मुंबई | शेयर बाजार में जारी भारी उठापटक और आईपीओ की सुस्त लिस्टिंग ने छोटे निवेशकों के भरोसे को बड़ा झटका दिया है। अब रिटेल निवेशक आईपीओ से दूरी बना रहे हैं। वर्ष 2026 की पहली तिमाही के आंकड़े चौंकाने वाले हैं। मेनबोर्ड में आए 18 में से 10 आईपीओ ऐसे रहे, जिनमें रिटेल कैटेगरी पूरी तरह सब्सक्राइब नहीं हो पाई।
रिटेल निवेशकों की बेरुखी
क्लीन मैक्स एनवायरो के आईपीओ में रिटेल हिस्सा सिर्फ 0.06 गुणा ही भरा गया। इसी तरह साई पैरेंटेरल्स और पॉवरिका का आईपीओ भी बेहद कम सब्सक्राइब हुआ। यह स्थिति 2024-25 के मुकाबले बिल्कुल उलट है। उस समय निवेशकों में शेयर खरीदने की होड़ मची रहती थी, लेकिन अब वे हर इश्यू को परख रहे हैं।
खराब लिस्टिंग का असर
आंकड़ों के अनुसार, 31 मार्च तक हुई 18 लिस्टिंग में से 12 शेयर अपने इश्यू प्राइस से नीचे खुले। इनमें से 9 शेयर अब भी घाटे में ट्रेड कर रहे हैं। सिर्फ 4 आईपीओ ही ऐसे रहे जिन्होंने निवेशकों को डबल डिजिट में रिटर्न दिया है। इस साल रिटेल सब्सक्रिप्शन में 65% से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई है।
ज्वैलरी कंपनियों ने टाले आईपीओ
बाजार की अस्थिरता को देखते हुए 3,840 करोड़ रुपये जुटाने की तैयारी कर रहीं 5 ज्वैलरी कंपनियों ने अपने प्लान फिलहाल टाल दिए हैं। इनमें ललिता ज्वैलर्स, ऑगमोंट एंटरप्राइजेज और सुनील गोल्ड जैसी कंपनियां शामिल हैं। इन कंपनियों को सेबी से मंजूरी मिल चुकी थी, फिर भी कदम पीछे खींच लिए।
वैल्यूएशन और भविष्य की राह
विशेषज्ञों का मानना है कि प्रमोटरों की ऊंची वैल्यूएशन उम्मीदें और निवेशकों की सतर्कता के बीच अंतर देरी की बड़ी वजह बना है। जब तक सेकेंडरी बाजार स्थिर नहीं होता और विदेशी निवेश वापस नहीं आता, तब तक आईपीओ बाजार में सुस्ती बनी रहने की संभावना है। निवेशक अब जोखिम लेने से कतरा रहे हैं। खासकर उन कंपनियों में जहां वैल्यूएशन असल कमाई के मुकाबले बहुत ज्यादा है। कंपनियों को अब आक्रामक प्राइसिंग से बचना होगा। अगर कंपनियों के फंडामेंटल मजबूत नहीं हुए, तो आने वाले समय में भी निवेशक नए इश्यू से दूरी बनाए रख सकते हैं। बाजार में सुधार का इंतजार अब सभी को है।