राजस्थान

जयपुर: JDA ने 5 धार्मिक स्थल तोड़े, मस्जिद पर विवाद

बलजीत सिंह शेखावत · 09 जून 2026, 05:31 शाम
जयपुर में सड़क चौड़ीकरण के लिए JDA ने नूरानी मस्जिद समेत 5 धार्मिक स्थल ढहाए। मुस्लिम फोरम ने इसे अवैध बताया।

जयपुर | राजधानी जयपुर में जयपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) ने एक बड़े अतिक्रमण विरोधी अभियान के तहत पांच धार्मिक स्थलों को ध्वस्त कर दिया है, जिससे बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। इस कार्रवाई में नंदपुरी अंडरपास स्थित नूरानी मस्जिद को भी ढहा दिया गया, जिसका मुस्लिम संगठनों ने कड़ा विरोध किया है।

जेडीए ने यह कार्रवाई मालवीय नगर से जगतपुरा रोड के चौड़ीकरण के लिए की। प्राधिकरण के अनुसार, यह सड़क मास्टर प्लान में 80 फीट चौड़ी है, लेकिन अतिक्रमण के कारण कई जगहों पर यह महज 25 फीट रह गई थी, जिससे दुर्घटनाएं हो रही थीं।

क्या है पूरा मामला?

जेडीए ने सड़क के रास्ते में आ रहे 5 धार्मिक स्थलों को हटाने के लिए नोटिस जारी किए थे। 8 जून को भारी पुलिस बल की तैनाती के बीच इन ढांचों को गिरा दिया गया।

इनमें नूरानी मस्जिद के अलावा दो मंदिर, एक सत्संग भवन और एक मजार शामिल थे। इस कार्रवाई के लिए प्रशासन ने एहतियात के तौर पर 18 घंटे के लिए इंटरनेट सेवाओं पर भी पाबंदी लगा दी थी।

मस्जिद कमेटी का दावा और जेडीए का तर्क

मस्जिद कमेटी और राजस्थान मुस्लिम फोरम ने इस कार्रवाई को अवैध बताया है। उनका दावा है कि मस्जिद 42 साल पुरानी थी और उनके पास जमीन की खरीद, लैंड यूज परिवर्तन और वक्फ रिकॉर्ड जैसे सभी वैध दस्तावेज मौजूद हैं।

कमेटी ने आरोप लगाया कि जेडीए ने वक्फ ट्रिब्यूनल के फैसले का इंतजार नहीं किया, जहां इस मामले की सुनवाई 10 जून को होनी थी। विधायक रफीक खान ने भी इस कार्रवाई को जानबूझकर किया गया बताया है।

मस्जिद सदर ने कहा, "जंगलराज नहीं होने देंगे, प्रदेश में न्याय के लिए जन आंदोलन करेंगे। आगामी जुम्मे पर काली पट्टी बांधकर सभी मस्जिदों में नमाज अदा करेंगे।"

वहीं, जेडीए का कहना है कि कार्रवाई पूरी तरह से नियमों के तहत और मास्टर प्लान के अनुसार की गई है। सभी संबंधित पक्षों को पहले ही नोटिस दे दिए गए थे।

विरोध प्रदर्शन की तैयारी

मुस्लिम समाज के संगठनों ने एक प्रेस वार्ता कर सरकार के रवैये पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने इस कार्रवाई के विरोध में जन आंदोलन करने और अगले शुक्रवार को काली पट्टी बांधकर नमाज अदा करने का ऐलान किया है।

दिलचस्प बात यह है कि इस अभियान में ध्वस्त किए गए दो मंदिरों और सत्संग भवन की समितियों की ओर से अब तक कोई विरोध दर्ज नहीं कराया गया है। हिंदू पक्ष की तरफ से इस मामले पर पूरी तरह शांति है।

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