जयपुर | राजस्थान की राजधानी जयपुर के सिद्धार्थ नगर इलाके में एक दिल दहला देने वाला हादसा सामने आया है। यहां एक महिला लेक्चरर की कार से कुचलकर 15 महीने की मासूम बच्ची की मौत हो गई।
यह घटना गुरुवार शाम करीब 5 बजे की बताई जा रही है। मासूम बच्ची अपने घर के बाहर खेल रही थी, तभी पड़ोस में रहने वाली महिला ने कार बैक की।
इसी दौरान बच्ची कार के पिछले टायर के नीचे आ गई। आरोपी महिला शहर की एक नामी प्राइवेट यूनिवर्सिटी में लेक्चरर के पद पर तैनात है।
सिद्धार्थ नगर में पसरा मातम: हादसे की पूरी कहानी
जयपुर के सांगानेर थाना इलाके के सिद्धार्थ नगर में यह दर्दनाक हादसा हुआ। यहां रहने वाले दिनेश गुर्जर की 15 महीने की बेटी किट्टू अपनी जिंदगी खो बैठी।
दिनेश गुर्जर इलाके में ही आबकारी थाने के पास एक डेयरी चलाते हैं। उनका एक पांच साल का बेटा भी है, जो अब अपनी छोटी बहन के बिना अकेला रह गया है।
कैसे हुआ यह दर्दनाक वाकया?
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, किट्टू घर के बाहर सड़क के किनारे खेल रही थी। तभी पड़ोस में रहने वाली काजल ठाकुरिया अपनी कार लेकर बाहर निकलीं।
काजल अपनी कार को रिवर्स यानी पीछे की तरफ ले रही थीं। इसी दौरान मासूम बच्ची अनजाने में कार के पिछले पहिए की चपेट में आ गई।
टायर बच्ची के ऊपर से गुजर गया, जिससे वह बुरी तरह घायल हो गई। हादसे के बाद महिला लेक्चरर घबराकर कार से बाहर निकल आई।
अस्पताल में दो घंटे तक चला संघर्ष
घटना के तुरंत बाद परिजनों में कोहराम मच गया। आनन-फानन में मासूम को उसी कार में डालकर जवाहर सर्किल स्थित ईएचसीसी अस्पताल ले जाया गया।
अस्पताल में डॉक्टरों ने बच्ची को बचाने की पूरी कोशिश की। करीब दो घंटे तक किट्टू जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ती रही।
लेकिन चोटें इतनी गंभीर थीं कि मासूम ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। बच्ची की मौत की खबर सुनते ही परिजनों का सब्र टूट गया और अस्पताल में हंगामा शुरू हो गया।
परिजनों का गंभीर आरोप: सामने से मारी टक्कर
इस मामले में बच्ची के चाचा विक्रम सिंह गुर्जर ने पुलिस के सामने अलग ही दावा किया है। उनका आरोप है कि हादसा लापरवाही का नतीजा है।
विक्रम सिंह ने बताया कि घर के बाहर तीन-चार बच्चे खेल रहे थे। गली का एक सिरा बंद होने के कारण वहां गाड़ियां बहुत सावधानी से चलानी पड़ती हैं।
चाचा का आरोप है कि काजल ने पहले बच्ची को सामने से टक्कर मारी थी। इसके बाद उन्होंने हड़बड़ाहट में गाड़ी को पीछे लिया, जिससे बच्ची कुचल गई।
"मेरी भतीजी अन्य बच्चों के साथ खेल रही थी। महिला ने लापरवाही से गाड़ी चलाई और उसे टक्कर मार दी। यह पूरी तरह से लापरवाही का मामला है।" - विक्रम सिंह गुर्जर, मृतक बच्ची के चाचा
पुलिस की कार्रवाई और जांच की स्थिति
हादसे की सूचना मिलते ही मालवीय नगर एसीपी विनोद कुमार शर्मा और स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया है।
एसीपी विनोद कुमार शर्मा ने बताया कि एयरपोर्ट इलाके के पास रहने वाली 15 महीने की बच्ची की एक्सीडेंट में मौत हुई है।
पुलिस ने आरोपी महिला की कार को जब्त कर लिया है। पुलिस अब सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है ताकि घटना की वास्तविकता का पता लगाया जा सके।
कॉलोनी में सुरक्षा को लेकर उठे सवाल
इस घटना ने रिहायशी इलाकों में तेज रफ्तार और लापरवाही से वाहन चलाने के खतरों को फिर से उजागर कर दिया है। सिद्धार्थ नगर के निवासियों में गहरा रोष है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि गलियों में बच्चे खेलते रहते हैं, ऐसे में वाहन चालकों को बेहद सतर्क रहने की जरूरत होती है।
खासकर कार को बैक करते समय पीछे का दृश्य स्पष्ट न होने पर अक्सर ऐसे हादसे होते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि सेंसर और कैमरों का इस्तेमाल जरूरी है।
मासूम किट्टू के परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
दिनेश गुर्जर का परिवार अपनी छोटी सी बेटी की मौत से सदमे में है। किट्टू घर की सबसे छोटी और लाड़ली सदस्य थी।
डेयरी चलाने वाले दिनेश ने कभी नहीं सोचा था कि उनके घर के बाहर ही उनकी बेटी की जान चली जाएगी। उनके पांच साल के बेटे को भी अब तक समझ नहीं आ रहा है।
पड़ोसियों ने बताया कि किट्टू बहुत ही चंचल बच्ची थी। वह अक्सर शाम को बच्चों के साथ बाहर खेलती थी। काजल ठाकुरिया के परिवार से भी उनके संबंध सामान्य थे।
लेक्चरर की भूमिका और कानूनी पहलू
आरोपी काजल ठाकुरिया एक शिक्षित महिला हैं और विश्वविद्यालय में पढ़ाती हैं। उनकी इस लापरवाही ने उनके करियर और जीवन पर भी बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।
पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। लापरवाही से मौत के मामले में कड़ी सजा का प्रावधान है।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में चालक की मंशा से ज्यादा उसकी सावधानी की कमी को देखा जाता है।
सड़क सुरक्षा और जागरूकता की कमी
जयपुर जैसे बढ़ते शहरों में संकरी गलियों में बड़ी गाड़ियां चलाना एक चुनौती बन गया है। अक्सर लोग जल्दबाजी में सुरक्षा नियमों को ताक पर रख देते हैं।
इस हादसे ने यह सबक दिया है कि घर के बाहर खेलते बच्चों की सुरक्षा केवल माता-पिता की ही नहीं, बल्कि वाहन चालकों की भी जिम्मेदारी है।
पुलिस प्रशासन ने भी अपील की है कि रिहायशी इलाकों में गाड़ी की गति न्यूनतम रखें और मुड़ने या बैक करने से पहले अच्छी तरह जांच लें।
निष्कर्ष: एक मासूम की जान और कई अनसुलझे सवाल
जयपुर का यह हादसा केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि एक चेतावनी है। एक पल की लापरवाही ने एक परिवार का चिराग बुझा दिया और एक हंसते-खेलते घर को मातम में बदल दिया।
अब पुलिस जांच में ही साफ होगा कि असल में गलती किसकी थी, लेकिन किट्टू अब कभी वापस नहीं आएगी। समाज को इस घटना से सबक लेने की जरूरत है।
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