मुंबई | कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और मध्य पूर्व से आई सकारात्मक खबरों ने भारतीय शेयर बाजार में नई जान फूंक दी है। निवेशकों के बढ़ते भरोसे के चलते बाजार लगातार पांचवें दिन हरे निशान में कारोबार कर रहा है, जिससे सेंसेक्स और निफ्टी नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ रहे हैं।
कच्चे तेल में गिरावट से मिली राहत
बाजार की इस शानदार तेजी के पीछे सबसे बड़ा कारण कच्चे तेल की कीमतों में आई तेज गिरावट है। भारत अपनी तेल जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए तेल की कीमतों का सीधा असर अर्थव्यवस्था पर पड़ता है।
युद्ध के दौरान ब्रेंट क्रूड का भाव 120 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया था, जो अब घटकर 75 डॉलर प्रति बैरल के आसपास आ गया है।
तेल सस्ता होने से देश का आयात बिल कम होता है, जिससे महंगाई पर काबू पाने में मदद मिलती है। साथ ही, इससे सरकार और कंपनियों की लागत भी घटती है, जो विकास के लिए एक सकारात्मक संकेत है।
मध्य पूर्व में शांति की उम्मीद
तेल की कीमतों में इस गिरावट की मुख्य वजह अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध खत्म करने को लेकर बनी सहमति है। इस प्रारंभिक शांति समझौते से मध्य पूर्व में तनाव कम होने की उम्मीद जगी है।
माना जा रहा है कि शुक्रवार को अंतिम समझौते पर आधिकारिक रूप से हस्ताक्षर हो सकते हैं। अगर ऐसा होता है, तो होर्मुज स्ट्रेट के फिर से खुलने और ईरानी तेल के वैश्विक बाजार में आने की संभावना बढ़ जाएगी।
कॉर्पोरेट मुनाफे की मजबूत तस्वीर
दिलचस्प बात यह है कि भू-राजनीतिक तनाव और महंगे तेल के बावजूद भारतीय कंपनियों का प्रदर्शन मजबूत रहा है। वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही में निफ्टी-50 कंपनियों के मुनाफे में सालाना आधार पर लगभग 4% की वृद्धि दर्ज की गई।
एमके ग्लोबल का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2026-27 में निफ्टी कंपनियों की प्रति शेयर आय (EPS) में करीब 16 फीसदी की वृद्धि हो सकती है।
अगर यह अनुमान सही साबित होता है, तो यह पिछले तीन वर्षों में कमाई के लिहाज से सबसे मजबूत साल हो सकता है।
कुल मिलाकर, वैश्विक शांति की उम्मीद और घरेलू स्तर पर कंपनियों के मजबूत प्रदर्शन ने बाजार के लिए एक सकारात्मक माहौल तैयार किया है। इससे निवेशकों का भरोसा बढ़ा है और आने वाले समय में बाजार में और तेजी देखने को मिल सकती है।
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