राजस्थान

जयपुर में 53 लाख का गेहूं घोटाला: जयपुर में 53 लाख का सरकारी गेहूं बाजार में बेचा: ट्रांसपोर्ट फर्म ने 34 राशन दुकानों का हक मारा, मार्च के कोटे से की भरपाई की कोशिश

जोगेन्द्र सिंह शेखावत · 07 अप्रैल 2026, 11:50 दोपहर
जयपुर में सरकारी राशन वितरण में एक बड़ा घोटाला सामने आया है जहाँ 1790 क्विंटल गेहूं बाजार में बेच दिया गया। ट्रांसपोर्टर ने 34 दुकानों का गेहूं डकार लिया और पकड़े जाने पर मार्च के कोटे से उसे छिपाने की कोशिश की।

जयपुर | राजस्थान की राजधानी जयपुर में भ्रष्टाचार और कालाबाजारी का एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। शहर में गरीबों के निवाले पर डाका डालने का एक बड़ा खेल उजागर हुआ है, जहाँ 53 लाख रुपये का सरकारी गेहूं खुले बाजार में बेच दिया गया। यह पूरा मामला जयपुर के रसद विभाग की सतर्कता के बाद सामने आया है, जिसमें एक ट्रांसपोर्ट फर्म की बड़ी लापरवाही और धोखाधड़ी पाई गई है।

राशन की दुकानों तक नहीं पहुंचा निवाला

सरकारी राशन वितरण व्यवस्था के तहत जयपुर जिले की 34 राशन दुकानों के लिए आवंटित किया गया 1790 क्विंटल गेहूं कभी उन दुकानों तक पहुंचा ही नहीं। विभागीय जांच में यह खुलासा हुआ है कि इस गेहूं को बीच रास्ते में ही खुर्द-बुर्द कर दिया गया और इसे निजी व्यापारियों को बेच दिया गया। इस गेहूं की सप्लाई करने की जिम्मेदारी एक निजी ट्रांसपोर्ट फर्म को दी गई थी, जिसने विभाग के भरोसे को तोड़ते हुए कालाबाजारी को अंजाम दिया।

कैसे हुआ 53 लाख का यह खेल?

खाद्य विभाग के अनुसार, राशन वितरण का काम एम/एस भरत लाल शिव सहाय एण्ड संस नामक फर्म द्वारा किया जा रहा था। इस फर्म को सीडब्लूसी सीतापुरा और अन्य सरकारी डिपो से गेहूं उठाकर संबंधित राशन दुकानों तक सुरक्षित पहुंचाना था। लेकिन फर्म ने 34 ट्रकों में लदा गेहूं दुकानों पर उतारने के बजाय उसे सीधे बाजार में बेचकर मोटी रकम कमा ली।

ट्रांसपोर्टर की चालाकी और विभाग की सतर्कता

जब 34 राशन दुकानों के संचालकों ने शिकायत की कि उन्हें फरवरी महीने का कोटा नहीं मिला है, तब विभाग के कान खड़े हुए। खाद्य विभाग की विजिलेंस टीम ने तुरंत इस मामले की जांच शुरू की और रिकॉर्ड खंगालने शुरू किए। जांच में पाया गया कि ट्रांसपोर्टर ने गेहूं की डिलीवरी के फर्जी आंकड़े पेश करने की कोशिश की थी, लेकिन धरातल पर माल गायब था।

इन इलाकों की दुकानों पर पड़ा असर

इस घोटाले का सबसे ज्यादा असर जयपुर के ग्रामीण और बाहरी इलाकों की राशन दुकानों पर पड़ा है। जिन क्षेत्रों में गेहूं नहीं पहुंचा, उनमें चौमूं, चाकसू, जालसू, आमेर, आंधी, जमवारामगढ़, बस्सी और झोटवाड़ा शामिल हैं। इन इलाकों की 34 दुकानों के हजारों उपभोक्ता फरवरी महीने में अपने राशन के हक से वंचित रह गए।

मार्च के कोटे से फरवरी की भरपाई का पैंतरा

जब ट्रांसपोर्टर को लगा कि वह पकड़ा जा सकता है, तो उसने एक और बड़ी धोखाधड़ी करने की कोशिश की। उसने मार्च 2026 के लिए आवंटित किए गए गेहूं में से 1311 क्विंटल गेहूं निकालकर उन दुकानों पर भेज दिया। उसने इसे फरवरी का बकाया कोटा बताया, ताकि विभाग की आंखों में धूल झोंकी जा सके और जांच को भटकाया जा सके।

विजिलेंस जांच में खुली पोल

हालांकि, विजिलेंस टीम ने स्टॉक के मिलान के दौरान इस हेराफेरी को पकड़ लिया और पाया कि यह नया गेहूं पुराने कोटे का नहीं है। जांच अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि हर ट्रक से थोड़ा-थोड़ा गेहूं गायब किया गया था, ताकि किसी को एक बार में शक न हो। यह एक सोची-समझी साजिश थी, जिसे बड़े स्तर पर अंजाम दिया जा रहा था, लेकिन दुकानदारों की जागरूकता ने इसे विफल कर दिया।

पुलिसिया कार्रवाई और FIR का विवरण

इस मामले में जयपुर रसद ऑफिस-सेकंड में प्रवर्तन अधिकारी निशांत पंचोली ने सांगानेर सदर थाने में रिपोर्ट दर्ज करवाई है। पुलिस ने फर्म के प्रोपराइटर विनोद कुमार शर्मा के खिलाफ गबन और धोखाधड़ी की विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया है। विनोद कुमार शर्मा अलवर के सर्किट हाउस रोड का निवासी बताया जा रहा है और पुलिस अब उसकी तलाश में जुटी है।

गरीबों के हक पर डाका: एक गंभीर मुद्दा

सरकारी गेहूं का उपयोग उन परिवारों के लिए किया जाता है जो आर्थिक रूप से कमजोर हैं और सरकार की मदद पर निर्भर हैं। 53 लाख रुपये की कीमत का 1790 क्विंटल गेहूं हजारों परिवारों की भूख मिटाने के लिए पर्याप्त था। इस तरह की कालाबाजारी न केवल एक कानूनी अपराध है, बल्कि यह मानवीय संवेदनाओं के खिलाफ भी एक बड़ा कृत्य है।

विभाग की अगली कार्रवाई और वसूली की योजना

खाद्य विभाग ने अब कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है और गबन की गई राशि की वसूली की प्रक्रिया शुरू कर दी है। विभाग इस फर्म से पूरे 53 लाख रुपये वसूल करेगा और फर्म को ब्लैकलिस्ट करने की तैयारी भी की जा रही है। इसके साथ ही, भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सप्लाई चेन की निगरानी को और सख्त बनाने के निर्देश दिए गए हैं।

राशन वितरण प्रणाली में पारदर्शिता की जरूरत

यह घटना दर्शाती है कि राशन वितरण प्रणाली में अभी भी कई खामियां हैं जिनका फायदा भ्रष्ट लोग उठाते हैं। जीपीएस ट्रैकिंग और डिजिटल पावती जैसी प्रणालियों के बावजूद, ट्रांसपोर्टर द्वारा माल गायब करना एक बड़ी चुनौती है। स्थानीय प्रशासन ने जनता से अपील की है कि यदि उन्हें राशन मिलने में देरी हो, तो तुरंत विभाग को सूचित करें।

निष्कर्ष और वर्तमान स्थिति

फिलहाल सांगानेर सदर थाना पुलिस मामले की गहराई से जांच कर रही है और आरोपियों की गिरफ्तारी के प्रयास तेज कर दिए गए हैं। पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या इस घोटाले में विभाग के किसी निचले स्तर के कर्मचारी की मिलीभगत तो नहीं थी। जयपुर का यह गेहूं घोटाला पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बना हुआ है और सख्त कार्रवाई की मांग उठ रही है।

← पूरा आर्टिकल पढ़ें (Full Version)