जयपुर | राजस्थान के स्पेशल ऑपरेशन्स ग्रुप (SOG) ने फर्जी दिव्यांगता प्रमाण पत्र के आधार पर सरकारी नौकरी पाने वाले आरोपी संदीप सैनी को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी जेवीवीएनएल में टेक्निकल हेल्पर के पद पर कार्यरत था।
मेडिकल टेस्ट में डमी अभ्यर्थी का खेल
जांच में खुलासा हुआ कि संदीप सैनी ने मेडिकल परीक्षण के दौरान अपनी जगह एक डमी अभ्यर्थी को भेजा था। 6 मार्च को एसएमएस अस्पताल, जयपुर के ईएनटी विभाग में यह धोखाधड़ी पकड़ी गई।
अस्पताल के नर्सिंग प्रभारी को आधार और जनाधार कार्ड की जांच के दौरान संदेह हुआ था। इसके बाद विभाग ने रिपोर्ट पुलिस को सौंपी, जिससे इस पूरे घोटाले का पर्दाफाश हुआ।
एसओजी ने पाया कि अशोक कुमार जाट नामक व्यक्ति संदीप की जगह रिवाइज दिव्यांगता परीक्षण करवाने पहुंचा था। अशोक को पुलिस ने मौके से ही गिरफ्तार कर लिया था।
10 हजार रुपये में हुआ था सौदा
पूछताछ में पता चला कि संदीप ने अशोक को डमी बनने के लिए 10 हजार रुपये एडवांस दिए थे। काम पूरा होने पर उसे और बड़ी रकम देने का वादा किया गया था।
संदीप सैनी ने झुंझुनूं के राजकीय बी.डी.के. अस्पताल से जारी अपने मूल सर्टिफिकेट में हेरफेर की थी। उसने शारीरिक अक्षमता को श्रवण दोष (Hearing Impairment) में बदलकर फर्जी सर्टिफिकेट तैयार किया।
"कार्मिक विभाग के नए नियमों के तहत पुन: परीक्षण के आदेश ने आरोपी की पोल खोल दी। एसओजी अब इस गिरोह की कड़ियों को जोड़ रही है।"
फरारी के बाद एसओजी की गिरफ्त में
एडीजी विशाल बंसल ने बताया कि आरोपी संदीप घटना के बाद से ही फरार चल रहा था। एसओजी की टीम लगातार उसकी निगरानी कर रही थी और उसे धर दबोचा गया।
आरोपी ने दिव्यांग कोटे का गलत लाभ उठाकर विभाग को लंबे समय तक गुमराह किया। फिलहाल पुलिस आरोपी से पूछताछ कर रही है ताकि विभागीय मिलीभगत का पता लगाया जा सके।
एसओजी अब इस गिरोह में शामिल अन्य संदिग्धों की गहनता से जांच कर रही है। पुलिस यह भी पता लगा रही है कि राज्य में ऐसे कितने और फर्जीवाड़े हुए हैं।
यह मामला सरकारी भर्ती परीक्षाओं में बढ़ते फर्जीवाड़े की ओर इशारा करता है। एसओजी की इस कार्रवाई से अन्य जालसाजों में भी डर व्याप्त है। मुख्य आरोपी फिलहाल पुलिस रिमांड पर है।
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