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डायबिटीज में दही: क्या है सच?: डायबिटीज में दही खाना फायदेमंद या नुकसानदेह? जानें सच

thinQ360 · 29 अप्रैल 2026, 01:36 दोपहर
डॉ. परमेश्वर अरोड़ा के अनुसार दही शुगर बढ़ाने का कारण बन सकता है, जानें इसे खाने का सही तरीका।

नई दिल्ली | डायबिटीज के मरीजों के लिए सही खान-पान का चुनाव करना हमेशा से एक बड़ी चुनौती रही है। दही को लेकर अक्सर लोगों के मन में कई तरह के भ्रम और सवाल रहते हैं। प्रसिद्ध स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. परमेश्वर अरोड़ा का मानना है कि दही शुगर बढ़ाने का तीसरा सबसे बड़ा कारण बन सकता है। हालांकि, इसे खाने का सही तरीका और समय जानना बहुत जरूरी है।

क्या वाकई दही से बढ़ता है शुगर लेवल?

दही मूल रूप से दूध से तैयार होता है और इसमें प्राकृतिक रूप से लैक्टोज नामक शुगर पाई जाती है। बैक्टीरिया इस लैक्टोज को लैक्टिक एसिड में बदलते हैं, फिर भी कुछ मात्रा शेष रहती है। लैक्टोज के पूरी तरह खत्म न होने के कारण, यदि शरीर इसे ठीक से प्रोसेस नहीं कर पाता, तो ब्लड शुगर में अचानक उछाल आने की प्रबल संभावना बनी रहती है।

रात के समय दही खाने के गंभीर नुकसान

रात के समय हमारे शरीर का मेटाबॉलिज्म काफी धीमा हो जाता है। इस समय दही का सेवन करने से शरीर इसे सही ढंग से प्रोसेस नहीं कर पाता है, जिससे शुगर अनियंत्रित होती है। आयुर्वेद के अनुसार, दही शरीर में 'कफ' दोष को बढ़ाता है। जब शरीर में कफ की मात्रा अधिक होती है, तो यह इंसुलिन की कार्यक्षमता को काफी हद तक प्रभावित कर सकता है।

बाजार के डिब्बाबंद उत्पादों से रहें सावधान

आजकल बाजार में मिलने वाले फ्लेवर्ड और डिब्बाबंद दही में भारी मात्रा में चीनी और प्रिजर्वेटिव्स मिलाए जाते हैं। यह डायबिटीज के मरीजों के लिए बहुत हानिकारक और जहर के समान साबित होता है।

"दही को सीधे खाने के बजाय उसमें पर्याप्त पानी मिलाकर छाछ या मट्ठा बना लें। यह पाचन को बेहतर बनाता है और अचानक होने वाले शुगर स्पाइक को रोकने में मदद करता है।"

डायबिटीज में दही खाने का सही और सुरक्षित तरीका

विशेषज्ञों के अनुसार, दही जितना अधिक खट्टा होगा, उसमें लैक्टोज की मात्रा उतनी ही कम होगी। खट्टा दही डायबिटीज के मरीजों के लिए सादे ताजे दही की तुलना में अधिक सुरक्षित विकल्प है। दही के सेवन के दौरान उसमें भुना हुआ जीरा, काला नमक और थोड़ी सी अजवाइन जरूर मिलाएं। ये मसाले पाचन तंत्र को सक्रिय करते हैं और रक्त में ग्लूकोज रिलीज को धीमा करते हैं। छाछ या मट्ठा बनाकर पीना सबसे अच्छा विकल्प माना जाता है। इससे दही की सघनता कम हो जाती है और यह शरीर के लिए हल्का और आसानी से पचने वाला बन जाता है।

नियमित जांच और विशेषज्ञ की सलाह है जरूरी

किसी भी तरह के आहार परिवर्तन से पहले अपने डॉक्टर से सलाह अवश्य लें। हर व्यक्ति का मेटाबॉलिज्म अलग होता है, इसलिए व्यक्तिगत स्वास्थ्य रिपोर्ट के आधार पर परामर्श लेना बहुत महत्वपूर्ण है। दही के सेवन की मात्रा को सीमित रखना और इसे केवल दिन के समय खाना ही बुद्धिमानी है। सही जानकारी और सावधानी ही डायबिटीज को प्रभावी ढंग से नियंत्रित करने की असली कुंजी है। अपनी जीवनशैली में छोटे-छोटे बदलाव करके आप अपनी शुगर को बेहतर तरीके से मैनेज कर सकते हैं। दही को सही तरीके से खाएं और बिना किसी डर के स्वस्थ जीवन का आनंद लें।

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