जयपुर | राजस्थान की राजधानी जयपुर के निवासियों के लिए राहत भरी खबर है। शहर की सड़कों पर लगने वाले भारी ट्रैफिक जाम से निपटने के लिए जयपुर विकास प्राधिकरण (JDA) ने एक नया और स्मार्ट मास्टर प्लान तैयार किया है।
फ्लाईओवर नहीं, स्मार्ट डिजाइन पर जोर
अब तक ट्रैफिक जाम का समाधान केवल बड़े फ्लाईओवर या पुलों के निर्माण में देखा जाता था। लेकिन इस बार जेडीए ने सड़कों के बेहतर इस्तेमाल और स्मार्ट डिजाइन पर आधारित मॉडल अपनाया है।
इस नई रणनीति के तहत 'डबल यू-टर्न' का कंसेप्ट पहली बार बड़े पैमाने पर लागू किया जा रहा है। इसका उद्देश्य चौराहों पर लगने वाले सिग्नल टाइम को कम करना और वाहनों की गति को निरंतर बनाए रखना है।
क्या है 'डबल यू-टर्न' कंसेप्ट?
डबल यू-टर्न कंसेप्ट के तहत वाहन चालक को चौराहे पर सीधे दाईं ओर मुड़ने की अनुमति नहीं होगी। इसके बजाय, चालक को चौराहे को पार कर थोड़ा आगे जाना होगा और वहां बने यू-टर्न प्वाइंट से वापस मुड़कर अपनी दिशा बदलनी होगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि चौराहों पर 50 प्रतिशत ट्रैफिक केवल टर्निंग मूवमेंट के कारण रुकता है। इस नई व्यवस्था से चौराहों पर सिग्नल का दबाव घटेगा और जाम की स्थिति पूरी तरह खत्म हो जाएगी।
इन सड़कों पर शुरू होगा काम
जयपुर विकास प्राधिकरण ने इस योजना के पहले चरण के लिए शहर की कुछ सबसे व्यस्त सड़कों का चयन किया है। इसमें महल रोड, सीकर रोड और न्यू सांगानेर रोड शामिल हैं, जहां पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर काम शुरू होगा।
ट्रैफिक सुधार के अन्य प्रमुख उपाय
जाम मुक्त जयपुर के लिए जेडीए कई अन्य छोटे लेकिन प्रभावी बदलाव भी कर रहा है:
- फ्री लेफ्ट टर्न: बाईं ओर मुड़ने वाले वाहनों के लिए अलग लेन बनाई जा रही है ताकि उन्हें रेड लाइट पर न रुकना पड़े।
- राउंडअबाउट (चौराहा): चौराहों पर सर्किल बनाए जाएंगे, जिससे वाहन धीमी गति से चलते हुए बिना रुके आगे बढ़ सकें।
- चैनलाइजेशन: लेन, डिवाइडर और मार्किंग के जरिए वाहनों की दिशा तय की जाएगी ताकि अनावश्यक कटाव बंद हों।
- मीडियन कट्स: असुरक्षित और अनियंत्रित कट्स को बंद कर केवल सुरक्षित स्थानों पर ही यू-टर्न की व्यवस्था की जाएगी।
मंत्री और आयुक्त का भरोसा
जयपुर विकास आयुक्त सिद्धार्थ महाजन ने कहा कि यह मॉडल कम लागत में सबसे अधिक प्रभावी साबित होगा। यह व्यावहारिक समाधान चौराहों पर होने वाली दुर्घटनाओं को भी कम करेगा और जनता का कीमती समय बचाएगा।
नगरीय विकास मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने बताया कि हमारा प्रयास बड़े निर्माण के बिना ट्रैफिक सुचारू करना है। जयपुर में सफलता के बाद इस मॉडल को राजस्थान के अन्य प्रमुख शहरों जैसे जोधपुर और कोटा में भी लागू किया जाएगा।