जयपुर | राजस्थान के बहुचर्चित जल जीवन मिशन (JJM) घोटाले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) की कार्रवाई अब एक नए मोड़ पर पहुंच गई है। शुक्रवार को इस मामले के मुख्य आरोपी संजय बड़ाया को अदालत में पेश किया गया।
एसीबी की रिमांड याचिका हुई खारिज
एसीबी के अधिकारियों ने संजय बड़ाया की रिमांड अवधि पूरी होने पर उन्हें कड़ी सुरक्षा के बीच कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत किया। ब्यूरो ने जांच का हवाला देते हुए आरोपी से और पूछताछ की आवश्यकता जताई थी।
एसीबी की ओर से कोर्ट में दलील दी गई कि घोटाले से जुड़े कई महत्वपूर्ण तथ्यों का खुलासा अभी बाकी है। इसके लिए जांच एजेंसी ने संजय बड़ाया के लिए तीन दिन की अतिरिक्त रिमांड की मांग की थी।
एसीबी का मानना है कि आरोपी के पास घोटाले से संबंधित कई गोपनीय जानकारियां हो सकती हैं। इन जानकारियों को उगलवाने के लिए हिरासत में पूछताछ करना बेहद जरूरी है।
बचाव पक्ष की दलीलें और कोर्ट का फैसला
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के वकीलों ने एसीबी की रिमांड अर्जी का कड़ा विरोध किया। उन्होंने अदालत को बताया कि आरोपी से पहले ही कई दिनों तक विस्तृत पूछताछ की जा चुकी है।
बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि अब आरोपी को और अधिक समय तक पुलिस कस्टडी में रखने का कोई ठोस आधार नहीं है। उन्होंने संजय बड़ाया को न्यायिक अभिरक्षा में भेजने की अपील की।
दोनों पक्षों की लंबी बहस और दलीलें सुनने के बाद, अदालत ने एसीबी की याचिका को अस्वीकार कर दिया। कोर्ट ने आरोपी संजय बड़ाया को न्यायिक अभिरक्षा (जेल) में भेजने के आदेश जारी कर दिए।
जल जीवन मिशन घोटाला: क्या है पूरा मामला?
जल जीवन मिशन घोटाला राजस्थान के सबसे बड़े भ्रष्टाचार मामलों में से एक बनकर उभरा है। इस मामले में करोड़ों रुपये के टेंडर आवंटन और घटिया पाइप खरीद में भारी अनियमितताओं के आरोप लगे हैं।
भ्रष्टाचार के जाल में कई बड़े नाम
जांच के दौरान यह सामने आया है कि कई रसूखदार लोगों और प्रभावशाली अधिकारियों की मिलीभगत से सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया। संजय बड़ाया को इस पूरी साजिश की एक अहम कड़ी माना जा रहा है।
एसीबी इस घोटाले की तह तक जाने के लिए लगातार छापेमारी और गिरफ्तारियां कर रही है। संजय बड़ाया से हुई अब तक की पूछताछ में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं और कुछ नए नाम सामने आए हैं।
ब्यूरो अब उन डिजिटल सबूतों और दस्तावेजों की बारीकी से जांच कर रहा है, जो हालिया छापों के दौरान बरामद किए गए थे। जेल में रहने के दौरान भी आरोपी से कानूनी प्रक्रिया के तहत पूछताछ जारी रह सकती है।
भ्रष्टाचार के मामलों में जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जा रही है। जांच एजेंसी हर पहलू की बारीकी से पड़ताल कर रही है ताकि जनता के पैसे की लूट करने वालों को सजा मिल सके।
जांच का दायरा बढ़ने की संभावना
इस घोटाले में कई अन्य ठेकेदारों और जलदाय विभाग के बड़े अधिकारियों पर भी गाज गिर सकती है। एसीबी की टीम अब उन संदिग्ध बैंक खातों और लेन-देन के विवरणों को खंगाल रही है।
संजय बड़ाया के जेल जाने से अब इस मामले में शामिल अन्य संदिग्धों में हड़कंप मचा हुआ है। सूत्रों के अनुसार, आने वाले दिनों में इस केस में कुछ और बड़ी गिरफ्तारियां होने की पूरी संभावना है।
जल जीवन मिशन घोटाले में संजय बड़ाया का जेल जाना एसीबी की एक बड़ी कामयाबी माना जा रहा है। हालांकि, रिमांड न मिलना जांच की गति को थोड़ा प्रभावित कर सकता है, लेकिन कानूनी प्रक्रिया निरंतर जारी रहेगी।
प्रदेश की जनता की नजरें अब इस घोटाले के अगले बड़े खुलासों पर टिकी हैं। एसीबी का दावा है कि वे जल्द ही इस पूरे नेक्सस का पर्दाफाश कर देंगे और सभी दोषियों को सलाखों के पीछे पहुंचाएंगे।
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