जयपुर | राजस्थान की राजधानी जयपुर में मिलावटखोरों के खिलाफ स्वास्थ्य विभाग ने एक बार फिर कमर कस ली है। अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर जहां पूरा शहर शादियों के जश्न में डूबा है, वहीं कुछ लोग इस खुशी में जहर घोलने की फिराक में थे।
मानसरोवर में बड़ी कार्रवाई
जयपुर सीएमएचओ डॉ. मनीष मित्तल के नेतृत्व में खाद्य सुरक्षा टीम ने आज सुबह मानसरोवर के पास एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया। टीम को सूचना मिली थी कि शादियों के सीजन का फायदा उठाकर भारी मात्रा में मिलावटी पनीर बाजार में खपाया जा रहा है।
सूचना के आधार पर टीम ने चौधरी रोडूराम नगर, मांग्यवास स्थित 'हनुमान पनीर भंडार' के गोदाम पर अचानक छापा मारा। जैसे ही टीम वहां पहुंची, वहां मौजूद कर्मचारियों और मालिक में हड़कंप मच गया।
मौके पर टीम ने देखा कि बड़ी मात्रा में पनीर का स्टॉक रखा हुआ था। प्राथमिक जांच में ही पनीर की गुणवत्ता बेहद खराब नजर आई। पनीर का रंग स्वाभाविक सफेद न होकर हल्का पीला था और उसे चखने पर स्वाद में अजीब सा कसैलापन महसूस हो रहा था।
250 किलो पनीर किया गया नष्ट
सीएमएचओ डॉ. मनीष मित्तल ने बताया कि गोदाम में करीब 250 किलोग्राम पनीर का स्टॉक मिला था। पनीर की स्थिति को देखते हुए उसे तुरंत जब्त कर लिया गया। टीम ने मौके पर ही पनीर के नमूने लिए ताकि उन्हें लैब में विस्तार से जांचा जा सके।
चूंकि पनीर स्वास्थ्य के लिए हानिकारक लग रहा था, इसलिए विभाग ने जोखिम न लेते हुए पूरे 250 किलो पनीर को मौके पर ही नष्ट करवा दिया। विभाग का मानना है कि इसे बाजार में बेचना लोगों की जान से खिलवाड़ करने जैसा होता।
यह पनीर आज शहर में होने वाली विभिन्न शादियों और समारोहों में भेजा जाना था। अक्षय तृतीया पर जयपुर और आसपास के इलाकों में हजारों शादियां हैं, जिससे पनीर की डिमांड अचानक बहुत बढ़ गई है।
सस्ते के चक्कर में सेहत से खिलवाड़
पूछताछ के दौरान फर्म के मालिक बबलू शर्मा ने चौंकाने वाले खुलासे किए। उसने बताया कि यह पनीर उसने दौसा जिले के सिकराय से मंगवाया था। सबसे हैरान करने वाली बात इसकी कीमत थी।
बबलू शर्मा ने यह पनीर मात्र 190 रुपये प्रति किलो के भाव से खरीदा था। जबकि बाजार में शुद्ध पनीर की लागत इससे कहीं अधिक होती है। वह इस मिलावटी पनीर को शादी के ऑर्डर्स के लिए 240 रुपये प्रति किलो के भाव से बेच रहा था।
मुनाफे के लालच में इस तरह का खेल लंबे समय से चल रहा था। 50 रुपये प्रति किलो का सीधा मुनाफा कमाने के चक्कर में लोगों के स्वास्थ्य को दांव पर लगाया जा रहा था।
पनीर में डिटर्जेंट की मिलावट
डॉ. मित्तल ने बताया कि यह कोई पहली कार्रवाई नहीं है। पिछले कुछ दिनों से विभाग लगातार पनीर विक्रेताओं पर नजर रखे हुए है। हाल ही में झालाना स्थित 'शर्मा पनीर भंडार' पर भी ऐसी ही कार्रवाई की गई थी।
झालाना से लिए गए नमूनों की जब सेंट्रल लैब में जांच हुई, तो रिपोर्ट चौंकाने वाली थी। पनीर के नमूनों में डिटर्जेंट और घटिया क्वालिटी के खाद्य तेल की मिलावट पाई गई थी।
लैब रिपोर्ट में स्पष्ट कहा गया कि यह पनीर 'अनसेफ' है और मानव स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक है। डिटर्जेंट युक्त पनीर खाने से पेट की गंभीर बीमारियां और कैंसर जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
लाइसेंस निलंबित और कड़ी कार्रवाई
झालाना मामले में रिपोर्ट आने के बाद विभाग ने सख्त रुख अपनाया है। उच्चाधिकारियों के निर्देश पर उस फर्म का लाइसेंस तुरंत प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। साथ ही उनके खाद्य कारोबार पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है।
हनुमान पनीर भंडार के मामले में भी नमूनों की रिपोर्ट आने का इंतजार है। डॉ. मित्तल ने चेतावनी दी है कि यदि रिपोर्ट में मिलावट की पुष्टि होती है, तो संबंधित मालिक के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी और भारी जुर्माना भी लगाया जाएगा।
अक्षय तृतीया पर विशेष सतर्कता
आज अक्षय तृतीया है, जिसे राजस्थान में 'अबूझ सावा' माना जाता है। इस दिन बिना मुहूर्त देखे शादियां संपन्न होती हैं। भारी मांग के कारण दूध, मावा और पनीर जैसे डेयरी उत्पादों में मिलावट की संभावना 200 प्रतिशत बढ़ जाती है।
स्वास्थ्य विभाग ने अपील की है कि हलवाई या केटरर्स से पनीर लेते समय उसकी शुद्धता की जांच अवश्य करें। यदि पनीर अधिक रबर जैसा खिंच रहा है या उसमें से केमिकल की गंध आ रही है, तो उसका उपयोग बिल्कुल न करें।
विभाग की टीमें आज पूरे दिन जयपुर के अलग-अलग इलाकों में सक्रिय रहेंगी। ग्रामीण क्षेत्रों में भी विशेष उड़न दस्तों को तैनात किया गया है ताकि मिलावटखोरों पर नकेल कसी जा सके।
कैसे पहचानें असली और नकली पनीर?
खाद्य विशेषज्ञों का कहना है कि असली पनीर हाथ से मसलने पर टूट जाता है, जबकि मिलावटी पनीर रबर की तरह व्यवहार करता है। नकली पनीर में अक्सर आयोडीन की बूंदें डालने पर वह नीला पड़ जाता है, जो स्टार्च की मौजूदगी को दर्शाता है।
इसके अलावा, यदि पनीर को उबालने पर पानी पीला या झागदार हो जाए, तो समझ लें कि इसमें डिटर्जेंट या यूरिया मिलाया गया है। उपभोक्ताओं को सलाह दी जाती है कि वे हमेशा विश्वसनीय दुकानों से ही डेयरी उत्पाद खरीदें।
जयपुर सीएमएचओ ने स्पष्ट किया है कि 'शुद्ध के लिए युद्ध' अभियान के तहत यह कार्रवाई निरंतर जारी रहेगी। त्योहारों और शादियों के सीजन में किसी भी कीमत पर जनता की सेहत से समझौता नहीं किया जाएगा।
निष्कर्ष
जयपुर में हुई यह कार्रवाई एक बड़ा सबक है। यह न केवल मिलावटखोरों के लिए चेतावनी है, बल्कि आम जनता के लिए भी सतर्क रहने का संकेत है। प्रशासन अपनी ओर से पूरी कोशिश कर रहा है, लेकिन नागरिकों की जागरूकता ही मिलावटखोरी को जड़ से खत्म कर सकती है।
अगर आपको भी कहीं मिलावटी सामान बिकने की सूचना मिले, तो तुरंत स्वास्थ्य विभाग के कंट्रोल रूम या सीएमएचओ कार्यालय में संपर्क करें। आपकी एक छोटी सी सतर्कता किसी की जान बचा सकती है।