इस्लामाबाद | ईरान और अमेरिका के बीच आज पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में एक ऐतिहासिक शांति वार्ता होने जा रही है। इस बैठक पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं।
इस वार्ता का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच तनाव कम करना और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को बहाल करना है। हालांकि, इसमें सबसे बड़ी बाधा होर्मुज स्ट्रेट का बंद होना है।
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया का वह महत्वपूर्ण जलमार्ग है, जहां से वैश्विक स्तर पर करीब 25 प्रतिशत तेल और गैस का परिवहन किया जाता है। युद्ध की स्थिति के कारण ईरान ने इसे बंद कर दिया है।
ईरान की अपनी ही बिछाई सुरंगों में उलझन
न्यूयॉर्क टाइम्स की एक हालिया रिपोर्ट ने दुनिया भर की चिंताएं बढ़ा दी हैं। रिपोर्ट के अनुसार, ईरान अब खुद उन समुद्री खदानों का पता नहीं लगा पा रहा है, जिन्हें उसने हाल ही में बिछाया था।
बताया जा रहा है कि ईरान ने छोटे नौसैनिक जहाजों की मदद से इस पूरे जलमार्ग में बारूदी सुरंगें बिछाई थीं। अमेरिकी अधिकारियों का दावा है कि यह प्रक्रिया बिल्कुल भी व्यवस्थित नहीं थी।
खदानें बिछाते समय ईरान ने इनका कोई सटीक रिकॉर्ड या नक्शा तैयार नहीं किया। अब यही लापरवाही खुद ईरान और अंतरराष्ट्रीय शिपिंग के लिए एक बड़ा खतरा बन गई है।
बहाव के कारण बदली खदानों की स्थिति
विशेषज्ञों का कहना है कि समुद्र के पानी के तेज बहाव के कारण ये खदानें अपनी मूल जगह से हट चुकी हैं। इससे उन्हें ढूंढना और निष्क्रिय करना लगभग असंभव सा हो गया है।
इस स्थिति ने अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियों को अत्यधिक सतर्क कर दिया है। कई बड़े तेल टैंकरों ने अब इस खतरनाक मार्ग के बजाय लंबी दूरी के वैकल्पिक रास्तों का चुनाव करना शुरू कर दिया है।
ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने पहले ही चेतावनी दी थी कि बिना अनुमति के इस क्षेत्र में प्रवेश करना आत्मघाती हो सकता है। वर्तमान में ईरान यहां से गुजरने के लिए भारी शुल्क भी वसूल रहा है।
वैश्विक तेल बाजार पर गहरा असर
होर्मुज स्ट्रेट में अस्थिरता के कारण वैश्विक तेल कीमतों में भारी उछाल देखा जा रहा है। अगर यह जलमार्ग जल्द नहीं खुला, तो दुनिया को एक बड़े ऊर्जा संकट का सामना करना पड़ सकता है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस मुद्दे पर सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने मांग की है कि इस जलमार्ग को तुरंत और पूरी तरह से सुरक्षित रूप से यातायात के लिए खोला जाना चाहिए।
ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि संभावित युद्धविराम तभी प्रभावी माना जाएगा, जब समुद्री व्यापार सामान्य हो। वहीं, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने तकनीकी सीमाओं की बात स्वीकार की है।
जटिल होगी खदानों को हटाने की प्रक्रिया
इस्लामाबाद में होने वाली इस वार्ता में अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस भी शामिल हो सकते हैं। वार्ता का एक प्रमुख हिस्सा समुद्री सुरक्षा और खदानों की सफाई पर केंद्रित रहने वाला है।
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि समुद्र से खदानें हटाना एक अत्यंत जटिल और समय लेने वाली प्रक्रिया है। ईरान के पास वर्तमान में इस कार्य के लिए पर्याप्त उन्नत तकनीक और संसाधन नहीं हैं।
ऐसे में शांति वार्ता सफल होने के बावजूद, होर्मुज स्ट्रेट को जहाजों के लिए सुरक्षित बनाने में महीनों का समय लग सकता है। तब तक वैश्विक बाजार में अनिश्चितता बनी रहेगी।