जयपुर | राजधानी जयपुर में बढ़ते यात्री भार के दबाव को कम करने के लिए उत्तर पश्चिम रेलवे ने एक महात्वाकांक्षी विजन प्लान तैयार किया है। इस योजना के तहत रेलवे अब सिंगल जंक्शन मॉडल को छोड़कर मल्टी-स्टेशन नेटवर्क की ओर तेजी से कदम बढ़ा रहा है। आगामी दो से तीन वर्षों में जयपुर के प्रमुख स्टेशनों की पैसेंजर हैंडलिंग क्षमता और यात्री सुविधाएं मौजूदा स्तर से पांच गुना तक बढ़ाई जाएंगी।
रेलवे का नया मेगा विजन प्लान: जयपुर रेलवे का कायाकल्प 5 स्टेशनों पर मेगा प्रोजेक्ट्स
जयपुर जंक्शन का भार कम करने के लिए रेलवे बना रहा है मल्टी-स्टेशन नेटवर्क, 2000 करोड़ का है प्लान।
HIGHLIGHTS
- भट्टों की गली बनेगा 800 करोड़ का मेगा कोचिंग टर्मिनल।
- खातीपुरा को टर्मिनल स्टेशन के रूप में किया जा रहा विकसित।
- जयपुर और गांधीनगर स्टेशनों पर खर्च होंगे 1000 करोड़ रुपये।
- अगले 3 वर्षों में पैसेंजर क्षमता 5 गुना तक बढ़ जाएगी।
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भट्टों की गली: 800 करोड़ का मेगा कोचिंग टर्मिनल
जयपुर-सीकर रेलमार्ग पर स्थित भट्टों की गली स्टेशन को लगभग 800 करोड़ रुपए की भारी-भरकम लागत से एक मेगा कोचिंग टर्मिनल के रूप में विकसित किया जाएगा। यहां ट्रेनों के मेंटेनेंस के लिए अत्याधुनिक पिट लाइन, वॉशिंग लाइन और स्टेबलिंग लाइनें तैयार की जाएंगी, जिससे ट्रेनों का संचालन सुगम होगा। इस टर्मिनल के बनने से जयपुर-सीकर रेललाइन का नेटवर्क भी मजबूत होगा और मुख्य जंक्शन पर ट्रेनों का दबाव काफी कम हो जाएगा।
खातीपुरा और कनकपुरा स्टेशन का विस्तार
खातीपुरा स्टेशन, जो प्रदेश का पहला सैटेलाइट स्टेशन था, अब 205 करोड़ रुपए की लागत से एक पूर्ण टर्मिनल स्टेशन के रूप में विकसित किया जा रहा है। यहां वंदे भारत जैसी आधुनिक ट्रेनों के मेंटेनेंस की सुविधा भी बनाई जा रही है, ताकि इन ट्रेनों को संचालन के लिए मुख्य जंक्शन न भेजना पड़े। इसके साथ ही जयपुर-अजमेर मार्ग पर स्थित कनकपुरा स्टेशन के विस्तार की भी योजना है, जिसके लिए कंटेनर डिपो को शिफ्ट किया जा सकता है।
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वर्ल्ड क्लास बनेंगे जयपुर और गांधीनगर जंक्शन
जयपुर जंक्शन और गांधीनगर स्टेशन को लगभग 1,000 करोड़ रुपए की लागत से विश्व स्तरीय मानकों के अनुरूप पुनर्विकसित किया जा रहा है। गांधीनगर स्टेशन का निर्माण कार्य लगभग पूरा होने वाला है, जबकि जयपुर जंक्शन का कायाकल्प भी करीब 70 प्रतिशत तक पूरा हो चुका है। इन स्टेशनों पर यात्रियों को एयरपोर्ट जैसी सुविधाएं मिलेंगी, जिनमें आधुनिक वेटिंग लाउंज, शॉपिंग कॉम्प्लेक्स और बेहतर पार्किंग व्यवस्था शामिल होगी।
सांगानेर और ढेहर के बालाजी का आधुनिक स्वरूप
सांगानेर स्टेशन को 107 करोड़ रुपए की लागत से हेरिटेज लुक देते हुए एक अत्याधुनिक स्टेशन में बदला जा रहा है, जिसका काम अगले दो वर्षों में पूरा होगा। ढेहर के बालाजी स्टेशन पर भी सेकेंड एंट्री गेट विकसित किया जा रहा है, जिसमें नया बुकिंग कार्यालय और वेटिंग एरिया जैसी सुविधाएं जोड़ी जाएंगी। ये सभी उपनगरीय स्टेशन भविष्य में जयपुर के रेल यातायात के मुख्य आधार बनेंगे और यात्रियों के समय की बचत करेंगे।
"उपनगरीय स्टेशनों को टर्मिनल के रूप में विकसित करने से मुख्य जंक्शन पर दबाव कम होगा और पैसेंजर लोड क्षमता दो से पांच गुना बढ़ जाएगी।" - अमित सुदर्शन, सीपीआरओ
रेलवे के इस मेगा विस्तार प्लान से न केवल जयपुर के भीतर यातायात सुगम होगा, बल्कि राजस्थान की अन्य शहरों से कनेक्टिविटी भी काफी बेहतर हो जाएगी। मेंटेनेंस सुविधाओं के विस्तार से नई ट्रेनें शुरू करने में आसानी होगी, जिससे पर्यटन और स्थानीय व्यापार को भी एक नई दिशा और गति मिलेगी। अंततः यह प्रोजेक्ट जयपुर को उत्तर भारत के एक प्रमुख और आधुनिक रेलवे हब के रूप में पूरी दुनिया के सामने मजबूती से स्थापित करेगा।
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