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फ्लेक्स फ्यूल पर सरकार का बड़ा दांव: अब पेट्रोल की जगह E85 फ्लेक्स फ्यूल पर चलेंगी गाड़ियां !

बलजीत सिंह शेखावत · 20 अप्रैल 2026, 05:44 शाम
वैश्विक तेल संकट और होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव को देखते हुए भारत सरकार ने फ्लेक्स फ्यूल वाहनों (FFV) को बढ़ावा देने का फैसला किया है। इसके लिए एक विस्तृत रोडमैप तैयार किया जा रहा है।

नई दिल्ली | होर्मुज जलडमरूमध्य में जारी तनाव और कच्चे तेल की आसमान छूती कीमतों ने भारत सरकार को ईंधन सुरक्षा पर नए सिरे से सोचने को मजबूर कर दिया है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अधिकारियों ने सोमवार को एक उच्च स्तरीय बैठक बुलाई है। इस बैठक का मुख्य एजेंडा देश भर में फ्लेक्स फ्यूल वाहनों (FFV) को बढ़ावा देने का रोडमैप तैयार करना है।

ईंधन का नया विकल्प: E85

फ्लेक्स फ्यूल वाहन ऐसी गाड़ियां होती हैं, जो E85 ईंधन पर चल सकती हैं। इसमें 85% एथेनॉल और 15% पेट्रोल का मिश्रण होता है, जो पर्यावरण के अनुकूल है। वर्तमान में भारत में 20% एथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य रखा गया है। लेकिन वैश्विक अस्थिरता को देखते हुए सरकार अब तेजी से फ्लेक्स फ्यूल की ओर कदम बढ़ाना चाहती है।

होर्मुज संकट और तेल की कीमतें

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण कच्चा तेल 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया था। होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों पर गोलीबारी की खबरों ने भारत की चिंता बढ़ा दी है। दुनिया का एक बड़ा हिस्सा इसी समुद्री रास्ते से तेल आयात करता है। भारत के लिए यह मार्ग बंद होने का मतलब है बड़ी आर्थिक क्षति, इसलिए तेल आयात पर निर्भरता कम करना अब मजबूरी बन गई है।

चुनौतियां और नई तकनीक

हालांकि, 85% एथेनॉल की राह इतनी आसान नहीं है। इसके लिए इंजन की तकनीक में बड़े बदलाव करने होंगे और पेट्रोल पंपों पर नई मशीनों का इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करना होगा। वर्किंग ग्रुप ने इन तकनीकी चुनौतियों पर एक रिपोर्ट तैयार की है। इसमें ऑटोमोबाइल कंपनियों (SIAM) और सरकारी तेल कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारियों के सुझावों को शामिल किया गया है।

किसानों और अर्थव्यवस्था को लाभ

भारत में गन्ना और मक्का का प्रचुर उत्पादन होता है। फ्लेक्स फ्यूल के आने से किसानों को उनकी फसल का बेहतर बाजार मिलेगा और उनकी आय में भारी वृद्धि होगी। ट्रांसपोर्ट सेक्टर में एथेनॉल की हिस्सेदारी बढ़ने से न केवल विदेशी मुद्रा की बचत होगी, बल्कि कार्बन उत्सर्जन में भी भारी कमी आएगी। सरकार का यह कदम आत्मनिर्भर भारत की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।

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