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ईरान: होर्मुज स्ट्रेट बंद: ईरान ने भारत को लेकर दिया बड़ा बयान

बलजीत सिंह शेखावत · 12 मई 2026, 01:02 दोपहर
ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट बंद करने पर भारत को हो रही परेशानी पर जताया अफसोस, अमेरिका को ठहराया जिम्मेदार।

तेहरान | अमेरिका के साथ जारी भारी तनाव और अमेरिकी नेवी द्वारा की गई नाकेबंदी के बाद ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को पूरी तरह बंद करने का कड़ा फैसला लिया है। इस फैसले से दुनिया भर में हड़कंप मच गया है।

ईरानी राष्ट्रपति ने स्पष्ट किया है कि जब तक अमेरिका अपनी नाकेबंदी नहीं हटाता, यह महत्वपूर्ण जलमार्ग बंद रहेगा। डोनाल्ड ट्रंप ने इसे खोलने की अपील की है, जिसे ईरान ने सिरे से खारिज कर दिया।

होर्मुज स्ट्रेट बंद करने का कारण

ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने इस कदम का बचाव किया है। उन्होंने कहा कि ईरान को यह कठोर कदम उठाने के लिए मजबूर होना पड़ा क्योंकि हालात नियंत्रण से बाहर हो रहे थे।

बघाई के अनुसार, अमेरिका और इज़रायल ने खाड़ी क्षेत्र में अपने सैन्य ठिकानों का इस्तेमाल ईरान पर हमला करने के लिए किया। इसी वजह से ईरान ने अपनी सुरक्षा के लिए यह निर्णय लिया है।

ईरान का तर्क है कि अंतर्राष्ट्रीय कानून के तहत उसे अपनी संप्रभुता की रक्षा करने का पूरा अधिकार है। उन्होंने वैश्विक व्यापार में आई इस रुकावट के लिए सीधे तौर पर अमेरिका को जिम्मेदार ठहराया है।

भारत पर प्रभाव और ईरान का अफसोस

इस जलमार्ग के बंद होने से भारत समेत कई एशियाई देशों को भारी व्यापारिक नुकसान हो रहा है। ईरान ने स्वीकार किया है कि वह भारत को होने वाली इस परेशानी से बिल्कुल खुश नहीं है।

प्रवक्ता बघाई ने कहा कि युद्ध की स्थिति पैदा होने से पहले यह मार्ग सभी के लिए खुला था। उन्होंने भारत के साथ अपने ऐतिहासिक और कूटनीतिक संबंधों को बेहद महत्वपूर्ण और मजबूत बताया है।

भारत के साथ हमारे द्विपक्षीय संबंध बहुत अच्छे हैं। हम भारत को हो रही परेशानी से खुश नहीं हैं, लेकिन इसके पीछे पूरी तरह अमेरिका और इज़रायल जिम्मेदार हैं।

ईरान ने उम्मीद जताई है कि भारत उनकी स्थिति को समझेगा। उनका कहना है कि एक संप्रभु राष्ट्र के तौर पर परमाणु-सशस्त्र देशों के हमलों को वे चुपचाप बर्दाश्त नहीं कर सकते थे।

कूटनीतिक संबंधों का भविष्य

ईरान ने भारत के साथ अपने स्वस्थ संबंधों को आगे भी जारी रखने की इच्छा जताई है। बघाई ने कहा कि दोनों देशों के बीच आपसी सम्मान और साझा हितों का पुराना इतिहास रहा है।

भारत के लिए यह स्थिति चुनौतीपूर्ण है क्योंकि उसकी ऊर्जा सुरक्षा और व्यापारिक मार्ग इस क्षेत्र पर निर्भर हैं। ईरान ने साफ किया है कि समाधान अब अमेरिका और इज़रायल के हाथों में है।

इस तनावपूर्ण माहौल ने वैश्विक तेल कीमतों और आपूर्ति श्रृंखला पर गहरा असर डाला है। भारत अब कूटनीतिक स्तर पर इस समस्या का समाधान तलाशने की कोशिश कर रहा है ताकि व्यापार सुचारू हो सके।

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