राजस्थान

जैसलमेर में गर्मी का कहर, पर्यटन ठप: जैसलमेर में 46 डिग्री की तपिश: पर्यटन उद्योग संकट में

मानवेन्द्र जैतावत · 28 अप्रैल 2026, 03:53 दोपहर
जैसलमेर में पारा 46 डिग्री पार, होटल खाली और कारोबार हुआ ठप।

जैसलमेर | राजस्थान के जैसलमेर जिले में भीषण गर्मी और लू के थपेड़ों ने विश्व प्रसिद्ध पर्यटन की रफ्तार पर पूरी तरह ब्रेक लगा दिया है। पारा 46 डिग्री सेल्सियस के पार जाने से स्वर्ण नगरी की सड़कें और ऐतिहासिक स्थल वीरान नजर आ रहे हैं।

सुबह सात बजे से ही सूरज की किरणें आग उगलने लगती हैं, जिससे पर्यटकों का बाहर निकलना नामुमकिन हो गया है। तपती रेत और झुलसाने वाली हवाओं ने धोरों की रौनक छीन ली है।

पर्यटन कारोबार पर भीषण गर्मी का प्रहार

जैसलमेर का पर्यटन उद्योग पूरी तरह से मौसम पर निर्भर है। जैसे ही तापमान में बढ़ोतरी हुई, सैलानियों ने यहां से दूरी बना ली है और होटल खाली हो गए हैं।

शहर के करीब 400 होटलों में सन्नाटा पसरा हुआ है। स्थिति यह है कि होटलों ने अपने किराए आधे कर दिए हैं, फिर भी सैलानी नहीं मिल रहे हैं।

सम और खुहड़ी के रेगिस्तानी इलाकों में स्थित 150 से अधिक रिसॉर्ट्स में ताले लटक गए हैं। वर्तमान में केवल 10 से 12 रिसॉर्ट्स ही आंशिक रूप से संचालित हो रहे हैं।

रोजगार का संकट और आर्थिक गिरावट

भीषण गर्मी के कारण पर्यटन से जुड़े 10 हजार से अधिक लोगों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। इसमें गाइड, ऊंट संचालक और टैक्सी ड्राइवर शामिल हैं।

सीजन के दौरान जहां रोजाना 10 से 12 हजार पर्यटक जैसलमेर पहुंचते थे, वहीं अब यह संख्या घटकर महज 50 से 100 रह गई है। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था चरमरा गई है।

पिछले 9 महीनों में जिस सेक्टर ने 1800 करोड़ रुपये का कारोबार किया था, वह इन तीन महीनों में नगण्य स्तर पर पहुंच गया है। छोटे व्यापारियों की आय भी खत्म हो गई है।

जैसलमेर में मौसमी निर्भरता सबसे बड़ी चुनौती है। गर्मियों में गतिविधियां ठप होना आर्थिक असंतुलन पैदा करता है। हमें नाइट टूरिज्म और इनडोर हेरिटेज अनुभवों को बढ़ावा देना होगा।

भविष्य की रणनीति और विशेषज्ञ सुझाव

वरिष्ठ पर्यटन व्यवसायी सुमेर सिंह राजपुरोहित का मानना है कि जैसलमेर को सालभर पर्यटन के लिए तैयार रखने हेतु एयर कनेक्टिविटी को मजबूत करना अनिवार्य है।

उनका कहना है कि डेजर्ट सफारी के शाम वाले मॉडल और संग्रहालय आधारित गतिविधियों में निवेश करके गर्मी के इस संकट को अवसर में बदला जा सकता है।

स्थानीय लोग भी गर्मी से बचने के लिए अब पहाड़ी क्षेत्रों जैसे शिमला, लेह-लद्दाख और उत्तराखंड की ओर रुख कर रहे हैं। इससे स्थानीय बाजार में भी सन्नाटा बढ़ गया है।

निष्कर्षतः, जैसलमेर के पर्यटन को बचाने के लिए नए नवाचारों और सरकारी सहयोग की तत्काल आवश्यकता है। यदि उचित कदम नहीं उठाए गए, तो हर साल यह संकट गहराता जाएगा।

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