राजस्थान

जयपुर: हाईटेंशन लाइन से भीषण हादसा: जयपुर में हाईटेंशन लाइन की चपेट में आया मजदूर, 10 सिलेंडर फटने जैसा हुआ धमाका, 12 किमी तक बिजली गुल

मानवेन्द्र जैतावत · 31 मार्च 2026, 09:01 सुबह
जयपुर की पत्रकार कॉलोनी में निर्माणाधीन बिल्डिंग में काम करते समय एक मजदूर 132 KV लाइन की चपेट में आ गया। इस भीषण हादसे के बाद मानसरोवर से विधानसभा तक बिजली ठप हो गई और प्रशासन पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं।

जयपुर | राजस्थान की राजधानी जयपुर में सोमवार सुबह एक दिल दहला देने वाला हादसा हुआ। मानसरोवर स्थित पत्रकार कॉलोनी के पास एक निर्माणाधीन चार मंजिला कॉम्प्लेक्स में काम कर रहा मजदूर हाई वोल्टेज लाइन की चपेट में आ गया।

चश्मदीदों के अनुसार, यह धमाका इतना भीषण था कि लगा जैसे एक साथ 10 गैस सिलेंडर फट गए हों। इस हादसे ने न केवल एक गरीब मजदूर की जिंदगी को दांव पर लगा लगा दिया, बल्कि जयपुर के एक बड़े हिस्से की बिजली व्यवस्था को ठप कर दिया।

घटना सोमवार सुबह करीब 10:49 बजे की है। बिहार के नालंदा निवासी मजदूर रामनाथ चौथी मंजिल पर काम कर रहा था। वह लिफ्ट के एक अटके हुए तार को खींचने की कोशिश कर रहा था, तभी यह अनहोनी हो गई।

तार खींचने के दौरान वह अचानक उछलकर ऊपर से गुजर रही सांगानेर-मानसरोवर हाईटेंशन लाइन के इंडक्शन जोन में चला गया। जैसे ही तार ने करंट क्षेत्र को छुआ, एक जोरदार शार्ट सर्किट हुआ और रामनाथ आग की लपटों में घिर गया।

धमाके की आवाज इतनी तेज थी कि नीचे खड़े राहगीर और अन्य मजदूर अपनी जान बचाने के लिए गलियों में भागने लगे। मौके पर मौजूद लोगों ने बताया कि दृश्य इतना डरावना था कि किसी की पास जाने की हिम्मत नहीं हुई।

ठेकेदार की संवेदनहीनता और लापरवाही

हादसे के बाद मौके पर भारी अफरा-तफरी मच गई। करीब 50 फीसदी से ज्यादा झुलस चुके रामनाथ को तड़पता छोड़कर ठेकेदार मौके से फरार हो गया। ठेकेदार की इस हरकत ने मानवता को शर्मसार कर दिया है।

बाद में अन्य साथी मजदूर हिम्मत जुटाकर रामनाथ को एसएमएस अस्पताल ले गए। हालांकि, कानूनी कार्रवाई के डर से उसे वहां भर्ती कराने के बजाय निजी अस्पतालों के चक्कर कटवाए गए। अंततः उसे मानसरोवर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया।

12 किलोमीटर के दायरे में छाया अंधेरा

इस शार्ट सर्किट का असर इतना व्यापक था कि जयपुर का एक बड़ा हिस्सा प्रभावित हुआ। पत्रकार कॉलोनी और मानसरोवर से लेकर राजस्थान विधानसभा तक करीब 12 किलोमीटर के दायरे में बिजली गुल हो गई।

डिस्कॉम के इंजीनियरों में हड़कंप मच गया क्योंकि उनके 11 और 33 केवी के फीडर सही काम कर रहे थे। काफी मशक्कत के बाद पता चला कि फॉल्ट 132 केवी की मुख्य लाइन में आया है, जिससे पूरा सिस्टम ट्रिप हो गया था।

नियमों की धज्जियां उड़ाता अवैध निर्माण

इस हादसे ने जयपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) और विद्युत प्रसारण निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। राइट ऑफ वे (ROW) के नियमों के अनुसार हाईटेंशन लाइन के केंद्र से 13.5 मीटर तक कोई निर्माण नहीं हो सकता।

सवाल यह उठता है कि जेडीए ने इस कॉम्प्लेक्स के निर्माण को मंजूरी कैसे दी? क्या अधिकारियों ने मौके पर जाकर जांच नहीं की थी? यह लापरवाही किसी की जान ले सकती थी और अंततः एक मजदूर इसका शिकार हो गया।

प्रशासनिक तंत्र की बड़ी विफलता

प्रसारण निगम के इंजीनियरों की पेट्रोलिंग पर भी सवाल उठ रहे हैं। नियमों के मुताबिक, हाईटेंशन लाइन के नीचे किसी भी प्रकार के निर्माण की निगरानी करना उनकी जिम्मेदारी है। क्या उन्हें इस चार मंजिला अवैध निर्माण की भनक नहीं लगी?

इतने बड़े हादसे और शहर की बिजली ठप होने के बावजूद विद्युत निगम के आला अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचे। अधिशासी अभियंता से लेकर मुख्य अभियंता तक की बेरुखी ने विभाग की संवेदनहीनता को उजागर कर दिया है।

जिम्मेदारों का पक्ष और आगामी कार्रवाई

विद्युत प्रसारण निगम के अधिशासी अभियंता हरभजन सिंह ने बताया कि इस निर्माण के लिए विभाग ने कोई अनुमति नहीं दी थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि जेडीए द्वारा निर्माण की अनुमति देना नियमों का उल्लंघन है।

निगम ने अब फरार ठेकेदार के खिलाफ थाने में मामला दर्ज कराया है। फिलहाल, घायल मजदूर रामनाथ की स्थिति नाजुक बनी हुई है। पुलिस ने घटनास्थल का मुआयना किया है और मामले की गहन जांच शुरू कर दी है।

सुरक्षा मानकों की अनदेखी पड़ रही भारी

जयपुर में यह कोई पहला मामला नहीं है जहां हाईटेंशन लाइन के नीचे अवैध निर्माण हुआ हो। शहर के कई इलाकों में ऐसी इमारतें खड़ी हो गई हैं जो सीधे तौर पर मौत को दावत दे रही हैं। प्रशासन की चुप्पी बड़े हादसों का इंतजार कर रही है।

विशेषज्ञों का कहना है कि हाई वोल्टेज लाइनों के पास काम करते समय विशेष सुरक्षा उपकरणों का होना अनिवार्य है। लेकिन यहाँ न तो मजदूर के पास सुरक्षा किट थी और न ही निर्माण स्थल पर कोई सुरक्षा घेरा बनाया गया था।

अब देखना यह होगा कि क्या जेडीए और बिजली विभाग इस घटना से सबक लेंगे? क्या उन अधिकारियों पर कार्रवाई होगी जिन्होंने इस खतरनाक निर्माण को मौन स्वीकृति दी? फिलहाल रामनाथ अस्पताल में अपनी जिंदगी की जंग लड़ रहा है।

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