राजस्थान

गोडावण संरक्षण का महासंकल्प: जैसलमेर में मनाया गया गोडावण दिवस, संरक्षण की बढ़ी उम्मीदें

जोगेन्द्र सिंह शेखावत · 22 मई 2026, 12:31 दोपहर
राजस्थान के राज्य पक्षी गोडावण को बचाने के लिए जैसलमेर में भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

जैसलमेर | राजस्थान के राज्य पक्षी गोडावण (ग्रेट इंडियन बस्टर्ड) के संरक्षण और जैव विविधता के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए जैसलमेर में 'गोडावण दिवस' का भव्य आयोजन किया गया। इस अवसर पर प्रदेश सरकार ने पक्षियों को बचाने का दृढ़ संकल्प दोहराया।

उत्कर्ष जैन भवन में आयोजित इस कार्यक्रम में वन एवं पर्यावरण राज्य मंत्री संजय शर्मा मुख्य अतिथि रहे। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा के नेतृत्व में सरकार गोडावण के संरक्षण के लिए प्रभावी कदम उठा रही है।

गोडावण: राजस्थान का गौरव और धरोहर

मंत्री संजय शर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि गोडावण केवल एक पक्षी नहीं है। यह राजस्थान की समृद्ध प्राकृतिक विरासत और मरुस्थलीय पारिस्थितिकी तंत्र का एक महत्वपूर्ण प्रतीक है।

सरकार अब वैज्ञानिक दृष्टिकोण और आधुनिक तकनीक का सहारा ले रही है। इसके साथ ही जनसहभागिता को भी इस अभियान का एक बड़ा हिस्सा बनाया गया है ताकि इस दुर्लभ पक्षी को बचाया जा सके।

"आने वाली पीढ़ियों के लिए इस दुर्लभ पक्षी को सुरक्षित रखना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। सामुदायिक सहभागिता से ही यह अभियान सफल होगा।" - संजय शर्मा

ब्रीडिंग सेंटर्स के सुखद परिणाम

वन विभाग द्वारा सम और रामदेवरा में संचालित गोडावण ब्रीडिंग सेंटर अब अपनी सफलता की कहानी कह रहे हैं। इन केंद्रों की वजह से गोडावण की संख्या में निरंतर वृद्धि दर्ज की जा रही है।

इतना ही नहीं, विशेषज्ञों के अनुसार इनकी प्रजनन क्षमता में भी उल्लेखनीय सुधार हुआ है। यह राजस्थान की जैव विविधता के लिए एक बहुत ही शुभ संकेत माना जा रहा है।

जैसलमेर विधायक छोटूसिंह भाटी ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि गोडावण मरुस्थलीय संस्कृति का अभिन्न हिस्सा है और इसके आवास को सुरक्षित रखना हमारी प्राथमिकता है।

युवाओं और बच्चों की भागीदारी

इस खास मौके पर स्कूलों में भाषण, निबंध और चित्रकला प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। वन मंत्री ने विजेता छात्र-छात्राओं को पुरस्कृत कर उनका उत्साहवर्धन किया।

विद्यार्थियों ने अपनी कला के माध्यम से पर्यावरण बचाने का संदेश दिया। इसके अलावा, विभागीय कर्मियों को मोटरसाइकिल की चाबियाँ और स्कूलों को आवश्यक सामग्री जैसे पंखे और बैग भी वितरित किए गए।

निष्कर्ष के तौर पर, गोडावण दिवस का यह आयोजन न केवल एक उत्सव था, बल्कि प्रकृति के प्रति हमारी जिम्मेदारी का अहसास भी था। सामूहिक प्रयासों से ही हम अपनी धरोहर को बचा पाएंगे।

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