नई दिल्ली | वैश्विक तनाव के बीच ईरान ने दावा किया है कि अमेरिका के साथ युद्ध खत्म करने के लिए एक संभावित शांति समझौते का शुरुआती ड्राफ्ट तैयार हो गया है। इस अनौपचारिक दस्तावेज से पश्चिम एशिया में शांति की उम्मीदें जगी हैं।
ईरान-अमेरिका शांति समझौते का शुरुआती ड्राफ्ट तैयार
ईरान के सरकारी टेलीविजन के अनुसार, दोनों देशों के बीच एक अनौपचारिक मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU) का शुरुआती ढांचा तैयार कर लिया गया है। यह कदम लंबे समय से जारी सैन्य गतिरोध को कम कर सकता है।
इस ड्राफ्ट के सामने आने के बाद वैश्विक कूटनीति में हलचल तेज हो गई है। हालांकि, ईरानी अधिकारियों का कहना है कि वे बिना ठोस गारंटी के इस समझौते पर अंतिम हस्ताक्षर नहीं करेंगे।
दूसरी तरफ, अमेरिकी प्रशासन ने अभी तक इस ड्राफ्ट को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। विशेषज्ञ इसे पर्दे के पीछे चल रही बड़ी कूटनीति का हिस्सा मान रहे हैं।
क्या हैं इस गुप्त समझौते की मुख्य शर्तें?
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, इस समझौते के तहत अमेरिका ईरान के आसपास के क्षेत्रों से अपनी सैन्य मौजूदगी को धीरे-धीरे कम करने पर सहमत हुआ है।
इसके साथ ही, अमेरिका ईरान की नौसैनिक घेराबंदी को भी पूरी तरह से समाप्त कर देगा। बदले में ईरान को भी कुछ कड़े कदम उठाने होंगे, जिससे क्षेत्र में स्थिरता आए।
समझौते के अनुसार, ईरान को अगले 30 दिनों के भीतर होर्मुज स्ट्रेट में व्यावसायिक जहाजों की आवाजाही को युद्ध से पहले के स्तर पर बहाल करना होगा।
यह व्यवस्था केवल व्यावसायिक जहाजों के लिए होगी और इसमें अमेरिकी सैन्य जहाज शामिल नहीं होंगे। होर्मुज स्ट्रेट का प्रबंधन ईरान और ओमान मिलकर करेंगे।
ईरान ने 10 भारतीय नाविकों को किया रिहा
भारत के लिए इस संकट के बीच एक बेहद राहत भरी खबर आई है। ईरान ने पिछले साल जुलाई से हिरासत में रखे गए 10 भारतीय नाविकों को सुरक्षित रिहा कर दिया है।
ये नाविक 'एमवी हार्बर फीनिक्स' नाम के तेल टैंकर पर तैनात थे, जिसे ईरानी अधिकारियों ने जास्क पोर्ट के पास रोका था। लंबी कूटनीतिक बातचीत के बाद यह सफलता मिली है।
भारत के डायरेक्टरेट जनरल ऑफ शिपिंग ने पुष्टि की है कि सभी नाविक पूरी तरह सुरक्षित हैं। उन्हें जल्द से जल्द भारत वापस लाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
इजरायल की भारत से बड़ी मांग: IRGC को घोषित करें आतंकी
इस बीच, इजरायल ने भारत सरकार से एक बड़ी कूटनीतिक मांग की है। इजरायल चाहता है कि भारत ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) को आतंकवादी संगठन घोषित करे।
इजराइली अधिकारियों ने भारत के साथ कई स्तरों पर IRGC की संदिग्ध गतिविधियों से जुड़े सबूत और अपनी गहरी चिंताएं साझा की हैं। कई पश्चिमी देश पहले ही इस पर प्रतिबंध लगा चुके हैं।
यह मामला भारत के लिए कूटनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील है। भारत के संबंध इजरायल और ईरान दोनों के साथ बेहद मजबूत और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण रहे हैं।
यूरेनियम संवर्धन और अन्य विवादित मुद्दे
समझौते के ड्राफ्ट के बावजूद कई गंभीर मुद्दों पर दोनों देशों के बीच मतभेद बरकरार हैं। इनमें सबसे बड़ा मुद्दा अत्यधिक समृद्ध यूरेनियम (Enriched Uranium) का है।
ईरान के सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के डिप्टी सेक्रेटरी अली बाघेरी कानी ने स्पष्ट किया है कि अमेरिका के साथ बातचीत में यूरेनियम का मुद्दा शामिल नहीं है।
"हम परमाणु कार्यक्रम और समृद्ध यूरेनियम के मुद्दे पर किसी भी तरह का बाहरी दबाव स्वीकार नहीं करेंगे। यह हमारे राष्ट्रीय संप्रभुता का मामला है।" - अली बाघेरी कानी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प पहले ही कह चुके हैं कि वे ईरान को भारी मात्रा में समृद्ध यूरेनियम रखने की अनुमति कभी नहीं देंगे। दोनों देशों के बीच यह सबसे बड़ा गतिरोध है।
वैश्विक बाजार और तेल की कीमतों पर असर
इस शांति वार्ता की खबरों का सीधा असर वैश्विक तेल बाजार पर देखने को मिला है। होर्मुज स्ट्रेट के दोबारा खुलने की उम्मीद से कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आई है।
ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 1.43% गिरकर 98.16 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई है। वहीं, अमेरिकी डब्ल्यूटीआई (WTI) क्रूड भी गिरकर 92.23 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है।
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल व्यापार मार्ग है। यहां से वैश्विक ईंधन और खाद की बड़ी खेप गुजरती है, जिससे दुनिया भर की अर्थव्यवस्था प्रभावित होती है।
यूरोपीय संघ भी इस संकट के कारण खाद की बढ़ती कीमतों से परेशान है। यूरोपीय कृषि मंत्री ब्रसेल्स में किसानों को राहत देने के लिए एक विशेष योजना पर काम कर रहे हैं।
लेबनान में इजरायली हमले और तुर्किये का रुख
एक तरफ जहां शांति समझौते की बातचीत चल रही है, वहीं दूसरी तरफ युद्ध का मैदान अब भी सुलग रहा है। इजरायल ने दक्षिणी लेबनान में हिजबुल्लाह के ठिकानों पर हमले तेज कर दिए हैं।
पिछले 24 घंटों में इजरायली हमलों में कम से कम 31 लोगों की मौत हुई है। इजरायल ने करीब 50 लेबनानी कस्बों को खाली करने की सख्त चेतावनी जारी की है।
तुर्किये के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप एर्दोगान ने इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को तानाशाह बताते हुए मुस्लिम देशों से एकजुट होने की अपील की है।
निष्कर्ष
ईरान और अमेरिका के बीच समझौते का यह शुरुआती ड्राफ्ट वैश्विक शांति की दिशा में एक बड़ा कदम हो सकता है। हालांकि, अंतिम समझौते के लिए अभी कई बाधाओं को पार करना होगा।
अगर अगले 60 दिनों में यह समझौता अंतिम रूप ले लेता है, तो इसे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का बाध्यकारी प्रस्ताव बनाया जा सकता है, जो दुनिया के लिए राहत की बात होगी।
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