बीकानेर | अंतरराष्ट्रीय नशा निषेध दिवस के अवसर पर पीबीएम अस्पताल के मानसिक रोग एवं नशा मुक्ति विभाग में एक महत्वपूर्ण जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य समाज को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति सचेत करना था।
युवाओं को नशे से बचाने की अपील
कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने युवाओं पर विशेष ध्यान केंद्रित किया। डॉ. हरफूल सिंह ने कहा कि स्कूल, कॉलेज और कोचिंग में पढ़ने वाले युवा आसानी से नशे के जाल में फंस सकते हैं।
उन्होंने अभिभावकों से आग्रह किया कि वे अपने बच्चों के व्यवहार, उनकी संगति और दिनचर्या पर कड़ी नजर रखें। उन्होंने कहा कि शुरुआत से ही बच्चों को नशे से दूर रखना बेहद जरूरी है।
नशा: समाज के लिए एक गंभीर चुनौती
डॉ. श्रीगोपाल गोयल ने नशे को समाज के लिए एक गंभीर चुनौती बताया। उन्होंने कहा कि एक बार लत लग जाने पर व्यक्ति के लिए इससे बाहर निकलना बहुत मुश्किल हो जाता है।
"नशे की लत व्यक्ति के सामाजिक, पारिवारिक और मानसिक स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डालती है।"
उन्होंने सभी से एक नशामुक्त समाज के निर्माण में सक्रिय रूप से भाग लेने की अपील की। इस वर्ष की थीम 'वैश्विक नशीली दवाओं की समस्या: पुरानी समस्याएं, नई चुनौतियां और अभिनव उपाय' थी।
नशा मुक्ति की शपथ
कार्यक्रम के अंत में 'नशा मुक्त भारत अभियान' के तहत एक शपथ ग्रहण समारोह भी हुआ। इसमें उपस्थित सभी चिकित्सकों, नर्सिंग अधिकारियों, स्टाफ, मरीजों और उनके परिजनों ने नशा न करने की शपथ ली।
इस पहल का उद्देश्य समाज में नशे के खिलाफ एक मजबूत संदेश देना और लोगों को स्वस्थ जीवन शैली अपनाने के लिए प्रेरित करना था। कार्यक्रम में जिला मानसिक स्वास्थ्य इकाई के सदस्य भी मौजूद रहे।
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