जयपुर | कनकपुरा रेलवे स्टेशन पश्चिमी जयपुर के लिए एक महत्वपूर्ण प्रवेश द्वार है, लेकिन आज यह सुविधाओं के अभाव से जूझ रहा है। रेलवे द्वारा जयपुर के अन्य स्टेशनों को वर्ल्ड क्लास बनाने के दावों के बीच कनकपुरा स्टेशन उपेक्षा का शिकार बना हुआ है।
सुविधाओं के लिए तरसता कनकपुरा स्टेशन
प्लेटफॉर्म की सुविधाएं यहां पूरी तरह अधूरी हैं। यात्रियों के लिए न तो पर्याप्त शेड की व्यवस्था है और न ही स्टेशन पर लिफ्ट या एस्केलेटर की सुविधा उपलब्ध कराई गई है।प्लेटफॉर्म की ऊंचाई और लंबाई भी मानकों के अनुरूप नहीं है। इससे यात्रियों, विशेषकर बुजुर्गों और दिव्यांगों को ट्रेन में चढ़ने और उतरने में काफी कठिनाई का सामना करना पड़ता है।
200 ट्रेनों की आवाजाही, ठहराव सिर्फ 16 का
इस स्टेशन से रोजाना लगभग 200 ट्रेनें गुजरती हैं। हालांकि, इनमें से केवल 16 ट्रेनें ही यहां रुकती हैं, जिनमें से अधिकांश लोकल पैसेंजर ट्रेनें ही शामिल हैं। इन ट्रेनों का समय भी या तो सुबह है या शाम को दोपहर में कोई ट्रैन नहीं है। यात्रियों को यहाँ से दिल्ली की तरफ जाने वाली किसी ट्रैन की सुविधा नहीं है।
यात्रियों की मांग है कि इस स्टेशन को उपनगरीय या सैटेलाइट स्टेशन के रूप में विकसित किया जाए। साथ ही स्वर्णनगरी एक्सप्रेस जैसी महत्वपूर्ण ट्रेनों के ठहराव की मांग भी जोर पकड़ रही है।
यात्रियों को झेलनी पड़ रही है भारी परेशानी
कनकपुरा स्टेशन वैशाली नगर, खातीपुरा, सिरसी, भांकरोटा, चित्रकूट, हीरापुरा और पांच्यावाला, हाथोज , करधनी, गोविंदपुरा गोकुलपुरा एवं कालवाड़ रोड जैसे प्रमुख इलाकों के बीच स्थित है। यहां से जोधपुर, बीकानेर और अजमेर जाने वाले यात्रियों की संख्या काफी अधिक है।
सुविधाओं और ट्रेनों के ठहराव की कमी के कारण इन इलाकों के लोगों को 14 से 20 किलोमीटर दूर जयपुर जंक्शन जाना पड़ता है। इससे सामान्य और दैनिक यात्रियों को समय और पैसे दोनों की बर्बादी झेलनी पड़ती है।
अमृत भारत योजना से बाहर है स्टेशन
रेलवे प्रशासन जयपुर जंक्शन, गांधीनगर, खातीपुरा और सांगानेर जैसे स्टेशनों के कायाकल्प में जुटा है। लेकिन अमृत भारत योजना के तहत स्टेशनों की सूची में कनकपुरा का नाम शामिल नहीं है।
फुट ओवरब्रिज का दायरा भी यहां काफी सीमित है। रैंप की सुविधा न होने से वृद्ध और दिव्यांग यात्रियों को परेशानी होती है। ट्रैक पार करने के दौरान यहां कई बार हादसे भी हो चुके हैं।
कनेक्टिविटी और भविष्य की मांग
यह स्टेशन कुचामन, नावां, फुलेरा, सांभर और नागौर और जोधपुर के साथ अजमेर जैसे इलाकों से जुड़ा हुआ है। यात्रियों का कहना है कि यदि यहां सुविधाएं बढ़ाई जाएं तो जयपुर जंक्शन का यात्री भार काफी कम हो सकता है।
वर्तमान में प्लेटफॉर्म पर शेड पूरा नहीं होने के कारण धूप और बारिश के मौसम में यात्रियों को खुले में खड़े होकर ट्रेन का इंतजार करना पड़ता है, जो बेहद कष्टदायक है।