जयपुर | जयपुर शहर का दायरा बढ़ाकर गांवों को नियोजित विकास से जोड़ने का दावा अब ग्रामीणों के लिए मुसीबत बन गया है। सीमा विस्तार के बाद जमीनी कामकाज और विकास की जिम्मेदारी को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
हाईकोर्ट की रोक से थमा विकास
राजस्थान हाईकोर्ट ने सीमा विस्तार के तहत शामिल नए गांवों में निर्माण गतिविधियों पर अंतरिम रोक लगा दी है। जेडीए के जल्दबाजी में लिए गए फैसलों के कारण अब ग्रामीणों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
जेडीए सीमा क्षेत्र की 17 तहसीलों का एक जैसा हाल बना हुआ है। मास्टरप्लान-2025 के हिसाब से भी शहर में सड़कों का काम अभी तक अधूरा पड़ा है।
शाहपुरा और चौमूं में बुरा हाल
60 किलोमीटर दूर जाना पड़ रहा जयपुर
शाहपुरा तहसील के 50 से अधिक गांव जेडीए में शामिल किए गए हैं। स्थानीय स्तर पर जोन कार्यालय न होने से लोगों को 60 किमी दूर जयपुर मुख्यालय जाना पड़ता है।
शाहपुरा तहसीलदार दाताराम गुर्जर ने बताया कि जेडीए में शामिल गांवों में जमीनों के अलाटमेंट और कन्वर्जन जैसे कार्य शुरू तो हुए हैं, लेकिन स्थानीय स्तर पर कोई शिविर नहीं लगाए गए हैं।
चौमूं में भी प्रशासनिक अस्पष्टता
चौमूं तहसील के करीब 44 से अधिक गांव जेडीए के दायरे में हैं। यहां के ग्रामीणों को भी अपने काम के लिए 30 से 40 किलोमीटर का सफर तय करना पड़ रहा है।
पूर्व सरपंच मांगीलाल के अनुसार, हाईकोर्ट के स्टे और प्रशासनिक अस्पष्टता के कारण कई विकास कार्य प्रभावित हुए हैं। अक्टूबर 2025 के सीमा विस्तार के बाद से ही स्थितियां चुनौतीपूर्ण बनी हुई हैं।
अटके हुए मुख्य कार्य
ग्राम पंचायत पड़ासोली सहित अन्य पंचायतों की कृषि व अन्य भूमि राजस्व रिकॉर्ड में जेडीए के नाम दर्ज हो चुकी है। इसके बावजूद स्थानीय स्तर पर सुविधाएं नदारद हैं।
- जमीनों के पट्टे और नामांतरण कई महीनों से नहीं खुल रहे हैं।
- ग्रामीण क्षेत्रों में कोई भी नया निर्माण कार्य नहीं किया जा सकता है।
- कृषि भूमि के उपयोग परिवर्तन (कन्वर्जन) के काम भी पूरी तरह अटक गए हैं।
- ग्राम पंचायतों में सड़क, सफाई और स्ट्रीट लाइट के काम ठप पड़े हैं।
जेडीए ने सीमा विस्तार के साथ अधिकारियों की तैनाती तो कर दी, लेकिन धरातल पर ग्रामीणों के जरूरी कामों का रास्ता निकालने वाला कोई नहीं है।
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