SRS-2024) की ताज़ा रिपोर्ट ने पूरे देश का ध्यान खींचा है। रिपोर्ट बताती है कि देश की प्रजनन दर अब 1.9 रह गई है। यह आंकड़ा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह 'रिप्लेसमेंट लेवल' यानी 2.1 से नीचे चला गया है। इसका सीधा मतलब है कि आने वाले समय में आबादी का संतुलन बदल सकता है और जनसंख्या वृद्धि धीमी हो सकती है।

क्या है रिप्लेसमेंट लेवल और इसके मायने?

विशेषज्ञों के अनुसार, रिप्लेसमेंट लेवल 2.1 वह स्तर होता है जहाँ एक पीढ़ी अपनी अगली पीढ़ी को संख्या के हिसाब से पूरी तरह रिप्लेस कर देती है। इससे आबादी स्थिर बनी रहती है। जब यह दर 2.1 से नीचे गिरती है, तो इसका मतलब है कि भविष्य में आबादी घटने लगेगी। भारत में अब यह स्तर 1.9 पर पहुंच गया है, जो एक बड़े सामाजिक बदलाव का संकेत है। अगर लंबे समय तक प्रजनन दर इसी तरह कम बनी रहती है, तो युवाओं की संख्या कम होने लगेगी। इससे देश की अर्थव्यवस्था और भविष्य के सामाजिक ढांचे पर गहरा असर पड़ सकता है।

राज्यों की स्थिति: कहीं गिरावट, कहीं अब भी तेजी

देश के औसत आंकड़े भले ही कम हों, लेकिन राज्यों की स्थिति अलग-अलग है। राजस्थान समेत छह राज्य अब भी रिप्लेसमेंट लेवल से ऊपर बने हुए हैं और वहां वृद्धि जारी है। इन राज्यों में बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और झारखंड शामिल हैं। बिहार में प्रजनन दर सबसे अधिक 3.0 दर्ज की गई है, जो राष्ट्रीय औसत से काफी ज्यादा है। वहीं दूसरी ओर, देश की राजधानी दिल्ली में सबसे कम टीएफआर (TFR) 1.2 दर्ज की गई है। तमिलनाडु जैसे दक्षिणी राज्यों में भी यह दर काफी कम (1.3) बनी हुई है।

राजस्थान: गांवों और शहरों की अलग कहानी

राजस्थान में ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच एक बड़ा अंतर देखने को मिल रहा है। राज्य के ग्रामीण इलाकों में प्रजनन दर 2.4 है, जो रिप्लेसमेंट लेवल से काफी अधिक है। इसके विपरीत, राजस्थान के शहरों में यह दर 2.1 है। यानी शहरों में आबादी का संतुलन बना हुआ है, जबकि गांवों में अभी भी जनसंख्या वृद्धि की गति शहरों के मुकाबले तेज है। मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में भी यही पैटर्न देखा गया है। शहरों में लोग छोटे परिवार को प्राथमिकता दे रहे हैं, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में प्रजनन दर अभी भी ऊंची है।

कामकाजी आबादी और बढ़ता बुढ़ापा

भारत के लिए एक अच्छी खबर यह है कि हमारी कामकाजी आबादी (15 से 59 वर्ष) अभी बढ़ रही है। 2014 में यह 64% थी, जो अब बढ़कर 66.4% हो गई है। इसे 'डेमोग्राफिक डिविडेंड' कहा जाता है। इसका मतलब है कि देश के पास अभी काम करने वाले युवाओं की कमी नहीं है, जो आर्थिक विकास की गति को बढ़ा सकते हैं। हालांकि, सिक्के का दूसरा पहलू यह है कि बुजुर्गों की आबादी भी बढ़ रही है। 60 साल से अधिक उम्र के लोगों की हिस्सेदारी 8.6% से बढ़कर 9.7% हो गई है। केरल में बुजुर्गों की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा 15% है। तमिलनाडु में बुजुर्ग आबादी में सबसे तेज बढ़ोतरी देखी गई है, जो भविष्य की स्वास्थ्य देखभाल चुनौतियों की ओर इशारा करती है।

युवाओं की बदलती सोच और चुनौतियां

प्रजनन दर में आ रही इस गिरावट के पीछे युवाओं की बदलती जीवनशैली और सोच एक बड़ा कारण है। आज के युवा करियर और व्यक्तिगत स्वतंत्रता को अधिक प्राथमिकता दे रहे हैं। एसएमएस मेडिकल कॉलेज की डॉ. अनीता शर्मा कहती हैं कि अब शादी और प्रेग्नेंसी दोनों में देरी हो रही है। कई कपल अब केवल एक ही बच्चा चाहते हैं।

"टीएफआर घटने के पीछे युवाओं की सोच में बदलाव बड़ा कारण है। अब शादी और प्रेग्नेंसी दोनों में देरी हो रही है। कई युवा एक ही बच्चा चाहते हैं। इसके अलावा प्रजनन क्षमता में कमी और लाइफस्टाइल भी बड़े कारक हैं।" - डॉ. अनीता शर्मा

इसके अलावा, बढ़ता प्रदूषण और तनाव भी फर्टिलिटी पर बुरा असर डाल रहे हैं। खान-पान की गलत आदतें और शारीरिक सक्रियता की कमी के कारण प्रजनन संबंधी समस्याएं काफी बढ़ रही हैं।

भविष्य की चुनौतियां और समाधान

रिपोर्ट के संकेत साफ हैं कि जिन राज्यों में प्रजनन दर पहले ही गिर चुकी थी, वहां अब बच्चों की आबादी कम हो रही है। यह स्कूलों और बाल स्वास्थ्य सेवाओं को प्रभावित करेगा। सरकार को अब बुजुर्गों की देखभाल और गिरती प्रजनन दर के सामाजिक प्रभावों पर ध्यान देना होगा। संतुलित विकास के लिए ग्रामीण और शहरी अंतर को पाटना भी अब जरूरी है। अंततः, यह रिपोर्ट हमें आगाह करती है कि हम एक ऐसे दौर में प्रवेश कर रहे हैं जहाँ आबादी का प्रबंधन और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए।

*Edit with Google AI Studio

← पूरा आर्टिकल पढ़ें (Full Version)