जयपुर | राजस्थान निकाय चुनाव 2026 के दूसरे चरण का मतदान 11 सितंबर को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो गया। इस दौरान राजधानी जयपुर के जगतपुरा इलाके में मतदाताओं के एक समूह ने अपने अनूठे विरोध प्रदर्शन से सभी राजनीतिक दलों को चौंका दिया।
जयपुर नगर निगम के वार्ड नंबर 66 में स्थित महात्मा गांधी स्कूल बूथ के ठीक बाहर, मतदाताओं ने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और कांग्रेस के पारंपरिक बूथ काउंटरों के समानांतर एक तीसरी टेबल स्थापित की, जिसे 'नोटा की टेबल' का नाम दिया गया।
क्या है 'नोटा की टेबल' का पूरा मामला?
आमतौर पर हर चुनाव में मतदान केंद्र से कुछ दूरी पर केवल मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के कार्यकर्ता ही अपनी टेबल लगाते हैं। इन काउंटरों का मुख्य उद्देश्य मतदाताओं को मतदाता सूची में उनके नाम, भाग संख्या और वार्ड नंबर खोजने में सहायता करना होता है।
लेकिन, जगतपुरा के महात्मा गांधी स्कूल पोलिंग स्टेशन पर नजारा बिल्कुल अलग था। यहां कांग्रेस और बीजेपी की टेबलों के साथ एक तीसरी टेबल भी सजी थी। इस 'नोटा की टेबल' पर बैठे कार्यकर्ताओं और स्थानीय नागरिकों ने किसी विशेष पार्टी के पक्ष में पर्चियां बांटने के बजाय, मतदान के लिए आने वाले प्रत्येक व्यक्ति से ईवीएम में 'नोटा' (None of the Above) का बटन दबाने की अपील की।
लोकतांत्रिक दायरे में विरोध का प्रदर्शन
इस टेबल पर बैनर और तख्तियां भी रखी गई थीं, जिन पर 'यूजीसी हटाओ' और 'नोटा को चुनें' जैसे नारे प्रमुखता से लिखे हुए थे। यहां मौजूद युवाओं और स्थानीय नागरिकों ने पूरी तरह से निष्पक्ष होकर मतदाताओं को उनके 'नोटा' के अधिकार के बारे में जागरूक किया और इसे लोकतांत्रिक विरोध का एक प्रभावी तरीका बताया।
क्यों नाराज हैं मतदाता? विरोध के पीछे की वजहें
इस अनोखे विरोध प्रदर्शन के पीछे स्थानीय मतदाताओं की कई गहरी नाराजगी और शिकायतें सामने आई हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि वे बीजेपी की कार्यशैली और फैसलों से पूरी तरह असंतुष्ट हैं, लेकिन वे विपक्षी दल कांग्रेस या किसी अन्य पार्टी को भी अपना समर्थन नहीं देना चाहते।
उनकी नाराजगी के मुख्य कारण इस प्रकार हैं:
- 'यूजीसी हटाओ' अभियान को समर्थन: स्थानीय युवाओं और प्रबुद्ध नागरिकों ने आरोप लगाया कि केंद्र और राज्य सरकार द्वारा शिक्षा और विश्वविद्यालय प्रणाली से जुड़े नियमों में किए गए हालिया बदलावों से छात्र और शिक्षक वर्ग తీవ్ర रूप से परेशान हैं। उन्होंने चुनाव को यूजीसी के खिलाफ अपनी आवाज उठाने के लिए एक मंच के रूप में इस्तेमाल किया।
- बीजेपी से नाराजगी और प्रत्याशी चयन पर गुस्सा: वार्ड 66 में बीजेपी कार्यकर्ताओं और स्थानीय जनता में पार्टी द्वारा चुने गए उम्मीदवार को लेकर भारी असंतोष था। लोगों का आरोप था कि क्षेत्र में विकास कार्य पूरी तरह से ठप पड़े हैं, लेकिन इसके बावजूद पार्टी ने जनता की राय के खिलाफ जाकर अपना प्रत्याशी मैदान में उतारा।
- अन्य दलों को समर्थन न देने का संकल्प: जब प्रदर्शनकारियों से पूछा गया कि वे किसी बागी या निर्दलीय उम्मीदवार को वोट क्यों नहीं दे रहे, तो उनका जवाब स्पष्ट था। उन्होंने कहा कि वे किसी भी अन्य राजनीतिक दल या अवसरवादी प्रत्याशी को मजबूत नहीं करना चाहते, इसलिए उनके लिए नोटा ही एकमात्र और सबसे बेहतर विकल्प है।
चुनाव पर क्या होगा असर?
जयपुर नगर निगम के कुल 150 वार्डों के लिए 11 सितंबर को हुए मतदान में रिकॉर्ड 63.55 प्रतिशत वोटिंग दर्ज की गई। इस चुनाव में कुल 723 प्रत्याशियों की किस्मत ईवीएम मशीनों में बंद हो चुकी है।
14 सितंबर को आएंगे नतीजे
शहर के कई वार्डों में इस तरह के 'नोटा अभियान' और बड़ी संख्या में निर्दलीय प्रत्याशियों की मौजूदगी ने मुख्य राजनीतिक दलों, खासकर बीजेपी और कांग्रेस, का चुनावी गणित पूरी तरह से बिगाड़ दिया है।
अब सभी की निगाहें 14 सितंबर 2026 पर टिकी हैं, जब सुबह 8 बजे से वोटों की गिनती शुरू होगी। नतीजों के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि जगतपुरा की इस 'नोटा टेबल' और जनता के इस आक्रामक रुख का चुनावी परिणामों पर कितना और क्या असर पड़ता है। इसके बाद 21 सितंबर को शहर के नए मेयर पद के लिए चुनाव संपन्न कराया जाएगा।
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