भारत

भारत का कच्चा तेल आयात बिल 48% बढ़ा, जानें नए दाम

जोगेन्द्र सिंह शेखावत · 21 जुलाई 2026, 10:30 दोपहर
कम खरीद के बावजूद भारत का कच्चा तेल आयात बिल जून में 48% बढ़कर 14.7 अरब डॉलर हो गया। जानें पेट्रोल-डीजल के स्थिर दामों की वजह।

भारत के तेल आयात बिल में भारी उछाल

नई दिल्ली | अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव का असर वैश्विक तेल बाजार पर साफ दिख रहा है, जिससे भारत का कच्चे तेल का आयात बिल भी प्रभावित हुआ है। जून 2026 में देश का कच्चे तेल का आयात बिल सालाना आधार पर 48% बढ़कर 14.7 अरब डॉलर पर पहुंच गया। यह वृद्धि तब हुई है जब भारत ने पिछले साल की तुलना में कम मात्रा में कच्चा तेल खरीदा।

वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें

तेल की कीमतों में यह आग अमेरिका और ईरान के बीच फिर से शुरू हुए सैन्य संघर्ष के कारण लगी है। सोमवार को ब्रेंट क्रूड 91 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को छू गया था।

हालांकि, मंगलवार को इसमें मामूली गिरावट देखी गई और यह 0.4% गिरकर 88.87 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। वहीं, WTI क्रूड 82.47 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था। इसके बावजूद, दोनों प्रमुख बेंचमार्क अपने एक महीने के उच्चतम स्तर के करीब बने हुए हैं।

आयात कम, फिर भी खर्च ज्यादा क्यों?

पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल (PPAC) द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, इस वृद्धि के पीछे की मुख्य वजह कच्चे तेल की औसत कीमत का बढ़ना है।

जून में, भारत ने 1.89 करोड़ टन कच्चे तेल का आयात किया, जो पिछले साल इसी महीने के 2.03 करोड़ टन के मुकाबले 7.1% कम है।

इसके बावजूद आयात बिल 48% बढ़ गया, क्योंकि जून 2026 में भारतीय बास्केट कच्चे तेल की औसत कीमत 85.47 डॉलर प्रति बैरल रही, जबकि जून 2025 में यह 69.77 डॉलर प्रति बैरल थी।

आयात आंकड़ों की तुलना

पैरामीटर - जून 2026 - जून 2025 - सालाना बदलाव

पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर असर

कच्चे तेल के आयात बिल में भारी वृद्धि के बावजूद, देश में पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। कीमतें फिलहाल स्थिर बनी हुई हैं। आखिरी बार ईंधन की कीमतों में 25 मई को बदलाव किया गया था।

प्रमुख शहरों में 21 जुलाई के दाम

शहर - पेट्रोल (₹/लीटर) - डीजल (₹/लीटर)

भारत के प्रमुख तेल आपूर्तिकर्ता

मिडिल ईस्ट से आपूर्ति में संभावित बाधाओं के बीच, भारत ने अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का लगभग 50% हिस्सा रूस से पूरा किया।

इसके अलावा, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और वेनेजुएला भी भारत के लिए प्रमुख आपूर्तिकर्ता बने रहे। ईंधन की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए भारत ने ब्राजील और अंगोला जैसे गैर-पारंपरिक आपूर्तिकर्ताओं से भी खरीद बढ़ाई है।

← पूरा आर्टिकल पढ़ें (Full Version)