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सरसों के भाव में जोरदार उछाल: ईरान-इजराइल युद्ध का असर: सरसों के भाव में 800 रुपये तक की तेजी, विदेशी तेल की कमी से किसानों को फायदा

मानवेन्द्र जैतावत · 27 मार्च 2026, 09:57 सुबह
मिडिल ईस्ट में जारी ईरान-इजराइल युद्ध के चलते विदेशी खाद्य तेलों की आपूर्ति बाधित हुई है, जिससे भरतपुर की मंडियों में सरसों के दाम 6800 रुपये तक पहुंच गए हैं।

भरतपुर | ईरान और इजराइल के बीच जारी तनाव का असर अब राजस्थान की कृषि मंडियों में स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। विदेशी खाद्य तेलों की आपूर्ति बाधित होने से सरसों की कीमतों में भारी उछाल आया है।

विदेशी तेल की कमी और कीमतों में उछाल

भरतपुर की नई सरसों मंडी व्यापार संघ के अनुसार, बीते कुछ दिनों में सरसों के भाव में 600 से 800 रुपये प्रति क्विंटल की तेजी आई है। फरवरी में जो सरसों 6250 रुपये थी, वह अब 6800 रुपये के पार पहुंच गई है। मिडिल ईस्ट युद्ध के कारण पाम ऑयल और राइस ब्रान ऑयल जैसे विदेशी तेलों का आयात 70 से 80 प्रतिशत तक प्रभावित हुआ है। इसके परिणामस्वरूप घरेलू बाजार में सरसों तेल की मांग और दाम दोनों बढ़ गए हैं।

किसानों को मिला बेहतर दाम

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि विदेशी तेल की कमी भारतीय किसानों के लिए वरदान साबित हो रही है। मंडी में फिलहाल 15 से 20 हजार बोरी की आवक हो रही है, लेकिन किसान और भी ऊंचे भावों की उम्मीद कर रहे हैं। सरसों तेल मिलों में भी लगभग 30 रुपये प्रति लीटर की तेजी दर्ज की गई है। विदेशी तेल की आवक कम होने से स्थानीय स्तर पर सरसों की खपत और मांग में भारी इजाफा देखा जा रहा है।

उत्पादन में गिरावट बनी चिंता

भाव बढ़ने के बावजूद किसान पूरी तरह खुश नहीं हैं। मौसम की अनिश्चितता और सूखे के कारण इस साल पैदावार काफी कम हुई है। पहले जहां प्रति बीघा 11 मन सरसों होती थी, अब वह घटकर 5-6 मन रह गई है। जमीन में नमी की कमी और बेमौसम बारिश ने फसल को काफी नुकसान पहुंचाया है। व्यापारियों का कहना है कि आने वाले समय में सरसों के भाव वैश्विक स्थितियों और युद्ध की दिशा पर निर्भर करेंगे।

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