जयपुर | ईरान और इजराइल के बीच गहराते युद्ध के बादलों ने अब राजस्थान के हवाई संपर्कों को पूरी तरह से अस्त-व्यस्त कर दिया है। इस तनाव का सीधा असर जयपुर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से संचालित होने वाली उड़ानों पर पड़ा है।
खाड़ी देशों के लिए जयपुर से चलने वाली कई उड़ानें या तो रद्द कर दी गई हैं या उनके समय में बड़ा बदलाव किया गया है। इससे यात्रियों में भारी अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है।
उड़ानों का संचालन प्रभावित
ईरान के ऊपर से हवाई रास्ता बंद होने और सुरक्षा कारणों की वजह से जयपुर से खाड़ी देशों की उड़ानों में भारी कमी आई है। इसका सबसे ज्यादा असर दुबई और अबू धाबी जाने वाले यात्रियों पर पड़ा है।
जहां पहले जयपुर से रोजाना दो उड़ानें संचालित होती थीं, अब केवल शाम की एक ही फ्लाइट उड़ान भर पा रही है। दुबई की दोनों रेगुलर उड़ानें लगातार रद्द हो रही हैं जिससे यात्रियों को भारी परेशानी हो रही है।
मस्कट की उड़ानों पर भी असर
सिर्फ दुबई ही नहीं, बल्कि मस्कट जाने वाली उड़ानों की स्थिति भी चिंताजनक है। मस्कट की फ्लाइट अब हफ्ते में सिर्फ दो दिन ही चल रही है, जिससे यात्रियों का दबाव बढ़ गया है।
विमानन कंपनियों का कहना है कि जब तक युद्ध की स्थिति सामान्य नहीं होती, तब तक उड़ानों का नियमित संचालन करना सुरक्षा की दृष्टि से संभव नहीं है।
प्रवासियों के सामने बड़ा संकट
इस स्थिति ने शेखावाटी क्षेत्र के सीकर, चूरू और झुंझुनूं के उन हजारों प्रवासियों को बड़ी मुसीबत में डाल दिया है, जो छुट्टियों पर घर आने वाले थे। उनकी घर वापसी अब अधर में लटक गई है।
वहीं, जो लोग अपनी छुट्टियां बिताकर वापस काम पर लौटना चाहते हैं, उन्हें भी फ्लाइट न मिलने के कारण अपनी नौकरियों की चिंता सताने लगी है। प्रवासियों के लिए यह समय काफी तनावपूर्ण है।
किराये में तीन गुना बढ़ोतरी
युद्ध के कारण विमानों को अब लंबे रूट से उड़ान भरनी पड़ रही है। ईरान के रास्ते को छोड़कर दूसरे रास्तों से जाने के कारण ईंधन की खपत काफी बढ़ गई है।
इसका सीधा बोझ आम आदमी की जेब पर पड़ रहा है। इटली और खाड़ी देशों से भारत आने वाली उड़ानों की टिकट जो पहले 50,000 रुपए के आसपास थी, अब 1.5 लाख तक पहुंच गई है।
मजदूरों की जेब पर भारी बोझ
एक सामान्य मजदूर या मध्यमवर्गीय कामगार के लिए तीन गुना किराया देना लगभग असंभव हो गया है। कई लोगों ने महंगे टिकटों की वजह से अपनी यात्रा फिलहाल टाल दी है।
ट्रैवल एजेंटों के अनुसार, टिकटों की मांग अधिक है लेकिन सीटों की उपलब्धता बहुत कम है। इस कारण आने वाले दिनों में कीमतें और भी अधिक बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।
सुरक्षा सर्वोपरि
अंतरराष्ट्रीय विमानन संगठनों ने एयरलाइंस को युद्ध प्रभावित क्षेत्रों से बचने की सलाह दी है। यही कारण है कि सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कंपनियां जोखिम नहीं लेना चाहतीं।
राजस्थान के पर्यटन और व्यापार पर भी इस हवाई संकट का नकारात्मक प्रभाव पड़ने की आशंका है। यदि यह तनाव लंबा खिंचता है, तो राज्य की अर्थव्यवस्था को भी नुकसान हो सकता है।