जयपुर | राजस्थान की राजधानी जयपुर में आवासन मण्डल ने एक बड़ी कार्रवाई की है। टोंक रोड स्थित करीब 42 बीघा बेशकीमती जमीन को अवैध अतिक्रमण से मुक्त कराया गया है। यह कार्रवाई उच्च न्यायालय के आदेशों के बाद की गई।
जयपुर में बड़ी कार्रवाई: जयपुर: 42 बीघा बेशकीमती जमीन से हटा कब्जा
राजस्थान आवासन मण्डल ने टोंक रोड पर 42 बीघा जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराया।
HIGHLIGHTS
- जयपुर के टोंक रोड पर 42 बीघा 10 बिस्वा जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराया गया।
- माननीय उच्च न्यायालय के आदेशों के बाद आवासन मण्डल ने यह बड़ी कार्रवाई की।
- जवाहर गृह निर्माण समिति द्वारा बसायी गई अवैध 'श्रीराम कॉलोनी' पर चला पीला पंजा।
- मण्डल सचिव गोपाल सिंह शेखावत के नेतृत्व में पुलिस प्रशासन के सहयोग से हुई कार्रवाई।
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करोड़ों की जमीन पर था अवैध कब्जा
मण्डल सचिव गोपाल सिंह शेखावत के नेतृत्व में पुलिस बल के साथ टीम चैनपुरा पहुंची। यहां लंबे समय से भू-माफियाओं ने कब्जा जमा रखा था। प्रशासन ने मौके पर पहुंचकर अवैध निर्माण ध्वस्त किए और कब्जा लिया।इस कार्रवाई के दौरान जमीन पर मण्डल की संपत्ति के बोर्ड लगा दिए गए हैं। अधिकारियों के अनुसार, चैनपुरा और दुर्गापुरा की यह जमीन मण्डल की अवाप्तशुदा संपत्ति थी। विभाग ने इसके लिए लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी।
कानूनी प्रक्रिया और अदालती फैसला
जमीन की अवाप्ति अधिसूचना 1990 में जारी हुई थी। 1991 में सरकार ने इसका अवार्ड भी जारी किया था। इसके बावजूद कुछ खातेदारों ने इसे जवाहर गृह निर्माण सहकारी समिति को बेच दिया था।समिति ने यहां 'श्रीराम कॉलोनी' के नाम से अवैध पट्टे जारी किए थे। उच्च न्यायालय ने अब इन सभी इकरारनामों को शून्य घोषित कर दिया है। कोर्ट ने मण्डल की अवाप्तशुदा भूमि पर निजी कब्जा अवैध माना।
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"न्यायालय के आदेशों की पालना में यह कार्रवाई की गई है। मण्डल की संपत्ति पर किसी भी तरह का अवैध कब्जा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और भविष्य में भी ऐसी कार्रवाई जारी रहेगी।" - गोपाल सिंह शेखावत, सचिव
अधिकारियों की मौजूदगी में हुई कार्रवाई
कार्रवाई के दौरान मुख्य अभियन्ता अमित अग्रवाल और मुख्य सम्पदा प्रबन्धक अशोक कुमार सहित कई अधिकारी मौजूद रहे। पुलिस के सहयोग से पूरी प्रक्रिया शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई और अतिक्रमण हटाया गया।इस कार्रवाई से भू-माफियाओं में हड़कंप मच गया है। टोंक रोड पर मण्डल की इस वापसी से शहर के विकास को गति मिलेगी। अब इस भूमि का उपयोग जनहित की योजनाओं के लिए किया जाएगा।
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