जयपुर | जयपुर की पारंपरिक नरसिंह लीला अब अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी पहचान बनाने के लिए तैयार है। डॉक्यूमेंट्री ‘द फेस ऑफ गॉड’ इस जीवंत सांस्कृतिक परंपरा को एक नए और गहरे नजरिए से दुनिया के सामने पेश करती है।
कलाकार की आंतरिक यात्रा और आस्था का संगम
फिल्म का मुख्य केंद्र केवल नरसिंह लीला का मंचन नहीं है। यह उस कलाकार की व्यक्तिगत यात्रा को दर्शाती है जो भगवान का रूप धारण करता है।
निर्देशक नंदिनी मित्तल ने इस फिल्म के जरिए यह समझने की कोशिश की है कि किरदार निभाते समय कलाकार के भीतर क्या बदलाव आते हैं।
फिल्म यह सवाल उठाती है कि जब मुखौटा ही पहचान बन जाए, तो उसके पीछे छिपे इंसान का क्या होता है?
यह डॉक्यूमेंट्री कलाकार के उस अनुभव का हिस्सा बनने की प्रक्रिया को बारीकी से दिखाती है।
जयपुर की सांस्कृतिक विरासत का चित्रण
यह डॉक्यूमेंट्री जयपुर की चारदीवारी और वहां की जीवंत सांस्कृतिक परंपराओं की पृष्ठभूमि में तैयार की गई है।
इसे केवल एक धार्मिक आयोजन के रूप में नहीं, बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही एक जीवित परंपरा के रूप में देखा गया है।
फिल्म में कलाकारों और परंपरा के जानकारों के साथ बातचीत के माध्यम से इसके अनुष्ठानों और आस्था को उजागर किया गया है।
तैयारी के चरणों से लेकर मंचन के क्षणों तक, फिल्म हर पहलू को गहराई से कवर करती है।
नंदिनी मित्तल का निर्देशन और विजन
विजुअल आर्टिस्ट नंदिनी मित्तल इस डॉक्यूमेंट्री के साथ निर्देशन के क्षेत्र में अपना पहला कदम रख रही हैं।
उनके लिए यह फिल्म जयपुर और उसकी सांस्कृतिक स्मृतियों से जुड़ा एक गहरा व्यक्तिगत अनुभव है।
नंदिनी के अनुसार, वह विश्वास और अनुभव के बीच की उस जगह को समझना चाहती थीं जहां व्यक्ति खुद को समर्पित कर देता है।
“आस्था मेरे लिए हमेशा एक सवाल रही है। आखिर वह क्या है जो हमें उस चीज पर विश्वास करने के लिए प्रेरित करती है, जिसे हम देख या पूरी तरह समझ नहीं सकते? इस फिल्म के दौरान मैं विश्वास और अनुभव के बीच की उस जगह को समझने की कोशिश कर रही थी, जहां एक व्यक्ति खुद को पूरी तरह किसी ऐसी चीज के हवाले कर देता है, जिसे वह पूरी तरह परिभाषित नहीं कर सकता। शायद वहीं से समर्पण की शुरुआत होती है।”
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर राजस्थानी कहानियों का प्रसार
फिल्म का निर्माण K10 टेल्स एंटरटेनमेंट की प्रोड्यूसर प्रज्ञा राठौड़ ने किया है।
प्रज्ञा राठौड़ के पास अमेरिका की बॉवरी हिल्स एंटरटेनमेंट के साथ काम करने का व्यापक अंतरराष्ट्रीय अनुभव है।
उनका उद्देश्य राजस्थान की कहानियों को अंतरराष्ट्रीय दर्शकों तक पहुंचाना है जिनमें सार्वभौमिक मानवीय भाव हों।
“ऐसी कहानियां जो अपनी मिट्टी से गहराई से जुड़ी हों, लेकिन जिनमें एक सार्वभौमिक मानवीय भाव हो, वे दुनिया के किसी भी दर्शक से जुड़ सकती हैं। ‘द फेस ऑफ गॉड’ के जरिए हमारा उद्देश्य जयपुर की इस परंपरा को समझाना भर नहीं, बल्कि दर्शकों को इसके भीतर ले जाना है, ताकि वे इसके पीछे की मानवीय कहानी को महसूस कर सकें।”
स्थानीय प्रतिभाओं और संगीत का समावेश
फिल्म का निर्माण बड़े स्तर पर राजस्थान में ही किया गया है, जिसमें स्थानीय कलाकारों को प्राथमिकता दी गई है।
रिसर्च और शूटिंग से लेकर क्रिएटिव काम तक, प्रोजेक्ट में बड़ी संख्या में राजस्थान की प्रतिभाओं को जोड़ा गया है।
बॉलीवुड म्यूजिक प्रोड्यूसर ऐकार्थ पुरोहित ने फिल्म का संगीत तैयार किया है जो लोक परंपराओं से प्रेरित है।
इसमें मांगणियार कलाकार हनीफा खान, जाकिर खान और नियाज़ की आवाज़ ने स्थानीय परिवेश को गहराई दी है।
तकनीकी टीम और भविष्य की योजनाएं
फिल्म की सिनेमैटोग्राफी राजेंद्र कुमावत और नकुल चौहान ने की है।
राज मिहीत राठौड़ ने फिल्म के विभिन्न रचनात्मक और तकनीकी पहलुओं को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
फिल्म के अंतिम तकनीकी काम के लिए इसे मुंबई ले जाया जाएगा ताकि गुणवत्ता सुनिश्चित की जा सके।
‘द फेस ऑफ गॉड’ अब अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोहों और डॉक्यूमेंट्री प्लेटफॉर्म्स पर भेजे जाने के लिए तैयार है।
इसे भारत और विदेशों के सांस्कृतिक व शैक्षणिक संस्थानों में भी प्रदर्शित करने की योजना बनाई गई है।
फिल्म का लक्ष्य लोक परंपराओं, आस्था और पहचान जैसे विषयों पर वैश्विक संवाद स्थापित करना है।
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