इस्लामाबाद | पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में ईरान और अमेरिका के बीच हुई उच्चस्तरीय वार्ता बिना किसी समझौते के समाप्त हो गई है।
इस बैठक में अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरानी वार्ताकारों ने हिस्सा लिया। हालांकि, दोनों पक्षों के बीच कई अहम मुद्दों पर सहमति नहीं बन पाई।
ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता एस्माइल बागाई ने इस संबंध में विस्तृत जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि यह बातचीत लगभग 24 से 25 घंटे तक लगातार चली।
बागाई के अनुसार, यह पिछले एक वर्ष में दोनों देशों के बीच हुई सबसे लंबी अप्रत्यक्ष वार्ता थी। इसमें संदेशों का आदान-प्रदान पाकिस्तानी मध्यस्थों के जरिए हुआ।
ईरान-अमेरिका वार्ता बेनतीजा: इस्लामाबाद में ईरान-अमेरिका की 24 घंटे लंबी बातचीत बेनतीजा, क्या फिर मंडराएंगे युद्ध के बादल?
इस्लामाबाद में ईरान और अमेरिका के बीच हुई 24 घंटे की लंबी अप्रत्यक्ष वार्ता बिना किसी समझौते के समाप्त हो गई है। ईरानी विदेश मंत्रालय ने संकेत दिए हैं कि अविश्वास के कारण कुछ अहम मुद्दों पर सहमति नहीं बन सकी।
HIGHLIGHTS
- इस्लामाबाद में ईरान और अमेरिका के बीच 24 घंटे तक चली मैराथन बातचीत बेनतीजा रही।
- ईरानी प्रवक्ता एस्माइल बागाई ने कहा कि दो-तीन प्रमुख मुद्दों पर असहमति बनी रही।
- वार्ता में होर्मुज जलडमरूमध्य और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे नए और जटिल मुद्दे शामिल किए गए थे।
- पाकिस्तान ने इस ऐतिहासिक बातचीत में महत्वपूर्ण मध्यस्थ और मेजबान की भूमिका निभाई।
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वार्ता के मुख्य बिंदु और चुनौतियां
शनिवार सुबह से शुरू हुई यह प्रक्रिया रविवार तक बिना रुके चलती रही। इस दौरान क्षेत्रीय सुरक्षा और द्विपक्षीय संबंधों पर गहराई से चर्चा की गई।
ईरानी प्रवक्ता ने बताया कि बातचीत के दौरान कई मुद्दों पर सकारात्मक समझ विकसित हुई। लेकिन दो-तीन प्रमुख बिंदुओं पर दोनों देशों का रुख बिल्कुल अलग रहा।
इन मतभेदों के कारण अंततः कोई औपचारिक समझौता नहीं हो सका। बागाई ने कहा कि युद्धविराम के तुरंत बाद हुई इस वार्ता में अविश्वास का माहौल हावी था।
उन्होंने स्पष्ट किया कि कूटनीति राष्ट्रीय हितों की रक्षा का एक अनिवार्य साधन है। शांति हो या युद्ध, राजनयिकों को अपना कर्तव्य निभाते रहना चाहिए।
नए मुद्दों ने बढ़ाई जटिलता
इस बार की बातचीत में होर्मुज जलडमरूमध्य और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे नए विषय भी जोड़े गए थे। इन मुद्दों ने चर्चा को और अधिक पेचीदा बना दिया।
ईरान का मानना है कि केवल एक दौर की बातचीत से बड़े नतीजे की उम्मीद करना जल्दबाजी होगी। खासकर तब जब इजरायल ने ईरान पर हमला किया हो।
बागाई ने कहा कि इजरायली हमलों के बाद क्षेत्र में तनाव चरम पर है। ऐसे में कूटनीतिक रास्तों को खुला रखना ईरान की प्राथमिकता है।
ईरान अपने राष्ट्रीय हितों और अपनी जनता के अधिकारों की रक्षा के लिए हर संभव प्रयास करेगा। इसके लिए कूटनीति के सभी रास्तों का इस्तेमाल किया जाएगा।
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पाकिस्तान की मध्यस्थता का आभार
ईरानी विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तान द्वारा की गई मध्यस्थता की खुले दिल से सराहना की। उन्होंने पाकिस्तानी सेना और सरकार के प्रबंधन को बेहतरीन बताया।
प्रवक्ता ने प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और आर्मी चीफ जनरल असिम मुनीर का विशेष आभार व्यक्त किया। उन्होंने विदेश मंत्री इशाक दार की भूमिका को भी सराहा।
पाकिस्तान ने दोनों पक्षों के बीच एक सेतु का काम किया। इससे कठिन परिस्थितियों में भी संवाद की प्रक्रिया को सुचारू रूप से चलाया जा सका।
भविष्य की रणनीति और सुरक्षा
ईरान ने संकेत दिए हैं कि वे भविष्य में भी मित्र देशों के साथ परामर्श जारी रखेंगे। क्षेत्र में शांति बहाली के लिए वे कूटनीतिक रूप से सक्रिय रहेंगे।
बागाई ने अंत में कहा कि ईरान की सुरक्षा के लिए सरकार और जनता एकजुट है। देश के रक्षक हर स्थिति में अपनी सीमाओं की रक्षा के लिए तैयार हैं।
यह स्पष्ट है कि भले ही यह वार्ता बेनतीजा रही हो, लेकिन बातचीत का जारी रहना तनाव कम करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
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