जयपुर | जयपुर स्थित नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क में बुधवार सुबह एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई। पार्क के एनक्लोजर में सफाई कर रही एक महिला मजदूर पर बाघ ने हमला कर दिया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। इस घटना के बाद पार्क प्रशासन में हड़कंप मच गया और मृतक के परिजनों ने भारी विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया।
कैसे हुआ यह दर्दनाक हादसा?
जानकारी के अनुसार, यह घटना बुधवार सुबह करीब 9 बजे की है। नाहरगढ़ जैविक उद्यान के एनक्लोजर नंबर 16 में 42 वर्षीय सुगना देवी सहित 7 महिला मजदूर सूखी घास काटने और नियमित सफाई के काम के लिए दाखिल हुई थीं।
एनक्लोजर के अंदर का खौफनाक मंजर
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जब महिलाएं अंदर काम कर रही थीं, तभी एक वनरक्षक ने कथित तौर पर एनक्लोजर के अंदर मौजूद मजदूरों को बाहर निकाले बिना ही कराल (पिंजरे का सुरक्षा गेट) का ताला खोल दिया।
ताला खुलते ही 'शिवाजी' नाम का बाघ सीधे बाहर आ गया और सफाई कर रही महिलाओं पर झपट पड़ा। बाघ को देखते ही महिलाओं में चीख-पुकार मच गई। पांच महिलाओं ने तुरंत बाहर की तरफ भागकर अपनी जान बचाई, जबकि एक महिला पास के पेड़ पर चढ़ गई।
सुगना देवी ने एनक्लोजर की लोहे की जाली पर चढ़कर बचने की कोशिश की, लेकिन बाघ ने उनका पैर खींचकर उन्हें नीचे गिरा दिया और हमला करके मार डाला।
सुरक्षा में बड़ी चूक और लापरवाही के आरोप
इस हादसे ने नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क के सुरक्षा तंत्र और मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। नियमों के अनुसार, जब तक किसी एनक्लोजर में कोई इंसानी गतिविधि चलती है, तब तक बाघ या अन्य हिंसक जानवरों के पिंजरे को नहीं खोला जाता है।
प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आ रही है कि ड्यूटी पर तैनात वनरक्षक ने यह सुनिश्चित किए बिना ही गेट खोल दिया कि सभी महिलाएं एनक्लोजर से बाहर आ चुकी हैं या नहीं। इसी एक बड़ी चूक ने सुगना देवी की जान ले ली।
परिजनों का प्रदर्शन और प्रमुख मांगें
मृतका सुगना देवी जयपुर के पास स्थित नांगल सुसावतान गांव की रहने वाली थीं। जैसे ही यह खबर गांव में पहुंची, वहां मातम छा गया। सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण, परिजन और स्थानीय जनप्रतिनिधि नाहरगढ़ पार्क के बाहर एकत्र हो गए और धरने पर बैठ गए।
प्रदर्शनकारियों ने शव का पोस्टमार्टम कराने से इनकार कर दिया और अपनी मांगों पर अड़ गए।
प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांगें:
- दोषी कर्मचारियों और वनरक्षक पर तत्काल FIR दर्ज कर कानूनी कार्रवाई हो।
- पीड़ित परिवार को 1 करोड़ रुपये की सहायता राशि मिले।
- मृतका के दोनों बच्चों को योग्यता के अनुसार सरकारी नौकरी दी जाए।
प्रशासन की प्रतिक्रिया और जांच के आदेश
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जयपुर पुलिस और वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे। प्रशासन परिजनों को समझाकर शव को पोस्टमार्टम के लिए भिजवाने का प्रयास कर रहा है।
वन विभाग के अधिकारियों ने वन अधिनियम के प्रावधानों के तहत 10 लाख रुपये मुआवजे और मृतका के दोनों बच्चों को संविदा पर रखने का आश्वासन दिया है। हालांकि, परिजन अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं। वन विभाग ने मामले में विभागीय जांच के आदेश भी जारी कर दिए हैं।