राजनीति

जयपुर: ओवैसी-बेनीवाल का गठबंधन, सरकार पर तीखा हमला

बलजीत सिंह शेखावत · 07 सितम्बर 2026, 02:26 दोपहर
जयपुर में AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी और RLP सुप्रीमो हनुमान बेनीवाल ने नगर निगम चुनाव के लिए गठबंधन की घोषणा की। दोनों ने जनसभा में सड़कों की बदहाली और सरकारी दावों पर सवाल उठाए।

जयपुर | राजस्थान में जारी नगर निगम चुनाव 2026 की सरगर्मियों के बीच राजधानी जयपुर में एक महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम हुआ। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के राष्ट्रीय अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी और राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) के सुप्रीमो हनुमान बेनीवाल एक मंच पर साथ आए।

दोनों नेताओं ने शास्त्री नगर के भट्टा बस्ती में रविवार को आयोजित एक जनसभा में आगामी नगर निगम चुनावों के लिए अपने नए गठबंधन का औपचारिक शंखनाद किया।

बुनियादी सुविधाओं पर सरकार को घेरा

जनसभा को संबोधित करते हुए ओवैसी ने जयपुर की जमीनी समस्याओं पर सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि जब वे जयपुर के ऐतिहासिक परकोटे इलाके में दाखिल हुए, तो उन्हें यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल इस जगह पर टूटी सड़कें और कचरे के ढेर दिखाई दिए।

ओवैसी ने स्पष्ट किया कि जयपुर की जनता लग्जरी सुविधाएं नहीं, बल्कि चलने योग्य सड़कें, साफ पानी, सीवरेज और बेहतर ड्रेनेज जैसी बुनियादी सुविधाएं मांग रही है।

CAG रिपोर्ट से खोली पोल

असदुद्दीन ओवैसी ने कैग (CAG) की रिपोर्ट का हवाला देते हुए नगर निगम प्रशासन पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सरकारी आंकड़ों के अनुसार, राजस्थान के शहरों में कुल कचरे का केवल 11 से 25 प्रतिशत हिस्सा ही सही ढंग से निस्तारित हो पाता है।

उन्होंने सवाल किया कि जब जनता ईमानदारी से टैक्स चुका रही है, तो विकास फंड का पैसा कहां जा रहा है? ओवैसी ने आरोप लगाया कि गरीब और अल्पसंख्यक बहुल इलाकों में सीवरेज-ड्रेनेज व्यवस्था ठप है।

शिक्षा और स्वास्थ्य पर भी हमला

ओवैसी ने अपने भाषण में शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी सरकार को घेरा। उन्होंने हाल ही में एक सरकारी स्कूल की दीवार गिरने की घटना का जिक्र करते हुए बच्चों की सुरक्षा पर सवाल उठाए।

उन्होंने दावा किया कि प्रदेश में हजारों स्कूल भवनों की हालत जर्जर है और उन्हें तत्काल मरम्मत की जरूरत है।

अस्पतालों और रोजगार पर सवाल

इसके अलावा, ओवैसी ने सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों व दवाइयों की कमी और महिला सुरक्षा के आंकड़ों का हवाला देकर सरकार की आलोचना की।

उन्होंने कहा कि सरकार केवल कागजों पर निवेश के आंकड़े दिखाकर अपनी पीठ थपथपा रही है, जबकि धरातल पर न तो नौकरियां पैदा हो रही हैं और न ही परियोजनाएं शुरू हो पा रही हैं।

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