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रमा देवी: आत्मनिर्भरता की मिसाल
स्थान: बगरू, जयपुर | कार्यक्रम: महिला कौशल विकास
जयपुर के पास बगरू गाँव की रहने वाली रमा देवी के लिए जीवन कभी आसान नहीं था। परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर थी। प्रजना फाउंडेशन के 'सिलाई और हस्तशिल्प प्रशिक्षण' शिविर से जुड़ने के बाद, उन्होंने ब्लॉक प्रिंटिंग का काम सीखा।
आज रमा देवी 10 अन्य महिलाओं के एक स्वयं सहायता समूह का नेतृत्व करती हैं और उनके बनाए उत्पाद स्थानीय बाजारों में बेचे जाते हैं। उनकी मासिक आय में 300% की वृद्धि हुई है, जिससे उनके बच्चे अब एक अच्छे स्कूल में शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं।
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कंप्यूटर ने बदली दुनिया
स्थान: झालाना बस्ती, जयपुर | कार्यक्रम: बाल शिक्षा
झालाना बस्ती के एक सरकारी स्कूल में पढ़ने वाले 14 वर्षीय विकास ने कभी कंप्यूटर नहीं देखा था। प्रजना फाउंडेशन द्वारा स्कूल में स्थापित 'डिजिटल लैब' ने उसके लिए नई संभावनाओं के द्वार खोल दिए।
फाउंडेशन के स्वयंसेवकों से कोडिंग की बुनियादी बातें सीखने के बाद, विकास ने हाल ही में जिला स्तर की विज्ञान प्रदर्शनी में एक छोटा सा शैक्षिक ऐप बनाकर प्रथम पुरस्कार जीता है।
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स्वच्छता से स्वास्थ्य तक
स्थान: सांगानेर ग्रामीण | कार्यक्रम: स्वास्थ्य जागरूकता
ग्रामीण क्षेत्रों में मासिक धर्म को लेकर कई भ्रांतियां और संकोच था, जिसके कारण किशोरियों को गंभीर संक्रमण का सामना करना पड़ता था। प्रजना फाउंडेशन द्वारा चलाए गए 'चुप्पी तोड़ो' अभियान ने सांगानेर के 15 गांवों में जागरूकता फैलाई।
अब वहां की महिलाएं न केवल सैनिटरी पैड का उपयोग कर रही हैं, बल्कि पर्यावरण के अनुकूल पैड बनाने की छोटी इकाइयां भी स्थापित कर रही हैं। क्षेत्र में संबंधित संक्रमण के मामलों में 60% की कमी दर्ज की गई है।