वाशिंगटन | ईरान और अमेरिका के बीच तनाव खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। अमेरिकी हमले के जवाब में ईरान ने कुवैत और बहरीन पर मिसाइलों और ड्रोन से हमला कर दिया है, जिससे पूरे मध्य पूर्व क्षेत्र में अस्थिरता का खतरा बढ़ गया है।
यह जवाबी कार्रवाई अमेरिकी सेना की CENTCOM यूनिट द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य में चार ईरानी ड्रोन्स को मार गिराने के बाद हुई है।
ड्रोन गिराए जाने के कुछ ही घंटों बाद, अमेरिकी सेना ने ईरान के केशम द्वीप और दक्षिणी तट पर स्थित गोरुक में रडार साइट्स को निशाना बनाया था।
ईरान का जवाबी हमला
अमेरिका के इस हमले का बदला लेने के लिए ईरान ने तेजी से प्रतिक्रिया दी। ईरान ने कुवैत और बहरीन की ओर कई मिसाइलें और ड्रोन दागे।
कुवैत की सेना ने सोशल मीडिया पर पुष्टि की कि उनके एयर डिफेंस सिस्टम दुश्मन के हमलों का सामना कर रहे हैं।
सेना ने नागरिकों को सचेत किया कि धमाकों की आवाजें एयर डिफेंस सिस्टम द्वारा हमलों को रोकने का परिणाम हो सकती हैं।
मध्य पूर्व में बढ़ता संकट
इन हमलों ने न केवल ईरान और अमेरिका के बीच, बल्कि पूरे मध्य पूर्व में तनाव को और बढ़ा दिया है। दोनों देशों द्वारा लगातार संघर्ष विराम का उल्लंघन किया जा रहा है।
हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस क्षेत्र में बड़े पैमाने पर युद्ध नहीं चाहते हैं।
ट्रंप ने पहले कहा था कि दुनिया के उस हिस्से में सीज़फ़ायर का मतलब है कि आप ज़्यादा संयमित तरीके से गोलीबारी कर रहे हैं।
उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि अगर ईरान के हमले में किसी भी अमेरिकी सैनिक की मौत होती है, तो वह संघर्ष विराम को समाप्त कर देंगे।
यह स्थिति एक नाजुक संतुलन पर टिकी हुई है, जहां एक भी गलत कदम एक बड़े सैन्य संघर्ष को जन्म दे सकता है। फिलहाल, पूरी दुनिया की नजरें इस क्षेत्र के घटनाक्रम पर टिकी हुई हैं।
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