जयपुर | शनिवार को राजस्व मंडल स्तर पर आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत ने न्याय की एक नई मिसाल पेश की है। सानुज कुलश्रेष्ठ और श्रीमती कमला अलारिया की बेंच ने ऐतिहासिक कार्य करते हुए कुल 279 में से 275 मामलों का निपटारा किया।
99 प्रतिशत सफलता और पुराने विवादों का अंत
इस लोक अदालत की सबसे बड़ी उपलब्धि 99 प्रतिशत प्रकरणों का निपटारा रही। इसमें दशकों से लंबित पड़े मामलों को आपसी सहमति और समझाइश के जरिए सुलझाया गया, जिससे अदालतों का बोझ भी काफी कम हुआ है।
पाली जिले का गीता देवी बनाम तारा देवी का 20 साल पुराना मामला सुलझना चर्चा का विषय रहा। इसके साथ ही करौली का 12 साल पुराना गोपाल बनाम नरेन्द्रसिंह मामला भी आपसी बातचीत के बाद हमेशा के लिए खत्म हो गया।
खुशी और न्याय का सुखद संगम
निबंधक महावीर प्रसाद और अतिरिक्त निबंधक हेमंत स्वरूप माथुर ने बताया कि इन फैसलों से पक्षकारों के बीच लंबे समय से चली आ रही कड़वाहट दूर हुई है। सालों से न्याय की आस लगाए लोगों के चेहरे खिल उठे।
"न्याय की इस प्रक्रिया में आपसी समझाइश सबसे बड़ा हथियार साबित हुई, जिससे वर्षों पुराने विवाद मिनटों में सुलझ गए और लोगों को मानसिक शांति मिली।"
इस पहल ने साबित कर दिया कि लोक अदालतें त्वरित न्याय के लिए वरदान हैं। पक्षकारों ने राजस्व मंडल की इस सराहनीय पहल का तहेदिल से आभार व्यक्त किया और खुशी-खुशी अपने घरों के लिए रवाना हुए।
लोक अदालत में कई वरिष्ठ अधिवक्ताओं, विधि छात्रों और विभागीय कार्मिकों ने अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस सामूहिक प्रयास से आमजन को सुलभ और सस्ता न्याय सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है।
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