राजस्थान

मेट गाला में जयपुर राजघराने का जलवा: मेट गाला 2026: जयपुर के महाराजा और राजकुमारी का शाही अंदाज

thinQ360 · 05 मई 2026, 06:48 शाम
जयपुर के महाराजा पद्मनाभ सिंह और गौरवी कुमारी ने न्यूयॉर्क में बिखेरा राजस्थानी संस्कृति का जादू।

जयपुर | न्यूयॉर्क के मेट्रोपॉलिटन म्यूजियम ऑफ आर्ट में आयोजित 'मेट गाला 2026' के रेड कार्पेट पर जयपुर के पूर्व राजघराने ने अपनी शाही उपस्थिति से पूरी दुनिया को मंत्रमुग्ध कर दिया। महाराजा सवाई पद्मनाभ सिंह और राजकुमारी गौरवी कुमारी ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर राजस्थान की समृद्ध संस्कृति का प्रदर्शन किया।

जब दुनिया के सबसे बड़े फैशन इवेंट 'मेट गाला' की बात आती है, तो अक्सर जेहन में अजीबोगरीब लिबास आते हैं। लेकिन 4 मई 2026 की रात न्यूयॉर्क में कुछ ऐसा हुआ जिसकी कल्पना किसी ने नहीं की थी।

जयपुर की राजकुमारी गौरवी कुमारी और महाराजा सवाई पद्मनाभ सिंह ने जब अपनी एंट्री की, तो पेरिस से लेकर मिलान तक के फैशन एक्सपर्ट्स उन्हें देखते रह गए। यह राजस्थान की कला और इतिहास का एक भव्य प्रदर्शन था।

महारानी गायत्री देवी की विरासत और गौरवी का अंदाज

राजकुमारी गौरवी कुमारी ने इस खास रात के लिए अपनी दादी और दुनिया की सबसे खूबसूरत महिलाओं में शुमार रहीं महारानी गायत्री देवी की एक शानदार विंटेज शिफॉन साड़ी को अपनी मुख्य पोशाक के रूप में चुना।

मशहूर डिजाइनर प्रबल गुरुंग ने इस गुलाबी रंग की विंटेज शिफॉन साड़ी को एक आधुनिक गाउन में रीवर्क किया। इसमें बहुत ही बारीक सेक्विन वर्क किया गया था, जो आधुनिकता और परंपरा का मेल था।

गौरवी ने अपने लुक को पूरा करने के लिए मोतियों, कीमती माणिक और अनकट डायमंड्स का इस्तेमाल किया। शिफॉन साड़ी और मोतियों का यह मेल महारानी गायत्री देवी की सिग्नेचर स्टाइल को एक मौन श्रद्धांजलि थी।

जोहरी बाजार की चमक उनके गहनों में साफ झलक रही थी। इस लुक ने न केवल पारंपरिक गौरव को बनाए रखा, बल्कि अंतरराष्ट्रीय फैशन जगत में भारतीय कपड़ों की एक नई परिभाषा भी पेश की।

600 घंटों की मेहनत से तैयार हुआ 'फूलगर कोट'

महाराजा सवाई पद्मनाभ सिंह ने साबित कर दिया कि राजस्थानी शिल्प कला का मुकाबला दुनिया का कोई भी ब्रांड नहीं कर सकता। उनका पहनावा पूरी तरह से हाथ से बनी कारीगरी का एक बेजोड़ नमूना था।

महाराजा ने प्रबल गुरुंग द्वारा डिजाइन किया गया 'फूलगर कोट' पहना था। यह कोट मिडनाइट ब्लू मखमल पर आधारित था, जिसे तैयार करने में जयपुर के कुशल कारीगरों को लगभग 600 घंटे का समय लगा।

इस कोट पर जरदोजी, आरी, रेशम और दबका की अत्यंत बारीक कढ़ाई की गई थी। यह कढ़ाई राजस्थान की समृद्ध हस्तशिल्प परंपरा को दर्शाती है, जो आज भी दुनिया भर में अपनी विशिष्ट पहचान रखती है।

महाराजा के आउटफिट में 'सूर्य' का एक मिरर मोटिफ भी शामिल था। यह मोटिफ जयपुर के सिटी पैलेस स्थित 'श्री निवास' से प्रेरित है और उनके गौरवशाली सूर्यवंशी वंश को गर्व से प्रदर्शित करता है।

ग्लोबल स्टेज पर राजस्थान की कला का डंका

इस साल के मेट गाला का ड्रेस कोड 'Fashion Is Art' रखा गया था। जयपुर के इन शाही भाई-बहनों ने अपनी वेशभूषा के जरिए यह स्पष्ट कर दिया कि राजस्थान की शिल्प कला वास्तव में जीवंत कला है।

"राजस्थान की सदियों पुरानी शिल्प कला और टेक्सटाइल को वैश्विक मंच पर इतनी सराहना मिलना गर्व की बात है। यह हमारी समृद्ध विरासत की जीत है।"

प्रबल गुरुंग और राजघराने के इस समन्वय ने ग्लोबल स्टेज पर राजस्थानी टेक्सटाइल और ज्वेलरी को एक नई ऊँचाई दी है। जौहरी बाजार के जड़ाऊ हारों ने महाराजा के लुक को पूरी तरह मुकम्मल बनाया।

मेट गाला 2026 में जयपुर राजघराने की यह उपस्थिति केवल फैशन के बारे में नहीं थी, बल्कि यह राजस्थान की कलात्मक विरासत का उत्सव था। इसने वैश्विक फैशन जगत में भारत की अमिट छाप छोड़ी है।

*Edit with Google AI Studio

← पूरा आर्टिकल पढ़ें (Full Version)