राजस्थान

पोषण पखवाड़ा: स्वस्थ बचपन की शुरुआत: जयपुर में अष्टम राष्ट्रीय पोषण पखवाड़ा का आगाज: स्वस्थ भारत के लिए केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी की बड़ी पहल

जोगेन्द्र सिंह शेखावत · 10 अप्रैल 2026, 09:22 सुबह
जयपुर में अष्टम राष्ट्रीय पोषण पखवाड़ा का भव्य शुभारंभ हुआ। केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने इसकी शुरुआत की, जिसमें आंगनबाड़ी केंद्रों पर पोषण रैलियों और स्वास्थ्य शिविरों के जरिए जागरूकता फैलाई जा रही है।

जयपुर | राजस्थान की राजधानी जयपुर में स्वास्थ्य और पोषण की एक नई लहर शुरू हो गई है। केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती अन्नपूर्णा देवी ने गुरुवार को अष्टम राष्ट्रीय पोषण पखवाड़ा का शानदार शुभारंभ किया। यह अभियान बच्चों और महिलाओं के बेहतर भविष्य की नींव रखने के लिए डिजाइन किया गया है।

इस पखवाड़े का मुख्य उद्देश्य समुदाय के हर वर्ग को सही खान-पान और स्वस्थ जीवनशैली के प्रति जागरूक करना है। पहले ही दिन जयपुर के विभिन्न आंगनबाड़ी केंद्रों पर भारी उत्साह देखा गया। यहां पोषण रैलियों का आयोजन किया गया, जिसमें स्थानीय लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।

रैली के दौरान नारों और लेखन के माध्यम से पोषण जागरूकता फैलाई गई। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, सहायिकाओं और आशा सहयोगिनियों ने बच्चों के साथ मिलकर इस संदेश को घर-घर पहुंचाया। 'पोषण की कहानी दादी नानी की जुबानी' जैसे सत्रों ने बच्चों का मन मोह लिया।

स्वास्थ्य शिविर और गर्भवती महिलाओं की देखभाल

आंगनबाड़ी केंद्रों पर केवल रैलियां ही नहीं, बल्कि विशेष स्वास्थ्य शिविर भी लगाए गए। यहां गर्भवती महिलाओं और शिशुओं के स्वास्थ्य की गहन जांच की गई। संतुलित आहार और आईएफए की गोलियों के महत्व पर विशेषज्ञों ने विस्तार से चर्चा की।

शिविरों में हाई रिस्क गर्भावस्था की पहचान करने और वजन वृद्धि की निगरानी करने पर जोर दिया गया। प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (PMMVY) के लाभों के बारे में भी महिलाओं को शिक्षित किया गया। निदेशक मालावत ने अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से केंद्रों का दौरा करने के निर्देश दिए हैं।

जंक फूड को कहें 'ना' और पोषण को 'हां'

अभियान के दूसरे दिन शुक्रवार को पोषण व्यंजनों की एक बड़ी प्रदर्शनी लगाई जाएगी। इसमें स्थानीय पौष्टिक भोजन को बढ़ावा देने के लिए खाना बनाने की प्रतियोगिताएं होंगी। इसका उद्देश्य माताओं को स्वादिष्ट और सेहतमंद विकल्प सिखाना है।

विशेषज्ञ इस दौरान जंक और पैक्ड फूड से होने वाले गंभीर नुकसानों के बारे में जानकारी देंगे। बच्चों को प्राकृतिक भोजन की ओर प्रेरित करने के लिए यह एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। शनिवार को बच्चों के विकासात्मक माइलस्टोन की पहचान का अभियान चलेगा।

बच्चों के स्वास्थ्य और टीकाकरण पर जोर

13 अप्रैल सोमवार को वीएचएसएन (VHSN) डे का आयोजन किया जाएगा। इस दिन लाभार्थियों के स्वास्थ्य की जांच ममता कार्ड के अनुसार की जाएगी। साथ ही, बच्चों का समय पर टीकाकरण सुनिश्चित करने के लिए विशेष परामर्श सत्र आयोजित होंगे।

अगले दिन 14 अप्रैल को आंगनबाड़ी केंद्रों पर भाषा और कहानी सत्रों का आयोजन होगा। इसमें खेल-आधारित शिक्षा पर चर्चा की जाएगी ताकि बच्चों का मानसिक विकास सही दिशा में हो सके। 15 अप्रैल को पुरुष अभिभावकों के लिए विशेष खिलौना कार्यशाला होगी।

डिजिटल युग के खतरे और 'नो स्क्रीन आवर'

इस बार पोषण पखवाड़ा में आधुनिक जीवनशैली की चुनौतियों को भी शामिल किया गया है। 16 से 18 अप्रैल तक मोबाइल और टीवी स्क्रीन के खतरों पर चर्चा की जाएगी। बच्चों के शारीरिक विकास के लिए योग और व्यायाम के सत्र आयोजित किए जाएंगे।

शनिवार 18 अप्रैल को "नो स्क्रीन आवर" या "फैमिली प्ले टाइम" का आयोजन होगा। इसका मकसद बच्चों को डिजिटल दुनिया से निकालकर बाहरी खेलों और योग की ओर मोड़ना है। सुरक्षित स्क्रीन सीमा और स्वस्थ डिजिटल आदतों पर वीडियो संदेश भी प्रसारित किए जाएंगे।

सामाजिक भागीदारी और समापन समारोह

20 अप्रैल को एमओडब्ल्यूसीडी के 'पंखुड़ी पोर्टल' के बारे में जागरूकता फैलाई जाएगी। इसके बाद 21 अप्रैल को एक भव्य 'दान अभियान' चलेगा। इसमें भामाशाहों और कॉर्पोरेट जगत से आंगनबाड़ियों के लिए खिलौने और स्टेशनरी दान करने की अपील की जाएगी।

22 अप्रैल को सोशल मीडिया अभियान के जरिए पोषण का संदेश पूरी दुनिया में फैलाया जाएगा। अंत में 23 अप्रैल को स्थानीय प्रभावशाली लोगों और खिलाड़ियों की मौजूदगी में समापन समारोह होगा। इस दिन क्विज और पोस्टर प्रतियोगिताओं के विजेताओं को सम्मानित किया जाएगा।

← पूरा आर्टिकल पढ़ें (Full Version)