राजनीति

जयपुर में पानी पर संग्राम: जयपुर: गर्म सड़क पर लेटे कांग्रेसी, जलभवन का किया घेराव

thinQ360 · 25 मई 2026, 11:58 दोपहर
जयपुर में गंदे पानी और जल संकट के खिलाफ कांग्रेस का उग्र प्रदर्शन, खाचरियावास ने दी कड़ी चेतावनी।

जयपुर | राजधानी जयपुर में पेयजल संकट और गंदे पानी की सप्लाई को लेकर कांग्रेस ने बड़ा मोर्चा खोल दिया है। पूर्व मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने जलभवन का घेराव किया।

तपती सड़क पर लेटे कांग्रेस कार्यकर्ता

जयपुर में पारा 45 डिग्री के पार पहुंच चुका है। ऐसी भीषण गर्मी में कांग्रेस कार्यकर्ताओं का गुस्सा सातवें आसमान पर दिखाई दिया। कार्यकर्ताओं ने हसनपुरा चौराहे पर विरोध प्रदर्शन किया।

विरोध का तरीका बेहद अनोखा और चुनौतीपूर्ण था। प्रदर्शनकारी कार्यकर्ता जलती हुई सड़क पर लेट गए। करीब 10 मिनट तक कार्यकर्ता गर्म जमीन पर लेटे रहे। इससे वहां यातायात पूरी तरह बाधित हो गया।

सड़क इतनी गर्म थी कि उस पर हाथ रखना भी मुश्किल था। लेकिन कार्यकर्ताओं ने जल संकट की गंभीरता को बताने के लिए यह कदम उठाया। पुलिस प्रशासन को यातायात सुचारू करने में कड़ी मशक्कत करनी पड़ी।

कार्यकर्ताओं का कहना था कि जब जनता प्यासी मर रही है, तो वे चुप नहीं बैठ सकते। सरकार को जगाने के लिए उन्हें यह कठोर रास्ता अपनाना पड़ा। इस दौरान सरकार विरोधी नारे लगाए गए।

हसनपुरा चौराहे पर चक्काजाम की स्थिति

हसनपुरा चौराहे पर कार्यकर्ताओं के लेटने से लंबी कतारें लग गईं। एम्बुलेंस और आवश्यक सेवाओं को निकालने के लिए पुलिस को रास्ता बनाना पड़ा। प्रदर्शनकारियों ने साफ किया कि यह केवल शुरुआत है।

कांग्रेस का यह प्रदर्शन सिविल लाइंस से शुरू हुआ था। वहां से कार्यकर्ता पैदल 'पानी यात्रा' निकालते हुए जलभवन की ओर बढ़े। यात्रा में बड़ी संख्या में स्थानीय लोग भी शामिल हुए।

लोगों के हाथों में खाली मटके और तख्तियां थीं। तख्तियों पर पानी की समस्या के समाधान की मांग लिखी थी। रास्ते भर कार्यकर्ताओं ने भाजपा सरकार की नीतियों की जमकर आलोचना की।

खाचरियावास का सरकार पर तीखा हमला

पूर्व मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास इस प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे थे। उन्होंने मीडिया से बात करते हुए राज्य सरकार पर तीखे प्रहार किए। उन्होंने कहा कि जयपुर की जनता बूंद-बूंद को तरस रही है।

अगर जनता की समस्या का समाधान जल्द नहीं हुआ, तो यही गंदा पानी मुख्यमंत्री और मंत्रियों को पिलाऊंगा। जरूरत पड़ी तो उनके बंगलों के पानी के कनेक्शन भी खुद काटूंगा।

खाचरियावास ने कहा कि राजधानी में गंदे पानी की सप्लाई हो रही है। लोग बीमार पड़ रहे हैं लेकिन सरकार चैन की नींद सो रही है। उन्होंने जलदाय मंत्री कन्हैया लाल चौधरी पर भी निशाना साधा।

मुख्यमंत्री और मंत्रियों को दी चेतावनी

खाचरियावास ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार जनता की बुनियादी जरूरतों के प्रति बेपरवाह है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को जमीनी हकीकत का अंदाजा नहीं है।

उन्होंने चेतावनी दी कि यदि अगले कुछ दिनों में स्थिति नहीं सुधरी, तो आंदोलन उग्र होगा। कांग्रेस कार्यकर्ता मंत्रियों के घेराव से भी पीछे नहीं हटेंगे। जनता का हक छीनने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।

खाचरियावास ने कहा कि जब राजधानी जयपुर के यह हाल हैं, तो दूर-दराज के गांवों की स्थिति क्या होगी? सरकार ने गर्मी से निपटने के लिए कोई तैयारी नहीं की थी।

राजधानी में गंदे पानी का संकट

जयपुर के कई इलाकों में पिछले कई हफ्तों से गंदे पानी की सप्लाई हो रही है। नलों में बदबूदार और पीला पानी आ रहा है। इससे बच्चों और बुजुर्गों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है।

स्थानीय निवासियों का कहना है कि वे कई बार शिकायत कर चुके हैं। लेकिन जलदाय विभाग के अधिकारी उनकी बात नहीं सुन रहे। विभाग की ओर से केवल आश्वासन ही मिल रहे हैं।

गंदे पानी के कारण लोग पानी छानकर और उबालकर पीने को मजबूर हैं। कई घरों में तो पानी इतना खराब है कि उसे कपड़े धोने के काम में भी नहीं लिया जा सकता।

कंटिंजेंसी प्लान की विफलता

खाचरियावास ने कहा कि भाजपा सरकार ने गर्मी शुरू होने से पहले कोई कंटिंजेंसी प्लान नहीं बनाया। हर साल गर्मी में पानी की मांग बढ़ती है, लेकिन इस बार कोई तैयारी नहीं थी।

सरकार को पता था कि जल स्तर नीचे जा रहा है। इसके बावजूद वैकल्पिक जल स्रोतों का इंतजाम नहीं किया गया। इसका खामियाजा अब आम जनता को भुगतना पड़ रहा है।

विपक्ष का आरोप है कि जलदाय विभाग के पास टैंकरों का पर्याप्त स्टॉक नहीं है। सरकारी टैंकर समय पर नहीं पहुंच रहे हैं। इससे जनता में भारी आक्रोश व्याप्त है।

टैंकर माफियाओं का बढ़ा आतंक

पानी की कमी का फायदा अब टैंकर माफिया उठा रहे हैं। जयपुर में एक पानी के टैंकर की कीमत 500 रुपये तक पहुंच गई है। गरीब आदमी इतना पैसा कहां से लाएगा?

इतना ही नहीं, पीने के पानी के लिए लोग 50 रुपये के कैंपर खरीदने को मजबूर हैं। महीने भर का पानी का बजट हजारों रुपये में पहुंच गया है। सरकार फ्री टैंकर उपलब्ध कराने में विफल रही है।

प्रताप सिंह खाचरियावास ने कहा कि सरकार ने माफियाओं को खुली छूट दे रखी है। निजी टैंकर वाले मनमर्जी के दाम वसूल रहे हैं। प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ है।

जनता की बुनियादी जरूरतों का सवाल

स्वच्छ पेयजल हर नागरिक का बुनियादी अधिकार है। लेकिन जयपुर में यह अधिकार केवल कागजों तक सीमित रह गया है। लोगों को सड़कों पर उतरना पड़ रहा है।

कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मांग की कि सरकार तुरंत प्रभावित इलाकों में मुफ्त टैंकर भेजे। साथ ही पाइपलाइनों की मरम्मत कर गंदे पानी की समस्या को जड़ से खत्म किया जाए।

विरोध प्रदर्शन के दौरान महिलाओं ने मटके फोड़कर अपना गुस्सा जाहिर किया। उन्होंने कहा कि घर का कामकाज ठप हो गया है। घंटों पानी के इंतजार में बीत जाते हैं।

भविष्य के आंदोलन की रणनीति

कांग्रेस ने स्पष्ट कर दिया है कि यह आंदोलन थमने वाला नहीं है। आने वाले दिनों में जयपुर के हर वार्ड में प्रदर्शन किए जाएंगे। पार्टी घर-घर जाकर लोगों को सरकार की विफलता बताएगी।

खाचरियावास ने कहा कि हम जलभवन का ताला भी लगा सकते हैं। यदि अधिकारी दफ्तरों से बाहर नहीं निकले, तो उन्हें वहीं बंद कर दिया जाएगा। जनता का दर्द उन्हें समझना होगा।

इस विरोध प्रदर्शन में स्थानीय पार्षदों और वरिष्ठ नेताओं ने भी हिस्सा लिया। सभी ने एक सुर में सरकार से इस्तीफा देने या समस्या सुलझाने की मांग की।

जयपुर में जल संकट अब एक गंभीर राजनीतिक मुद्दा बन गया है। कांग्रेस के इस उग्र प्रदर्शन ने सरकार पर भारी दबाव बना दिया है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस समस्या का समाधान कितनी जल्दी निकाल पाता है ताकि जनता को इस भीषण गर्मी में राहत मिल सके।

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