जयपुर |
जयपुर की सड़कों पर इलेक्ट्रिक बसों का इंतजार लंबा होता जा रहा है। ट्रायल के तीन महीने बाद भी बसें सड़कों पर नहीं उतरी हैं, जिससे शहर के पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम पर असर पड़ रहा है।
मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा ने इस मामले में हस्तक्षेप करते हुए मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास को जिम्मेदारी सौंपी है। उन्होंने निर्देश दिए हैं कि बसों का संचालन जल्द से जल्द शुरू किया जाए।
चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी बनी बड़ी बाधा
26 फरवरी को शहर में इन बसों का ट्रायल किया गया था। अधिकारियों ने मार्च से संचालन का वादा किया था, लेकिन चार्जिंग स्टेशनों का निर्माण समय पर पूरा नहीं हो सका।
पीएम ई-बस योजना के तहत जयपुर को पहले फेज में 150 बसें मिली हैं। ये बसें टोडी और बगराना डिपो से संचालित होनी हैं, लेकिन वहां बुनियादी ढांचा अभी तैयार नहीं है।
प्रदेश के अन्य शहरों को भी मिलेगा लाभ
राजस्थान में पहले फेज में कुल 675 बसें चलाई जानी हैं। इनमें जोधपुर, अजमेर और कोटा को 100-100 बसें, बीकानेर को 75, जबकि अलवर और उदयपुर को 50-50 बसें आवंटित की गई हैं।
केंद्र सरकार ने 2019 में फेम-2 योजना के तहत भी जयपुर को 100 ई-बसों की मंजूरी दी थी। हालांकि, तकनीकी शर्तों और टेंडर प्रक्रिया में विवाद के कारण यह परियोजना लंबे समय तक अटकी रही।
"जून से इलेक्ट्रिक बसों का संचालन शुरू किया जाएगा। हम चार्जिंग स्टेशनों के काम को प्राथमिकता पर पूरा कर रहे हैं।" - नारायण सिंह, एमडी, जेसीटीएसएल
दूसरे फेज में मिलेंगी 300 अतिरिक्त बसें
दूसरे फेज में जयपुर को 300 और बसें मिलने का अनुमान है। इससे शहर में ई-बसों की कुल संख्या 450 तक पहुंच जाएगी। बीकानेर और अलवर को भी अतिरिक्त बसें दी जाएंगी।
जयपुर में इलेक्ट्रिक बसों के आने से न केवल प्रदूषण कम होगा, बल्कि यात्रियों को आरामदायक सफर भी मिलेगा। मुख्यमंत्री की सक्रियता से अब इस प्रोजेक्ट में तेजी आने की पूरी संभावना है।
प्रशासन अब जून की समयसीमा को ध्यान में रखकर काम कर रहा है। यदि सब कुछ योजना के अनुसार रहा, तो अगले महीने से जयपुरवासियों का इलेक्ट्रिक बस में सफर करने का सपना सच हो जाएगा।
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