जैसलमेर | राजस्थान के जैसलमेर जिले से एक ऐसी दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है, जिसने रिश्तों की पवित्रता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहाँ एक कलयुगी पोते ने अपनी विलासिता भरी जरूरतों को पूरा करने के लिए अपने ही दादा-दादी की जान ले ली।
यह सनसनीखेज मामला जैसलमेर के मोहनगढ़ कस्बे की भील बस्ती का है। यहाँ रहने वाले बुजुर्ग दंपती लाखाराम (80) और उनकी पत्नी रेशमा (78) की शुक्रवार रात उनके ही पोते ने बड़ी बेरहमी से हत्या कर दी। वारदात के बाद इलाके में दहशत का माहौल है।
रिश्तों का कत्ल और लूट की साजिश
मृतक दंपती निसंतान थे और घर में अकेले ही रहते थे। बुजुर्ग महिला के भतीजे का लड़का सुरेश अक्सर उनके घर आता-जाता रहता था। उसे पता था कि बुजुर्ग दंपती के पास काफी गहने और नकदी हो सकती है।
सुरेश को अपनी लग्जरी लाइफ जीने का शौक था, लेकिन उसकी मीट की दुकान से इतनी कमाई नहीं होती थी। इसी लालच में उसने अपने दोस्त योगेश के साथ मिलकर अपने ही दादा-दादी को रास्ते से हटाने और लूटने की साजिश रची।
शराब के नशे में दिया वारदात को अंजाम
शुक्रवार की रात सुरेश और योगेश जैसलमेर से बाइक पर सवार होकर मोहनगढ़ के लिए निकले। रास्ते में दोनों ने जमकर शराब पी। नशे की हालत में वे बुजुर्ग दंपती के घर पहुंचे और चुपके से अंदर दाखिल हो गए।
आरोपियों ने अपनी बाइक को घर से काफी दूर खड़ा किया था ताकि किसी को उन पर शक न हो। घर के अंदर घुसते ही सुरेश ने दादा लाखाराम के गले से सोने का लॉकेट छीनने की कोशिश की, जिससे उनकी नींद खुल गई।
गला घोंटकर की हत्या, आरी से काटे कड़े
जैसे ही लाखाराम जागे, सुरेश और योगेश ने पकड़े जाने के डर से उनका गला घोंट दिया। शोर सुनकर दादी रेशमा भी जाग गईं, तो आरोपियों ने उन्हें भी मौत के घाट उतार दिया। हत्या के बाद आरोपियों ने लूटपाट शुरू की।
बुजुर्ग रेशमा ने पैरों में चांदी के भारी कड़े पहने हुए थे। जब वे कड़े आसानी से नहीं निकले, तो आरोपियों ने क्रूरता की सारी हदें पार कर दीं। उन्होंने आरी मंगवाई और बुजुर्ग महिला के पैरों से चांदी के कड़े काट कर निकाल लिए।
पुलिस की बड़ी सफलता: 6 घंटे में खुलासा
शनिवार सुबह जब दंपती का भांजा चंदाराम उनसे मिलने पहुंचा, तो घर का नजारा देखकर उसके होश उड़ गए। आंगन में लाखाराम का लहूलुहान शव पड़ा था और कमरे में रेशमा की लाश थी। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची।
जैसलमेर एसपी अभिषेक शिवहरे ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत 50 पुलिसकर्मियों की एक विशेष टीम गठित की। पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों और मोबाइल लोकेशन का सहारा लिया, जिससे सुरेश और योगेश की लोकेशन संदिग्ध पाई गई।
सख्ती से पूछताछ में कबूला जुर्म
पुलिस ने वारदात के महज 6 घंटे के भीतर दोनों आरोपियों को हिरासत में ले लिया। शुरुआत में उन्होंने पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की, लेकिन जब पुलिस ने कड़ाई से पूछताछ की, तो उन्होंने अपना गुनाह कबूल कर लिया।
आरोपी सुरेश (19) और योगेश (24) ने बताया कि वे अपनी महंगी जरूरतों को पूरा करने के लिए पैसे चाहते थे। पुलिस अब आरोपियों से लूटे गए सोने के लॉकेट और चांदी के कड़ों की बरामदगी के प्रयास कर रही है।
समाज के लिए एक चेतावनी
यह घटना समाज के गिरते नैतिक मूल्यों का एक जीता-जागता उदाहरण है। महज कुछ रुपयों और गहनों के लिए एक पोते ने उन बुजुर्गों को मार डाला जिन्होंने उसे हमेशा प्यार दिया था। पुलिस की मुस्तैदी ने इस अंधे कत्ल की गुत्थी को सुलझा लिया।
एसपी अभिषेक शिवहरे ने बताया कि पुलिस टीम की त्वरित कार्रवाई और तकनीकी विश्लेषण की वजह से ही आरोपियों को इतनी जल्दी पकड़ा जा सका। फिलहाल दोनों आरोपी पुलिस की गिरफ्त में हैं और उनसे आगे की पूछताछ जारी है।