राजस्थान

जयपुर स्कूल टाइमिंग विवाद: जयपुर: 12 बजे की छुट्टी का आदेश, फिर भी 2 बजे तक स्कूल

मानवेन्द्र जैतावत · 28 अप्रैल 2026, 10:27 दोपहर
जयपुर में भीषण गर्मी के बीच स्कूलों द्वारा प्रशासनिक आदेशों की अनदेखी, बच्चे परेशान।

जयपुर | राजस्थान की राजधानी जयपुर में भीषण गर्मी और लू के प्रकोप को देखते हुए जिला प्रशासन ने स्कूलों के समय में बदलाव के कड़े निर्देश दिए थे, लेकिन कई निजी स्कूल इन आदेशों को ठेंगा दिखा रहे हैं। छोटे बच्चे दोपहर की चिलचिलाती धूप में घर लौटने को मजबूर हैं।

प्रशासनिक आदेश के अनुसार, कक्षा 1 से 8 तक के विद्यार्थियों के लिए स्कूल का समय सुबह 7:30 से दोपहर 12 बजे तक निर्धारित किया गया था। यह आदेश सरकारी और निजी दोनों प्रकार के शिक्षण संस्थानों पर समान रूप से लागू होता है ताकि बच्चों को लू से बचाया जा सके।

इसके बावजूद, शहर के कई इलाकों से शिकायतें आ रही हैं कि स्कूल प्रबंधन बच्चों को दोपहर 2 बजे तक कक्षाओं में बिठाए रख रहे हैं। अभिभावकों का आरोप है कि स्कूल प्रशासन अपनी मनमानी कर रहा है और बच्चों के स्वास्थ्य की पूरी तरह अनदेखी की जा रही है।

प्रशासनिक आदेश और जमीनी हकीकत

जयपुर जिला कलेक्टर ने स्पष्ट किया था कि प्री-प्राइमरी से आठवीं कक्षा तक के बच्चों की छुट्टी अनिवार्य रूप से 12 बजे तक कर दी जाए। नियमों का उल्लंघन करने वाले स्कूलों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई थी, लेकिन जमीनी स्तर पर इसका असर कम दिख रहा है।

संयुक्त अभिभावक संघ के अध्यक्ष अरविंद अग्रवाल ने इस स्थिति पर गंभीर चिंता व्यक्त की है और प्रशासन से तुरंत हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने कहा कि जब तापमान 43 डिग्री के पार पहुंच चुका है, तब बच्चों को दोपहर की धूप में बाहर रखना किसी बड़े खतरे को दावत देना है।

'प्रशासन के दिए आदेशों की अनदेखी सीधे तौर पर बच्चों की सेहत के साथ खिलवाड़ है। स्कूलों को मनमानी की छूट नहीं मिलनी चाहिए और नियमों का पालन सुनिश्चित होना चाहिए।' - अरविंद अग्रवाल

शहर के कई प्रतिष्ठित स्कूलों में भी समय का पालन नहीं हो रहा है, जिससे अभिभावकों में भारी आक्रोश व्याप्त है। वे सवाल उठा रहे हैं कि प्रशासन के डंडे का डर स्कूलों को क्यों नहीं है?

भीषण गर्मी और मौसम का मिजाज

सोमवार को जयपुर में इस सीजन का सबसे गर्म दिन दर्ज किया गया, जहां अधिकतम तापमान 43.5 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। यह तापमान सामान्य से कई डिग्री अधिक है, जिससे जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है और रातें भी अब काफी गर्म हो रही हैं।

मौसम केंद्र के आंकड़ों के अनुसार, न्यूनतम तापमान भी 31.7 डिग्री दर्ज किया गया है, जो सामान्य से लगभग 6 डिग्री ज्यादा है। ऐसे में देर शाम तक चलने वाली गर्म हवाएं बच्चों और बुजुर्गों के लिए विशेष रूप से हानिकारक साबित हो रही हैं।

अभिभावक सवाल उठा रहे हैं कि अगर आदेश बच्चों की सुरक्षा के लिए जारी किए गए हैं, तो उनका पालन जिला प्रशासन द्वारा सुनिश्चित क्यों नहीं कराया जा रहा? छोटे बच्चों का लंबे समय तक स्कूल में रहना और फिर चिलचिलाती धूप में बस या वैन से घर आना उनकी सेहत बिगाड़ रहा है।

राहत की उम्मीद और भविष्य की स्थिति

मौसम विभाग ने मंगलवार को प्रदेश में एक नए पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने की संभावना जताई है, जिससे तापमान में हल्की गिरावट आ सकती है। हालांकि, जब तक गर्मी का प्रकोप कम नहीं होता, तब तक स्कूलों को समय सीमा का सख्ती से पालन करना अनिवार्य होना चाहिए।

प्रशासन को चाहिए कि वह फ्लाइंग स्क्वायड गठित कर स्कूलों का औचक निरीक्षण करे और दोषियों पर भारी जुर्माना लगाए। बच्चों की सुरक्षा सर्वोपरि है और इसमें किसी भी प्रकार की कोताही उनके भविष्य और स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव डाल सकती है।

निष्कर्षतः, केवल कागजी आदेश जारी करने से बच्चों को राहत नहीं मिलेगी, इसके लिए कड़े प्रशासनिक कदम उठाने की आवश्यकता है। अभिभावकों को भी जागरूक रहकर ऐसे स्कूलों की शिकायत जिला शिक्षा अधिकारी से करनी चाहिए जो नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं।

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