वाशिंगटन | अमेरिका के स्टार्टअप इकोसिस्टम में भारतीय मूल के उद्यमियों ने एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। नेशनल फाउंडेशन फॉर अमेरिकन पॉलिसी (NFAP) की एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका की 96 यूनिकॉर्न कंपनियों के संस्थापक भारतीय हैं। यह संख्या किसी भी अन्य देश के प्रवासियों से कहीं ज्यादा है।
भारतीय टैलेंट का दुनिया में डंका
यूनिकॉर्न उन निजी स्टार्टअप कंपनियों को कहा जाता है जिनकी वैल्यूएशन 1 अरब डॉलर या उससे अधिक होती है। रिपोर्ट में यह बात सामने आई है कि भारतीय उद्यमियों ने इस मामले में बाकी सभी देशों को काफी पीछे छोड़ दिया है।
यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि यह ऐसे समय में आई है जब अमेरिका में इमिग्रेशन के नियम पहले से ज्यादा सख्त हो गए हैं। इससे भविष्य में टैलेंट के प्रवाह को लेकर चिंताएं भी जताई जा रही हैं।
आंकड़ों के अनुसार, भारत के बाद दूसरे स्थान पर इजरायल है, जिसके उद्यमियों ने 60 यूनिकॉर्न कंपनियां बनाई हैं। इसके बाद ब्रिटेन (47), चीन (41) और कनाडा (30) का नंबर आता है।
रिपोर्ट बताती है कि अमेरिका में रहने वाले करीब 50 लाख भारतीय प्रवासियों में से हर 50 हजार लोगों पर एक ऐसा व्यक्ति है, जिसने 1 अरब डॉलर से ज्यादा मूल्य वाली कंपनी बनाई है।
लिस्ट में जय चौधरी टॉप पर
इस लिस्ट में सबसे ऊपर साइबर सिक्योरिटी कंपनी Zscaler के संस्थापक जय चौधरी हैं। हिमाचल प्रदेश के एक छोटे से गांव से निकलकर उन्होंने यह मुकाम हासिल किया है। उनकी नेटवर्थ करीब 13.1 अरब डॉलर आंकी गई है।
जय चौधरी की सफलता की कहानी दुनिया भर के उद्यमियों के लिए एक प्रेरणा है। उन्होंने साबित किया है कि सही विजन और कड़ी मेहनत से कुछ भी हासिल किया जा सकता है।
अन्य प्रमुख नाम भी शामिल
सूची में सन माइक्रोसिस्टम्स के सह-संस्थापक विनोद खोसला का भी नाम है, जिन्होंने बाद में खोसला वेंचर्स के जरिए सिलिकॉन वैली में निवेश की दुनिया को नई दिशा दी।
इनके अलावा इंडिगो एयरलाइन के सह-संस्थापक राकेश गंगवाल, सिम्फनी टेक्नोलॉजी ग्रुप के संस्थापक रोमेश वाधवानी और वर्कडे के सह-संस्थापक अनील भुसरी जैसे बड़े नाम भी इस प्रतिष्ठित सूची का हिस्सा हैं।
यह रिपोर्ट न केवल भारतीय प्रतिभा की वैश्विक सफलता को दर्शाती है, बल्कि यह भी साबित करती है कि भारतीय उद्यमी दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था में इनोवेशन और विकास के प्रमुख वाहक बन गए हैं।
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