नई दिल्ली | विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने गुरुवार को कहा कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौता अब अपने अंतिम चरण में है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह समझौता जल्द ही औपचारिक रूप से पूरा हो जाएगा।
जयशंकर के अनुसार अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो और भारत के वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने भी इस समझौते के अंतिम दौर में होने के संकेत दिए हैं।
अंतिम चरण में बातचीत और चुनौतियां
नई दिल्ली में NDTV वर्ल्ड समिट के एक सत्र को संबोधित करते हुए विदेश मंत्री ने सावधानी बरतने की सलाह दी।
"जब तक कोई काम पूरी तरह से पूरा न हो जाए, तब तक उसे पूरा नहीं माना जा सकता।"
जयशंकर ने कहा कि अक्सर अंतिम चरणों में कुछ चुनौतियां सामने आती हैं। दोनों देशों की बातचीत करने वाली टीमें इन चुनौतियों को सुलझाने पर निरंतर काम कर रही हैं।
चुनौतियों के खुलासे पर रुख
विदेश मंत्री ने वार्ता की विशिष्ट चुनौतियों पर सार्वजनिक चर्चा करने से मना कर दिया।
"अगर आप मुझसे पूछें कि वे चुनौतियां क्या हैं, तो माफ कीजिए, मैं उनके बारे में नहीं बताऊंगा। यह काम बातचीत करने वालों का है कि वे इन्हें सुलझाएं।"
द्विपक्षीय बातचीत और तनाव की पृष्ठभूमि
जयशंकर ने इस सप्ताह अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के साथ व्यापक बातचीत की थी।
रुबियो पांच महीने से भी कम समय में दूसरी बार भारत आए और उन्होंने मुंबई का दौरा किया।
यह बैठक ऐसे समय में हुई जब वाशिंगटन के व्यापार कदमों और सख्त आव्रजन नियमों के कारण द्विपक्षीय संबंधों में कुछ तनाव देखा जा रहा है।
इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भी कहा है कि दोनों देशों का यह समझौता काफी करीब है।
मार्को रुबियो का बयान और जामनगर दौरा
मुंबई में बैठक से पहले रुबियो ने मीडिया से कहा कि दोनों देश एक औपचारिक समझौते के बहुत करीब हैं।
रुबियो ने कहा कि कुछ छोटी-मोटी चीजें बाकी हैं और उम्मीद है कि जल्द ही अच्छी खबर सामने आएगी, जिसके बाद नेता इस पर हस्ताक्षर कर सकेंगे।
रिफाइनिंग क्षमता और ऊर्जा सहयोग
अमेरिकी विदेश मंत्री ने भारत को पेट्रोलियम रिफाइनिंग के क्षेत्र में एक महाशक्ति करार दिया।
उन्होंने सुझाव दिया कि वेनेजुएला से आने वाले कच्चे तेल की प्रोसेसिंग भारत में और बढ़ाई जानी चाहिए।
अमेरिकी विदेश मंत्री ने बुधवार को रिलायंस इंडस्ट्रीज द्वारा संचालित जामनगर रिफाइनरी का भी दौरा किया था।
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